गुरु पूर्णिमा 2026:जानें जुलाई 2026 में आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) कब है। देखें सही तिथि, समय, पूजा विधि, व्रत, पारण, दान और धार्मिक महत्व।
गुरु पूर्णिमा 2026: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। प्रत्येक माह आने वाली पूर्णिमा भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा के लिए शुभ मानी जाती है। लेकिन आषाढ़ मास की पूर्णिमा का महत्व अन्य पूर्णिमाओं से अधिक माना गया है, क्योंकि इसी दिन गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा का पर्व भी मनाया जाता है।
यदि आप July 2026 Purnima Date, जुलाई 2026 में पूर्णिमा कब है, गुरु पूर्णिमा 2026 कब है, आषाढ़ पूर्णिमा 2026 या व्यास पूर्णिमा 2026 की सही जानकारी खोज रहे हैं, तो यहां आपको तिथि, शुभ समय, पूजा विधि, व्रत, पारण, धार्मिक महत्व और गुरु पूर्णिमा से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी।
वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) 29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन गुरु की पूजा, महर्षि वेदव्यास का स्मरण, भगवान विष्णु की आराधना, स्नान-दान और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व माना जाता है।
उदयातिथि के अनुसार गुरु पूर्णिमा व्रत, पूजा और दान 29 जुलाई 2026 को किया जाएगा।
गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन गुरु के प्रति सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, जिन्होंने चारों वेदों का विभाजन किया और महाभारत सहित अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की। इसी कारण गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
इस दिन विद्यार्थी अपने गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जबकि आध्यात्मिक साधक अपने गुरु की पूजा और सेवा करते हैं। मान्यता है कि गुरु की कृपा से ज्ञान, विवेक और जीवन में सफलता प्राप्त होती है।
आषाढ़ पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह दिन गुरु-शिष्य परंपरा का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा, गुरु वंदना, वेदव्यास जी का स्मरण और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा से किए गए व्रत, पूजा और दान से ज्ञान, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। कई श्रद्धालु इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र तथा दक्षिणा का दान देते हैं।
अक्सर लोग यह जानना चाहते हैं कि गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा एक ही हैं या अलग-अलग। वास्तव में दोनों एक ही दिन मनाए जाते हैं।
गुरु पूर्णिमा गुरु के सम्मान और आशीर्वाद को समर्पित पर्व है।इसी कारण आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा दोनों नामों से जाना जाता है।
जुलाई 2026 की पूर्णिमा केवल मासिक पूर्णिमा नहीं है, बल्कि यह गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व भी है। इस दिन गुरु पूजन, महर्षि वेदव्यास का स्मरण, भगवान विष्णु की आराधना, सत्यनारायण कथा, स्नान-दान और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए यह वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण पूर्णिमाओं में से एक मानी जाती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं से युक्त होता है। चंद्रमा मन, भावनाओं, एकाग्रता और मानसिक शांति का कारक ग्रह माना जाता है। इसलिए पूर्णिमा का दिन ध्यान, मंत्र जाप, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
आषाढ़ पूर्णिमा पर गुरु तत्व का प्रभाव भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गुरु की पूजा और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने से ज्ञान, बुद्धि, आत्मविश्वास और जीवन में सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं।
यदि आप गुरु पूर्णिमा का व्रत रखना चाहते हैं, तो श्रद्धा और विधि-विधान से इन नियमों का पालन कर सकते हैं-
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।गुरु पूर्णिमा के दिन कुछ कार्यों से बचने की भी सलाह दी जाती है-
गुरु, माता-पिता या बुजुर्गों का अनादर न करें।गुरु पूर्णिमा पर दान का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किया गया दान कई गुना पुण्य फल प्रदान करता है।
दान की वस्तुएँ:
अन्नयदि आप अपने गुरु का सम्मान करना चाहते हैं, तो श्रद्धापूर्वक ये वस्तुएँ भेंट कर सकते हैं-
पीला अंगवस्त्रगुरु पूर्णिमा के दिन मंत्र जाप करने से आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति प्राप्त होने की मान्यता है।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः॥
ॐ सोमाय नमः॥
आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) व्रत का पारण 30 जुलाई 2026, गुरुवार को किया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 29 जुलाई 2026 को रात 08:05 बजे समाप्त होगी। व्रती पूर्णिमा तिथि समाप्त होने के बाद, अगले दिन प्रातः स्नान और पूजा के पश्चात व्रत का पारण कर सकते हैं।
वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा)29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई को शाम 06:18 बजे प्रारंभ होकर 29 जुलाई को रात 08:05 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार गुरु पूर्णिमा व्रत, पूजा और दान 29 जुलाई 2026 को किए जाएंगे, जबकि व्रत का पारण 30 जुलाई 2026 को किया जाएगा।
जुलाई 2026 में आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) 29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाई जाएगी।
वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा 29 जुलाई 2026 को है।
व्यास पूर्णिमा 29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। इसी दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व भी मनाया जाता है।
पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई 2026 को शाम 06:18 बजे प्रारंभ होगी।
पूर्णिमा तिथि 29 जुलाई 2026 को रात 08:05 बजे समाप्त होगी।
गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु, महर्षि वेदव्यास तथा अपने गुरु की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
गुरु पूर्णिमा व्रत का पारण 30 जुलाई 2026, गुरुवार को स्थानीय पंचांग के अनुसार किया जाएगा।
गुरु पूर्णिमा गुरु-शिष्य परंपरा के सम्मान और महर्षि वेदव्यास की जयंती के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। इस दिन गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है और ज्ञान प्राप्ति की कामना की जाती है।
हाँ, गुरु पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान की कथा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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