July 2026 Purnima Date: जुलाई 2026 में पूर्णिमा कब है? जानें आषाढ़ पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा की सही तारीख

July 2026 Purnima Date: जुलाई 2026 में पूर्णिमा कब है? जानें आषाढ़ पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा की सही तारीख
By Pt. Jitendra Vyas | Jul-4-2026

गुरु पूर्णिमा 2026:जानें जुलाई 2026 में आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) कब है। देखें सही तिथि, समय, पूजा विधि, व्रत, पारण, दान और धार्मिक महत्व।

गुरु पूर्णिमा 2026: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। प्रत्येक माह आने वाली पूर्णिमा भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा के लिए शुभ मानी जाती है। लेकिन आषाढ़ मास की पूर्णिमा का महत्व अन्य पूर्णिमाओं से अधिक माना गया है, क्योंकि इसी दिन गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा का पर्व भी मनाया जाता है।

यदि आप July 2026 Purnima Date, जुलाई 2026 में पूर्णिमा कब है, गुरु पूर्णिमा 2026 कब है, आषाढ़ पूर्णिमा 2026 या व्यास पूर्णिमा 2026 की सही जानकारी खोज रहे हैं, तो यहां आपको तिथि, शुभ समय, पूजा विधि, व्रत, पारण, धार्मिक महत्व और गुरु पूर्णिमा से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी।

जुलाई 2026 में पूर्णिमा कब है? (July 2026 Purnima Date)

वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) 29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन गुरु की पूजा, महर्षि वेदव्यास का स्मरण, भगवान विष्णु की आराधना, स्नान-दान और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व माना जाता है।

जुलाई 2026 पूर्णिमा तिथि

पूर्णिमा का नाम: आषाढ़ पूर्णिमा
पर्व: गुरु पूर्णिमा एवं व्यास पूर्णिमा
पूर्णिमा की तारीख: 29 जुलाई 2026, बुधवार
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 28 जुलाई 2026, शाम 06:18 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 29 जुलाई 2026, रात 08:05 बजे
व्रत एवं पूजा का दिन: 29 जुलाई 2026
व्रत पारण: 30 जुलाई 2026, गुरुवार

आषाढ़ पूर्णिमा 2026 तिथि और समय

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 28 जुलाई 2026, शाम 06:18 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 29 जुलाई 2026, रात 08:05 बजे
दिन: बुधवार

उदयातिथि के अनुसार गुरु पूर्णिमा व्रत, पूजा और दान 29 जुलाई 2026 को किया जाएगा।

गुरु पूर्णिमा 2026 क्यों मनाई जाती है?

गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन गुरु के प्रति सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, जिन्होंने चारों वेदों का विभाजन किया और महाभारत सहित अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की। इसी कारण गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।

इस दिन विद्यार्थी अपने गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जबकि आध्यात्मिक साधक अपने गुरु की पूजा और सेवा करते हैं। मान्यता है कि गुरु की कृपा से ज्ञान, विवेक और जीवन में सफलता प्राप्त होती है।

आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) का धार्मिक महत्व

आषाढ़ पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह दिन गुरु-शिष्य परंपरा का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा, गुरु वंदना, वेदव्यास जी का स्मरण और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा से किए गए व्रत, पूजा और दान से ज्ञान, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। कई श्रद्धालु इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र तथा दक्षिणा का दान देते हैं।

गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा में क्या अंतर है?

अक्सर लोग यह जानना चाहते हैं कि गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा एक ही हैं या अलग-अलग। वास्तव में दोनों एक ही दिन मनाए जाते हैं।

गुरु पूर्णिमा गुरु के सम्मान और आशीर्वाद को समर्पित पर्व है।
व्यास पूर्णिमा महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाई जाती है।

इसी कारण आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा दोनों नामों से जाना जाता है।

जुलाई 2026 की पूर्णिमा क्यों खास है?

जुलाई 2026 की पूर्णिमा केवल मासिक पूर्णिमा नहीं है, बल्कि यह गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व भी है। इस दिन गुरु पूजन, महर्षि वेदव्यास का स्मरण, भगवान विष्णु की आराधना, सत्यनारायण कथा, स्नान-दान और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए यह वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण पूर्णिमाओं में से एक मानी जाती है।

गुरु पूर्णिमा 2026 का ज्योतिषीय महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं से युक्त होता है। चंद्रमा मन, भावनाओं, एकाग्रता और मानसिक शांति का कारक ग्रह माना जाता है। इसलिए पूर्णिमा का दिन ध्यान, मंत्र जाप, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

आषाढ़ पूर्णिमा पर गुरु तत्व का प्रभाव भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गुरु की पूजा और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने से ज्ञान, बुद्धि, आत्मविश्वास और जीवन में सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं।

गुरु पूर्णिमा 2026 व्रत कैसे करें?

