23 नवंबर 2026 का पंचांग, सोमवार
23 नवंबर 2026 का पंचांग: संक्षेप में
इस दिन 23 नवंबर 2026, सोमवार को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि रात 11:43 तक है, इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू होगी। भरणी नक्षत्र रात 2:02 (24 नवंबर) तक रहेगा, फिर कृत्तिका नक्षत्र लगेगा। योग वरीयान है और पहला करण गर है। चंद्रमा पूरे दिन मेष राशि में रहेगा और सूर्य वृश्चिक राशि में है। नई दिल्ली में सूर्योदय सुबह 6:49 और सूर्यास्त शाम 5:24 पर होगा। राहु काल सुबह 8:09 से सुबह 9:28 तक है, इस समय किसी नए या शुभ काम की शुरुआत न करें। दिन का सबसे शुभ समय अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:46 से दोपहर 12:28 तक है। भद्रा रात 11:43 से सुबह 10:05 (24 नवंबर) तक रहेगी, भद्रा में शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
पंचांग के पांच अंग
| तिथि | चतुर्दशी — रात 11:43 तक, फिर पूर्णिमा |
|---|---|
| नक्षत्र | भरणी — रात 2:02 (24 नवंबर) तक, फिर कृत्तिका (चरण 1) |
| योग | वरीयान — रात 7:58 तक, फिर परिघ |
| करण | गर — दोपहर 1:14 तक, फिर वणिज — रात 11:43 तक, फिर विष्टि (भद्रा) |
| वार | सोमवार |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
सूर्य और चंद्रमा
| सूर्योदय | सुबह 6:49 |
|---|---|
| सूर्यास्त | शाम 5:24 |
| चंद्रोदय | शाम 4:07 |
| चंद्रास्त | सुबह 5:11 |
| चंद्र राशि | मेष |
| सूर्य राशि | वृश्चिक |
| सूर्य नक्षत्र | अनुराधा |
| दिनमान | 10 घंटे 35 मिनट |
हिंदू मास और संवत
| मास (पूर्णिमांत) | कार्तिक |
|---|---|
| मास (अमांत) | कार्तिक |
| विक्रम संवत | 2083 |
| शक संवत | 1948 |
| ऋतु | शरद |
| दिशा शूल | पूर्व |
शुभ मुहूर्त
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 5:02 से सुबह 5:56 तक |
|---|---|
| अभिजीत मुहूर्त | सुबह 11:46 से दोपहर 12:28 तक |
अशुभ समय
| राहु काल | सुबह 8:09 से सुबह 9:28 तक |
|---|---|
| यमगंड | सुबह 10:48 से दोपहर 12:07 तक |
| गुलिक काल | दोपहर 1:26 से दोपहर 2:46 तक |
| भद्रा | रात 11:43 से सुबह 10:05 (24 नवंबर) तक |
23 नवंबर 2026 का चौघड़िया
| अमृत | सुबह 6:49 – सुबह 8:09 | शुभ |
|---|---|---|
| काल | सुबह 8:09 – सुबह 9:28 | अशुभ |
| शुभ | सुबह 9:28 – सुबह 10:48 | शुभ |
| रोग | सुबह 10:48 – दोपहर 12:07 | अशुभ |
| उद्वेग | दोपहर 12:07 – दोपहर 1:26 | अशुभ |
| चर | दोपहर 1:26 – दोपहर 2:46 | सामान्य |
| लाभ | दोपहर 2:46 – शाम 4:05 | शुभ |
| अमृत | शाम 4:05 – शाम 5:24 | शुभ |
| चर | शाम 5:24 – रात 7:05 | सामान्य |
|---|---|---|
| रोग | रात 7:05 – रात 8:46 | अशुभ |
| काल | रात 8:46 – रात 10:27 | अशुभ |
| लाभ | रात 10:27 – रात 12:07 (24 नवंबर) | शुभ |
| उद्वेग | रात 12:07 (24 नवंबर) – रात 1:48 (24 नवंबर) | अशुभ |
| शुभ | रात 1:48 (24 नवंबर) – रात 3:29 (24 नवंबर) | शुभ |
| अमृत | रात 3:29 (24 नवंबर) – सुबह 5:09 (24 नवंबर) | शुभ |
| चर | सुबह 5:09 (24 नवंबर) – सुबह 6:50 (24 नवंबर) | सामान्य |
पंचांग पूरे देश के लिए सामान्य समय बताता है। विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीद या नए काम की शुरुआत के लिए सही मुहूर्त आपकी कुंडली और शहर से तय होता है।
- विवाह और गृह प्रवेश मुहूर्त
- वाहन, संपत्ति खरीद और व्यापार आरंभ
- नामकरण, मुंडन और अन्य संस्कार
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पंचांग क्या है और इसे कैसे पढ़ें?
