दशहरा 2026: दशहरा 2026 कब है और रावण दहन किस दिन होगा? जानें विजयादशमी की सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और दशहरे से जुड़ी खास बातें।
[[[[ दशहरा 2026: मुख्य तिथियां और शुभ मुहूर्त
- दशमी तिथि का प्रारंभ: 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:50 बजे
- दशमी तिथि का समापन: 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:11 बजे
- विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक
- अपराह्न पूजा का समय: दोपहर 1:14 बजे से शाम 3:30 बजे तक
- सूर्यास्त का समय: शाम लगभग 5:47 बजे
- रावण दहन का समय: शाम 5:50 बजे से रात 8:15 बजे तक। ]]]]
दशहरा 2026: दशहरा 2026 कब है? इस साल दशहरा 20 अक्टूबर, मंगलवार को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में दशहरा को विजयादशमी भी कहा जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। वहीं, विजयादशमी को मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी जोड़कर देखा जाता है।
वर्ष 2026 में दशहरा की तारीख को लेकर 20 और 21 अक्टूबर का भ्रम इसलिए है, क्योंकि दशमी तिथि दोनों तारीखों में पड़ रही है। पंचांग के अनुसार, दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर शुरू होकर 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी। सामान्य दशहरा पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा, हालांकि कुछ क्षेत्रीय धार्मिक परंपराओं में विजयादशमी 21 अक्टूबर को मनाई जाती है।
यहां जानिए दशहरा 2026 की तारीख, दशमी तिथि, विजय मुहूर्त, रावण दहन का समय, पूजा विधि और इस पर्व का धार्मिक महत्व।
दशहरा 2026 की तारीख क्या है?
दशहरा 2026 में 20 अक्टूबर, मंगलवार को मनाया जाएगा। यह पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को आता है। नवरात्रि के नौ दिनों के बाद आने वाली दशमी तिथि को विजयादशमी के रूप में भी जाना जाता है।
इस दिन भगवान श्रीराम की पूजा, रामलीला और रावण दहन जैसे आयोजन किए जाते हैं। कई धार्मिक परंपराओं में मां दुर्गा की विजय के उपलक्ष्य में भी यह पर्व मनाया जाता है।
दशहरा 2026 की तिथि और समय
| त्योहार | तिथि और समय |
| दशहरा 2026 | 20 अक्टूबर मंगलवार |
| दशहरा तिथि प्रारंभ | 20 अक्टूबर दोपहर 12:50 बजे |
| दशहरा तिथि समाप्त | 21 अक्टूबर दोपहर 2:11 बजे |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक |
| रावण दहन | शाम 5:50 बजे से रात 8:15 बजे तक |
20 या 21 अक्टूबर, कब है दशहरा 2026?
दशहरा 2026 की तारीख को लेकर भ्रम का मुख्य कारण दशमी तिथि का दो कैलेंडर तारीखों में पड़ना है। तिथि 20 अक्टूबर की दोपहर से शुरू होकर 21 अक्टूबर की दोपहर तक रहेगी।
हिंदू पंचांग में विजयादशमी का दिन निर्धारित करते समय दशमी तिथि के साथ अपराह्न काल की स्थिति और संबंधित धार्मिक परंपरा को भी ध्यान में रखा जाता है। इसलिए कुछ क्षेत्रों में दशहरा 20 अक्टूबर को, जबकि कुछ परंपराओं में विजयादशमी 21 अक्टूबर को मनाई जा सकती है।
दशहरा 2026 का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, दशहरा यानी विजयादशमी के दिन विजय मुहूर्त और अपराह्न काल में पूजा करना विशेष शुभ माना जाता है। इस दिन अपराजिता पूजा सहित अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। दशहरा 2026 की तिथि और पूजा का समय इस प्रकार है।
दशहरा 2026 शुभ मुहूर्त एवं समय
- विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 से 2:45 तक।
- अपराह्न पूजा का समय: दोपहर 1:14 मिनट से 3:30 बजे तक।
- दशमी तिथि प्रारंभ: 20 अक्टूबर 2026, दोपहर 12:50 बजे पर।
- दशमी तिथि समाप्त: 21 अक्टूबर 2026, दोपहर 2:11 बजे पर।
दशहरा 2026 पर रावण दहन कब होगा?
