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Putrada Ekadashi: अगस्त 2026 में सावन की दूसरी पुत्रदा एकादशी कब है? जानें सही तिथि, पारण समय, पूजा विधि और महत्व

Putrada Ekadashi: अगस्त 2026 में सावन की दूसरी पुत्रदा एकादशी कब है? जानें सही तिथि, पारण समय, पूजा विधि और महत्व
By Pt. Jitendra Vyas | Aug-14-2026

Putrada Ekadashi 2026: अगस्त में सावन की पुत्रदा एकादशी कब है? जानें सही तिथि, पारण समय, पूजा विधि, महत्व और व्रत के नियम।

Putrada Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। वर्ष में दो बार पुत्रदा एकादशी आती है- एक पौष शुक्ल पक्ष में और दूसरी श्रावण शुक्ल पक्ष में। अगस्त 2026 में पड़ने वाली यह श्रावण पुत्रदा एकादशी, सावन की दूसरी पुत्रदा एकादशी है। इसे भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से संतान सुख, संतान की सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। संतान की इच्छा रखने वाले दंपती भी इस व्रत को श्रद्धा से रखते हैं।

अगर आप जानना चाहते हैं कि अगस्त 2026 में सावन की दूसरी पुत्रदा एकादशी कब है, व्रत किस दिन रखा जाएगा, पारण कब होगा और पूजा की सही विधि क्या है, तो इस लेख में जानें Putrada Ekadashi 2026 की सही तिथि, एकादशी तिथि का समय, पारण, पूजा विधि, महत्व, व्रत के नियम, क्या खाएं और क्या न खाएं।

 

अगस्त 2026 में पुत्रदा एकादशी कब है?

श्रावण पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त 2026, रविवार को है। यह सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। पंचांग गणना के अनुसार एकादशी तिथि 23 अगस्त को रात 2:00 बजे शुरू होगी और 24 अगस्त को सुबह 4:18 बजे समाप्त होगी।

 

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 तिथि और समय

विवरणसमय
पुत्रदा एकादशी व्रत 23 अगस्त 2026, रविवार
एकादशी तिथि प्रारंभ23 अगस्त, रात 2:00 बजे
पारण द्वादशी तिथि में 24 अगस्त 2026,  सुबह 5:30 बजे से 8:30 बजे के बीच

पुत्रदा एकादशी का पारण कब होगा?

श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखने के बाद 24 अगस्त 2026 को द्वादशी तिथि में पारण किया जाएगा। व्रत का पारण सूर्योदय के बाद और हरिवासर समाप्त होने पर करना शुभ माना जाता है। सामान्यतः पारण का समय सुबह 5:30 बजे से 8:30 बजे के बीच रहेगा। 

हालांकि, सूर्योदय के समय में शहर के अनुसार अंतर होने के कारण पारण का सटीक समय स्थान विशेष के पंचांग के अनुसार ही मान्य होगा। इसलिए व्रत खोलने से पहले अपने स्थानीय पंचांग में पारण का समय जरूर देख लें।

 

पुत्रदा एकादशी का महत्व

श्रावण शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी को संतान और परिवार के कल्याण से जुड़ी महत्वपूर्ण एकादशी माना जाता है। 'पुत्रदा' का अर्थ पुत्र या संतान प्रदान करने वाली माना गया है। हालांकि यह संतान की प्राप्ति के साथ-साथ संतान के स्वास्थ्य, सुख, दीर्घायु और परिवार की खुशहाली की कामना से भी जुड़ा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से-

  • संतान सुख की कामना पूरी होने का आशीर्वाद मिलता है।

  • संतान के सुख और कल्याण की प्रार्थना की जाती है।

  • परिवार में सुख-शांति बनी रहने की कामना की जाती है।

  • भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

  • पापों के क्षय और आध्यात्मिक उन्नति की मान्यता है।

  • दांपत्य जीवन में सुख और सकारात्मकता की कामना की जाती है।

श्रावण पुत्रदा एकादशी विशेष रूप से भगवान विष्णु की भक्ति और संतान के कल्याण के लिए प्रार्थना का अवसर मानी जाती है।

 

पुत्रदा एकादशी पूजा विधि

पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के लिए इन चरणों का पालन कर सकते हैं-

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  2. पूजा स्थान की साफ-सफाई करें।

  3. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।

  4. व्रत का संकल्प लें।

  5. भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक और धूप जलाएं।

  6. चंदन, अक्षत और पीले फूल अर्पित करें।

  7. भगवान विष्णु को तुलसी दल चढ़ाएं।

  8. फल, पंचामृत और सात्विक नैवेद्य अर्पित करें।

  9. 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।

  10. विष्णु सहस्रनाम या पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें।

  11. शाम को भगवान विष्णु की आरती करें।

  12. अगले दिन द्वादशी में स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण करें।

पुत्रदा एकादशी पूजा सामग्री

पूजा के लिए आप अपनी सुविधा के अनुसार ये सामग्री रख सकते हैं-

  • भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर

  • माता लक्ष्मी की तस्वीर

  • पीले फूल

  • तुलसी दल

  • चंदन

  • अक्षत

  • धूप

  • घी का दीपक

  • पंचामृत

  • फल

  • नारियल

  • पंचमेवा

  • पीले वस्त्र

  • नैवेद्य

  • कपूर

पुत्रदा एकादशी पर क्या खाएं?