पंचांग हिंदू कालगणना की वह पद्धति है जिससे किसी भी दिन का शुभ-अशुभ समय जाना जाता है। "पंचांग" का अर्थ है पांच अंग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, वाहन खरीद, यात्रा या किसी नए काम की शुरुआत से पहले इन्हीं पांच अंगों को देखकर मुहूर्त तय किया जाता है। व्रत और त्योहारों की तारीख भी पंचांग की तिथि से ही निकलती है।
पंचांग के पांच अंगों का अर्थ
- तिथि: सूर्य और चंद्रमा के बीच हर 12 अंश की दूरी एक तिथि होती है। एक चंद्र मास में 30 तिथियां होती हैं: 15 शुक्ल पक्ष में (अमावस्या के बाद से पूर्णिमा तक) और 15 कृष्ण पक्ष में।
- वार: सप्ताह का दिन। पंचांग में वार सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक माना जाता है, आधी रात से नहीं।
- नक्षत्र: आकाश को 27 बराबर भागों में बांटा गया है। चंद्रमा जिस भाग में होता है, वही उस समय का नक्षत्र है। हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं।
- योग: सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 योग बनते हैं, जैसे प्रीति, सिद्धि, शुभ। व्यतीपात और वैधृति जैसे कुछ योग शुभ कामों के लिए टाले जाते हैं।
- करण: तिथि का आधा भाग करण कहलाता है, इसलिए एक तिथि में दो करण होते हैं। कुल 11 करण हैं, जिनमें विष्टि करण को भद्रा कहते हैं।
राहु काल, यमगंड और गुलिक काल
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बांटा जाता है। वार के अनुसार इनमें से एक भाग राहु काल, एक यमगंड और एक गुलिक काल होता है। हर भाग लगभग डेढ़ घंटे का होता है, लेकिन मौसम के साथ दिन छोटा-बड़ा होने पर यह समय बदलता रहता है। राहु काल में नया काम, खरीदारी या यात्रा शुरू न करने की परंपरा है।
चौघड़िया कैसे देखें
चौघड़िया में दिन और रात दोनों को आठ-आठ भागों में बांटा जाता है। अमृत, शुभ और लाभ चौघड़िया अच्छे माने जाते हैं। चर चौघड़िया सामान्य है और यात्रा के लिए ठीक माना जाता है। उद्वेग, रोग और काल चौघड़िया में शुभ काम टाले जाते हैं। जल्दी में कोई काम करना हो तो लोग अक्सर चौघड़िया देखकर ही समय चुनते हैं।
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त
दिन के 15 मुहूर्तों में आठवां मुहूर्त अभिजीत कहलाता है, जो दोपहर के आसपास लगभग 45-50 मिनट का होता है। बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं माना जाता। ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले का समय है, जो पूजा, ध्यान और पढ़ाई के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
यह पंचांग कैसे तैयार होता है
इस पेज का पंचांग खगोलीय गणना से तैयार किया जाता है। ग्रहों की स्थिति लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांश से निकाली गई है और सभी समय नई दिल्ली के सूर्योदय के आधार पर भारतीय समय (IST) में दिए गए हैं। आपके शहर में सूर्योदय, राहु काल और चौघड़िया का समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। विवाह जैसे बड़े मुहूर्त के लिए अपनी कुंडली के अनुसार पंडित जी से सलाह जरूर लें।