दशहरा 2026 मंगलवार, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन विजयादशमी के अवसर पर भगवान श्रीराम की पूजा की जाती है और कई स्थानों पर शाम को रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है।
रावण दहन का समय
- दशमी तिथि का प्रारंभ: 20 अक्टूबर 2026, दोपहर 12:50 बजे
- दशमी तिथि का समापन: 21 अक्टूबर 2026, दोपहर 2:11 बजे
- विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 से 2:45 बजे
- रावण दहन का समय: 20 अक्टूबर को सूर्यास्त के बाद, शाम 5:50 बजे से रात 8:15 बजे तक
दशहरा क्यों मनाया जाता है?
दशहरा मनाने के पीछे दो प्रमुख धार्मिक मान्यताएं हैं। पहली भगवान श्रीराम की रावण पर विजय से जुड़ी है और दूसरी मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से संबंधित है।
भगवान श्रीराम और रावण की कथा
रामायण के अनुसार, लंकापति रावण ने माता सीता का हरण किया था। माता सीता को मुक्त कराने के लिए भगवान श्रीराम ने वानर सेना की सहायता से लंका पर आक्रमण किया। इसके बाद श्रीराम और रावण के बीच युद्ध हुआ। अंत में भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया।
इस घटना को अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इसी मान्यता के कारण दशहरे पर रावण दहन किया जाता है। यह कथा हमें सिखाती है कि अहंकार और गलत कर्म व्यक्ति के पतन का कारण बन सकते हैं।
मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय
एक अन्य धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा ने महिषासुर का वध करके संसार को उसके अत्याचार से मुक्त कराया था। इस विजय को शक्ति और धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है।
इसी कारण विजयादशमी का संबंध नवरात्रि और देवी दुर्गा की आराधना से भी है। अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में इस पर्व को अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है, लेकिन इसका मूल संदेश विजय और धर्म की स्थापना है।
दशहरा 2026 की पूजा विधि
दशहरा के दिन पूजा की विधि परिवार और धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। सामान्य रूप से श्रद्धालु सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनते हैं और पूजा स्थल को साफ करते हैं। इसके बाद भगवान श्रीराम, माता सीता और अपने आराध्य देव का स्मरण किया जाता है।
दशहरा पूजा की विधि:
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थल को साफ करके भगवान गणेश का स्मरण करें।
- भगवान श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी को फूल, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
- अपनी परंपरा के अनुसार अपराजिता पूजा या शमी पूजा करें।
- अपने काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों, पुस्तकों या अन्य साधनों की पूजा करें, यदि आपके परिवार में यह परंपरा है।
- परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करें।
- शाम को रामलीला देखें और स्थानीय आयोजन के अनुसार रावण दहन में शामिल हों।
विजयादशमी पर अपराजिता पूजा का महत्व
- अजेय शक्ति का प्रतीक: माता अपराजिता को मां दुर्गा का शक्तिशाली स्वरूप माना जाता है। उनकी पूजा विजय, साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक है।
- भगवान श्रीराम से जुड़ी मान्यता: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी का दिन भगवान श्रीराम की रावण पर विजय का प्रतीक है। इस दिन माता अपराजिता की पूजा भी विजय की कामना से की जाती है।
- बाधाओं पर विजय: मान्यता है कि माता अपराजिता की पूजा करने से जीवन की कठिनाइयों और बाधाओं पर विजय पाने का आशीर्वाद मिलता है।
- अभय और सफलता का आशीर्वाद: विजयादशमी पर माता की पूजा करके भय से मुक्ति, साहस और कार्यों में सफलता की कामना की जाती है।
- शमी वृक्ष का महत्व: विजयादशमी पर शमी वृक्ष की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे सुख-समृद्धि और विजय का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
दशहरा पर शमी पूजा क्यों की जाती है?