व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। इस दौरान फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, शकरकंद, नारियल पानी और सूखे मेवों का सेवन किया जा सकता है।

पुत्रदा एकादशी पर क्या न खाएं?

एकादशी व्रत में सामान्यतः इन चीजों का सेवन नहीं किया जाता-

  • चावल

  • गेहूं और अन्य अनाज

  • सामान्य दालें

  • प्याज और लहसुन

  • मांसाहार

  • शराब और अन्य नशीले पदार्थ

पुत्रदा एकादशी पर क्या करें?

  • भगवान विष्णु की पूजा करें

  • तुलसी दल अर्पित करें

  • विष्णु मंत्र का जाप करें

  • पुत्रदा एकादशी व्रत कथा सुनें या पढ़ें

  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें

  • संतान के स्वास्थ्य और सुख के लिए प्रार्थना करें

  • जरूरतमंदों को भोजन कराएं

  • अन्न, फल या वस्त्र का दान करें

  • क्रोध, झूठ और निंदा से बचें

  • रात में भगवान विष्णु का स्मरण और भजन करें

पुत्रदा एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए?

  • झूठ और छल से बचें

  • किसी का अपमान न करें

  • क्रोध और विवाद न करें

  • तामसिक भोजन का सेवन न करें

  • नशे से दूर रहें

  • एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें

  • गलत विचारों और बुरे कर्मों से बचें

पुत्रदा एकादशी के मंत्र

  • भगवान विष्णु मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

  • नारायण मंत्र

ॐ नमो नारायणाय॥

संतान सुख और परिवार के कल्याण की कामना से भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप किया जा सकता है।

 

पुत्रदा एकादशी पर क्या दान करें?

  • इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, फल, पीले वस्त्र, घी, धार्मिक पुस्तकें, मिठाई और दक्षिणा का दान किया जा सकता है। 

  • जरूरतमंदों को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है।

दान का उद्देश्य केवल धार्मिक फल की कामना करना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता और सेवा भाव रखना भी है।

 

पुत्रदा एकादशी व्रत के लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत-

  • संतान सुख की कामना के लिए शुभ माना जाता है।

  • संतान के स्वास्थ्य और कल्याण की प्रार्थना के लिए महत्वपूर्ण है।

  • परिवार में सुख-शांति की कामना की जाती है।

  • भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

  • मन को शांति और सकारात्मकता मिलती है।

  • आध्यात्मिक उन्नति और आत्मसंयम की प्रेरणा मिलती है।

निष्कर्ष:

Putrada Ekadashi 2026 यानी सावन की दूसरी पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त 2026, रविवार को है। एकादशी तिथि 23 अगस्त रात 2:00 बजे से 24 अगस्त सुबह 4:18 बजे तक रहेगी। 

पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु की आराधना और संतान के सुख-कल्याण की कामना से जुड़ी महत्वपूर्ण एकादशी है। इस दिन श्रद्धा से भगवान विष्णु की पूजा करें, तुलसी दल अर्पित करें, व्रत कथा सुनें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

पुत्रदा एकादशी व्रत कब है? +

सावन की पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त 2026, रविवार को है। वैष्णव परंपरा में व्रत 24 अगस्त को रखा जा सकता है।

पुत्रदा एकादशी करने से क्या फल मिलता है? +

धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे संतान सुख, संतान के कल्याण, सुख-समृद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

पुत्रदा एकादशी की पूजा कैसे करें? +

स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें, तुलसी दल, पीले फूल, चंदन और फल अर्पित करें। विष्णु मंत्र का जाप कर आरती करें।

पुत्रदा एकादशी के व्रत में क्या खाना चाहिए? +

फल, दूध, मखाना, साबूदाना, शकरकंद, नारियल पानी, कुट्टू-सिंघाड़े के आटे से बने फलाहारी व्यंजन और सूखे मेवे ले सकते हैं।

पुत्रदा एकादशी के दिन क्या नहीं करना चाहिए? +

चावल और अनाज का सेवन, मांसाहार व नशे से बचें। क्रोध, झूठ, निंदा और विवाद भी नहीं करना चाहिए।

पुत्रदा एकादशी पर क्या उपाय करने चाहिए? +

भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें और जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र का दान करें।

पुत्रदा एकादशी पर क्या उपाय करने चाहिए? +

संतान सुख की कामना के लिए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और संतान के स्वास्थ्य व सुख के लिए प्रार्थना करें।

पुत्रदा एकादशी के दिन बाल धोना चाहिए या नहीं? +

बाल धोने पर कोई सार्वभौमिक धार्मिक निषेध नहीं है। स्वच्छता के लिए स्नान और बाल धो सकते हैं। हालांकि, यदि आपकी पारिवारिक या स्थानीय परंपरा में एकादशी के दिन बाल न धोने का नियम है, तो उसका पालन कर सकते हैं।

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