यदि आप गुरु पूर्णिमा का व्रत रखना चाहते हैं, तो श्रद्धा और विधि-विधान से इन नियमों का पालन कर सकते हैं-

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
साफ और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
व्रत का संकल्प लें।
भगवान विष्णु, महर्षि वेदव्यास और अपने गुरु का स्मरण करें।
पूजा स्थल पर दीपक और धूप जलाएं।
पीले पुष्प, तुलसी दल और फल अर्पित करें।
दिनभर सात्विक भोजन करें या फलाहार ग्रहण करें।
गुरु का आशीर्वाद लें तथा यथाशक्ति दक्षिणा या उपहार अर्पित करें।
शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें।

गुरु पूर्णिमा पर क्या नहीं करना चाहिए?

गुरु पूर्णिमा के दिन कुछ कार्यों से बचने की भी सलाह दी जाती है-

गुरु, माता-पिता या बुजुर्गों का अनादर न करें।
झूठ बोलने और क्रोध करने से बचें।
किसी का अपमान न करें।
मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन न करें।
बिना कारण विवाद या कटु वचन से बचें।
पूजा के दौरान मन को अशांत न रखें।

गुरु पूर्णिमा 2026 पर कौन-सा दान करें?

गुरु पूर्णिमा पर दान का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किया गया दान कई गुना पुण्य फल प्रदान करता है।

दान की वस्तुएँ:

अन्न
वस्त्र
फल
पीले वस्त्र
हल्दी
चना दाल
गुड़
दक्षिणा
धार्मिक पुस्तकें
छाता
जल से भरा घड़ा

गुरु पूर्णिमा पर गुरु को क्या भेंट करें?

यदि आप अपने गुरु का सम्मान करना चाहते हैं, तो श्रद्धापूर्वक ये वस्तुएँ भेंट कर सकते हैं-

पीला अंगवस्त्र
धार्मिक पुस्तक
श्रीफल
फल और मिठाई
पुष्पमाला
दक्षिणा
कलम या अध्ययन सामग्री

गुरु पूर्णिमा पर कौन-से मंत्र जपें?

गुरु पूर्णिमा के दिन मंत्र जाप करने से आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति प्राप्त होने की मान्यता है।

गुरु मंत्र:

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

विष्णु मंत्र:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

गुरु ग्रह मंत्र:

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः॥

चंद्र मंत्र:

ॐ सोमाय नमः॥

गुरु पूर्णिमा व्रत का पारण कब करें?

आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) व्रत का पारण 30 जुलाई 2026, गुरुवार को किया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 29 जुलाई 2026 को रात 08:05 बजे समाप्त होगी। व्रती पूर्णिमा तिथि समाप्त होने के बाद, अगले दिन प्रातः स्नान और पूजा के पश्चात व्रत का पारण कर सकते हैं।

निष्कर्ष:

वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा)29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई को शाम 06:18 बजे प्रारंभ होकर 29 जुलाई को रात 08:05 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार गुरु पूर्णिमा व्रत, पूजा और दान 29 जुलाई 2026 को किए जाएंगे, जबकि व्रत का पारण 30 जुलाई 2026 को किया जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

जुलाई 2026 में पूर्णिमा कब है? +

जुलाई 2026 में आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) 29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाई जाएगी।

आषाढ़ पूर्णिमा 2026 कब है? +

वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा 29 जुलाई 2026 को है।

व्यास पूर्णिमा 2026 कब है? +

व्यास पूर्णिमा 29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। इसी दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व भी मनाया जाता है।

जुलाई 2026 में पूर्णिमा तिथि कब शुरू होगी? +

पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई 2026 को शाम 06:18 बजे प्रारंभ होगी।

जुलाई 2026 में पूर्णिमा तिथि कब समाप्त होगी? +

पूर्णिमा तिथि 29 जुलाई 2026 को रात 08:05 बजे समाप्त होगी।

गुरु पूर्णिमा पर किस भगवान की पूजा की जाती है? +

गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु, महर्षि वेदव्यास तथा अपने गुरु की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

गुरु पूर्णिमा व्रत का पारण कब करें? +

गुरु पूर्णिमा व्रत का पारण 30 जुलाई 2026, गुरुवार को स्थानीय पंचांग के अनुसार किया जाएगा।

गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है? +

गुरु पूर्णिमा गुरु-शिष्य परंपरा के सम्मान और महर्षि वेदव्यास की जयंती के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। इस दिन गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है और ज्ञान प्राप्ति की कामना की जाती है।

क्या गुरु पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा कर सकते हैं? +

हाँ, गुरु पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान की कथा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

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