दशहरा यानी विजयादशमी के दिन शमी के पेड़ की पूजा करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शमी वृक्ष की पूजा विजय, साहस, सुख-समृद्धि और शनि दोष से मुक्ति की कामना से की जाती है।
दशहरा पर शमी के पेड़ की पूजा का महत्व
- भगवान श्रीराम की विजय: मान्यता है कि शमी वृक्ष का संबंध भगवान श्रीराम की रावण पर विजय से है। इसलिए विजयादशमी पर इसकी पूजा की जाती है।
- पांडवों से जुड़ा प्रसंग: महाभारत के अनुसार, अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र शमी के पेड़ पर छिपाए थे। अज्ञातवास पूरा होने पर उन्होंने इन्हें वापस प्राप्त किया।
- शमी के पत्तों का महत्व: दशहरे पर शमी के पत्तों को सोने का प्रतीक मानकर अपनों को बांटने की परंपरा है। इसे सुख-समृद्धि और आपसी प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
- ज्योतिषीय महत्व: शमी वृक्ष का संबंध शनिदेव से भी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसकी पूजा करने से शनि दोष के अशुभ प्रभावों को शांत करने और जीवन की बाधाओं से मुक्ति पाने की कामना की जाती है।
दशहरा का धार्मिक महत्व क्या है?
दशहरा यानी विजयादशमी बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। यह पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है।
दशहरा से जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यताएं:
- भगवान श्रीराम की विजय: मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। यह अहंकार और बुराई के अंत का प्रतीक है।
- मां दुर्गा की विजय: पौराणिक कथा के अनुसार, मां दुर्गा ने नौ दिनों के युद्ध के बाद दसवें दिन महिषासुर का वध किया था।
- बुराइयों का अंत: यह पर्व हमें अहंकार, क्रोध और नकारात्मकता त्यागकर सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
- शस्त्र पूजा: इस दिन शस्त्रों और औजारों की पूजा करने की परंपरा है, जो शक्ति, साहस और सुरक्षा का प्रतीक है।
- नवरात्रि का समापन: विजयादशमी शारदीय नवरात्रि के समापन का प्रतीक है। इस दिन सुख-समृद्धि और सफलता की कामना की जाती है।
दशहरा और विजयादशमी में क्या अंतर है?
दशहरा और विजयादशमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहार हैं, जिन्हें आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। दोनों नाम एक ही पर्व के लिए प्रचलित हैं, लेकिन इनसे जुड़ी पौराणिक कथाओं और क्षेत्रीय परंपराओं की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। जहां दशहरा भगवान श्रीराम की रावण पर विजय की याद दिलाता है, वहीं विजयादशमी मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय का प्रतीक है।
1. दशहरा और विजयादशमी की पौराणिक कथा
- दशहरा: धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने इसी दिन रावण का वध करके अधर्म पर धर्म की विजय स्थापित की थी। इसी कारण दशहरे पर रावण दहन की परंपरा है।
- विजयादशमी: पौराणिक कथा के अनुसार, मां दुर्गा ने नौ दिनों तक चले युद्ध के बाद दसवें दिन महिषासुर का वध किया था। यह पर्व देवी शक्ति और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
2. अलग-अलग राज्यों में उत्सव की परंपराएं
उत्तर और मध्य भारत में दशहरा मुख्य रूप से रामलीला और रावण दहन के लिए प्रसिद्ध है। पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में विजयादशमी दुर्गा पूजा के समापन और मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन से जुड़ी है। वहीं, दक्षिण भारत में शमी पूजा, शस्त्र पूजा और विद्यारंभ जैसी परंपराओं का भी विशेष महत्व है।
निष्कर्ष:
दशहरा 2026 की प्रमुख तारीख 20 अक्टूबर, मंगलवार है। इस वर्ष दशमी तिथि 20 अक्टूबर की दोपहर से शुरू होकर 21 अक्टूबर की दोपहर तक रहेगी। कुछ क्षेत्रीय परंपराओं में विजयादशमी 21 अक्टूबर को भी मनाई जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
दशहरा 2026 की प्रमुख तारीख 20 अक्टूबर, मंगलवार है।
विजय मुहूर्त का समय दोपहर 1:59 से 2:45 बजे तक का है।
रावण दहन दशहरा की शाम को 5:50 बजे से रात 8:15 बजे तक किया जाएगा।
दशहरा भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय की स्मृति में मनाया जाता है। यह अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है।
दशहरा पर अपराजिता पूजा, शमी पूजा, शस्त्र पूजा और आयुध पूजा की जाती है।
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