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सितंबर 2026 संकष्टी चतुर्थी: व्रत की तारीख, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय समय

सितंबर 2026 संकष्टी चतुर्थी: व्रत की तारीख, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय समय
By Pt. Jitendra Vyas | Sep-18-2026

संकष्टी चतुर्थी 2026: भगवान गणेश को समर्पित संकष्टी चतुर्थी का व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने, व्रत रखने और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से जीवन के विघ्न दूर होते हैं और भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है।

सितंबर 2026 में संकष्टी चतुर्थी का व्रत 29 सितंबर, मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन पड़ने वाली संकष्टी को विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। चतुर्थी तिथि 29 सितंबर को शाम 5:09 बजे शुरू होकर 30 सितंबर को दोपहर 2:55 बजे समाप्त होगी।

आइए जानते हैं सितंबर 2026 की संकष्टी चतुर्थी की तिथि, चतुर्थी तिथि का समय, चंद्रोदय, गणपति पूजा विधि, व्रत के नियम और धार्मिक महत्व।

सितंबर 2026 में संकष्टी चतुर्थी कब है?

सितंबर 2026 में संकष्टी चतुर्थी का व्रत 29 सितंबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। यह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है और इसे विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।

इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने के साथ दिनभर व्रत रखा जाता है। शाम को चंद्रमा के उदय होने के बाद चंद्र देव को अर्घ्य दिया जाता है और फिर भगवान गणेश की पूजा करके व्रत का पारण किया जाता है।

सितंबर 2026 संकष्टी चतुर्थी तिथि और समय

1.व्रत: संकष्टी चतुर्थी

2.तारीख: 29 सितंबर 2026

3.दिन: मंगलवार

4.नाम: विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी

5.पक्ष: कृष्ण पक्ष

6.चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 29 सितंबर, शाम 5:09 बजे

7.चतुर्थी तिथि समाप्त: 30 सितंबर, दोपहर 2:55 बजे

8.आराध्य देव: भगवान गणेश

संकष्टी चतुर्थी 2026 का शुभ समय

सितंबर 2026 की संकष्टी चतुर्थी की चतुर्थी तिथि 29 सितंबर शाम 5:09 बजे से शुरू होकर 30 सितंबर दोपहर 2:55 बजे तक रहेगी।

गणेश पूजा के लिए शाम का समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, पूजा और चंद्र दर्शन के सटीक समय में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है।

संकष्टी चतुर्थी 2026 में चंद्रोदय कब होगा?

संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रोदय का विशेष महत्व माना जाता है। 29 सितंबर 2026 को अलग-अलग शहरों में चंद्रमा के उदय का समय अलग रहेगा। चंद्रोदय लगभग रात 8:15 बजे से 9:05 बजे के बीच हो सकता है इसलिए व्रत का पारण करने से पहले अपने शहर के अनुसार चंद्रोदय का सटीक समय जरूर देख लें।

1.तिथि: 29 सितंबर 2026, मंगलवार

2.पर्व: अंगारकी संकष्टी चतुर्थी

3.भगवान: भगवान गणेश

4.चंद्रोदय: लगभग रात 8:15 बजे से 9:05 बजे के बीच, स्थान के अनुसार अलग-अलग

5.व्रत पारण: चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद

संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व

1.संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश की आराधना के लिए समर्पित मानी जाती है।

2.हिंदू धर्म में गणेश जी को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना गया है। इसलिए किसी भी शुभ कार्य से पहले गणपति की पूजा करने की परंपरा है।

3.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी पर व्रत और गणेश पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

4.भक्त भगवान गणेश से सुख, समृद्धि, सफलता और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।

5.इस दिन गणेश जी को दूर्वा और मोदक अर्पित करने की विशेष परंपरा है।

संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि

संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा के लिए ये सरल विधि अपनाई जाती है:

1.सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें।

2.पूजा स्थल की सफाई करके भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।

3.भगवान गणेश का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें।

4.गणेश जी को जल, रोली, अक्षत, चंदन और फूल अर्पित करें।

5.गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें।

6.मोदक, फल या अपनी परंपरा के अनुसार सात्त्विक भोग लगाएं।

7.‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें।

8.गणेश चालीसा या गणेश स्तुति का पाठ करें।

9.शाम को चंद्रमा के उदय होने की प्रतीक्षा करें।

10.चंद्रमा को जल अर्पित करके भगवान गणेश का ध्यान करें।

11.गणेश जी की आरती करें।

12.इसके बाद अपनी व्रत परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें।

संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश को क्या चढ़ाएं?

गणेश जी की पूजा में श्रद्धा के साथ निम्न चीजें अर्पित की जा सकती हैं:

1.दूर्वा

2.मोदक

3.फूल

4.फल

5.अक्षत

6.रोली

7.चंदन

8.नारियल

9.गुड़

10.सात्त्विक भोग

दूर्वा और मोदक भगवान गणेश की पूजा में विशेष रूप से लोकप्रिय माने जाते हैं।

संकष्टी चतुर्थी पर कौन सा मंत्र पढ़ें?

संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश के सरल मंत्र का जाप किया जा सकता है:

ॐ गं गणपतये नमः।

संकष्टी चतुर्थी व्रत में क्या खाएं?

संकष्टी चतुर्थी पर व्रत रखने वाले भक्त अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार फलाहार करते हैं। फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना और अन्य व्रत योग्य खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है।

व्रत के नियम सभी परिवारों और क्षेत्रों में एक जैसे नहीं होते। इसलिए अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार व्रत रखना उचित है।

संकष्टी चतुर्थी और गणेश चतुर्थी में क्या अंतर है?

संकष्टी चतुर्थी और गणेश चतुर्थी दोनों भगवान गणेश को समर्पित हैं, लेकिन इनकी तिथियां अलग होती हैं।

संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आती है, जबकि विनायक चतुर्थी/गणेश चतुर्थी शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष:

संकष्टी चतुर्थी 2026 में सितंबर महीने का व्रत 29 सितंबर, मंगलवार को रखा जाएगा। यह विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी है। चतुर्थी तिथि 29 सितंबर को शाम 5:09 बजे शुरू होकर 30 सितंबर को दोपहर 2:55 बजे समाप्त होगी।

इस दिन भक्त भगवान गणेश की पूजा, व्रत और मंत्र जाप करते हैं। शाम को चंद्रमा के दर्शन करके उन्हें अर्घ्य दिया जाता है और इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सितंबर 2026 में संकष्टी चतुर्थी कब है? +

सितंबर 2026 में संकष्टी चतुर्थी का व्रत 29 सितंबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा।

सितंबर 2026 की संकष्टी चतुर्थी का नाम क्या है? +

सितंबर 2026 की संकष्टी चतुर्थी को विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।

संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश को क्या चढ़ाएं? +

भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक, फल, फूल, अक्षत, चंदन और सात्त्विक भोग अर्पित किया जा सकता है।

क्या संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा को अर्घ्य देना जरूरी है? +

संकष्टी चतुर्थी की पारंपरिक व्रत विधि में चंद्र दर्शन के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पारण करने की परंपरा है।

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