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30 नवंबर 2026 का पंचांग, सोमवार

कृष्ण पक्ष सप्तमी • आश्लेषा नक्षत्र • इन्द्र योग
लेखक: Pt. Jitendra Vyas · अपडेटेड: 20 अक्टूबर 2026
30 नवंबर 2026 का पंचांग, सोमवार
तिथि
कृष्ण पक्ष सप्तमी
नक्षत्र
आश्लेषा
योग
इन्द्र
राहु काल
सुबह 8:13 से सुबह 9:32 तक

30 नवंबर 2026 का पंचांग: संक्षेप में

इस दिन 30 नवंबर 2026, सोमवार को मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत), कार्तिक (अमांत) मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि रात 12:12 (1 दिसंबर) तक है, इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू होगी। आश्लेषा नक्षत्र सुबह 9:41 तक रहेगा, फिर मघा नक्षत्र लगेगा। योग इन्द्र है और पहला करण विष्टि (भद्रा) है। चंद्रमा कर्क राशि में है और सुबह 9:41 बजे सिंह राशि में प्रवेश करेगा। सूर्य वृश्चिक राशि में है। नई दिल्ली में सूर्योदय सुबह 6:55 और सूर्यास्त शाम 5:23 पर होगा। राहु काल सुबह 8:13 से सुबह 9:32 तक है, इस समय किसी नए या शुभ काम की शुरुआत न करें। दिन का सबसे शुभ समय अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 से दोपहर 12:30 तक है। भद्रा रात 1:47 से दोपहर 12:55 तक रहेगी, भद्रा में शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।

पंचांग के पांच अंग

तिथिसप्तमी — रात 12:12 (1 दिसंबर) तक, फिर अष्टमी
नक्षत्रआश्लेषा — सुबह 9:41 तक, फिर मघा (चरण 4)
योगइन्द्र — दोपहर 2:26 तक, फिर वैधृति
करणविष्टि (भद्रा) — दोपहर 12:55 तक, फिर बव — रात 12:12 (1 दिसंबर) तक, फिर बालव
वारसोमवार
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदयसुबह 6:55
सूर्यास्तशाम 5:23
चंद्रोदयरात 11:37
चंद्रास्तदोपहर 12:03
चंद्र राशिकर्क (सुबह 9:41 से सिंह)
सूर्य राशिवृश्चिक
सूर्य नक्षत्रअनुराधा
दिनमान10 घंटे 28 मिनट

हिंदू मास और संवत

मास (पूर्णिमांत)मार्गशीर्ष
मास (अमांत)कार्तिक
विक्रम संवत2083
शक संवत1948
ऋतुशरद
दिशा शूलपूर्व

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्तसुबह 5:07 से सुबह 6:01 तक
अभिजीत मुहूर्तसुबह 11:48 से दोपहर 12:30 तक

अशुभ समय

राहु कालसुबह 8:13 से सुबह 9:32 तक
यमगंडसुबह 10:51 से दोपहर 12:09 तक
गुलिक कालदोपहर 1:28 से दोपहर 2:46 तक
भद्रारात 1:47 से दोपहर 12:55 तक

30 नवंबर 2026 का चौघड़िया

दिन का चौघड़िया
अमृतसुबह 6:55 – सुबह 8:13शुभ
कालसुबह 8:13 – सुबह 9:32अशुभ
शुभसुबह 9:32 – सुबह 10:51शुभ
रोगसुबह 10:51 – दोपहर 12:09अशुभ
उद्वेगदोपहर 12:09 – दोपहर 1:28अशुभ
चरदोपहर 1:28 – दोपहर 2:46सामान्य
लाभदोपहर 2:46 – शाम 4:05शुभ
अमृतशाम 4:05 – शाम 5:23शुभ
रात का चौघड़िया
चरशाम 5:23 – रात 7:05सामान्य
रोगरात 7:05 – रात 8:46अशुभ
कालरात 8:46 – रात 10:28अशुभ
लाभरात 10:28 – रात 12:10 (1 दिसंबर)शुभ
उद्वेगरात 12:10 (1 दिसंबर) – रात 1:51 (1 दिसंबर)अशुभ
शुभरात 1:51 (1 दिसंबर) – रात 3:33 (1 दिसंबर)शुभ
अमृतरात 3:33 (1 दिसंबर) – सुबह 5:14 (1 दिसंबर)शुभ
चरसुबह 5:14 (1 दिसंबर) – सुबह 6:56 (1 दिसंबर)सामान्य
अपनी कुंडली के अनुसार शुभ मुहूर्त जानें

पंचांग पूरे देश के लिए सामान्य समय बताता है। विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीद या नए काम की शुरुआत के लिए सही मुहूर्त आपकी कुंडली और शहर से तय होता है।

  • विवाह और गृह प्रवेश मुहूर्त
  • वाहन, संपत्ति खरीद और व्यापार आरंभ
  • नामकरण, मुंडन और अन्य संस्कार

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पंचांग क्या है और इसे कैसे पढ़ें?

पंचांग हिंदू कालगणना की वह पद्धति है जिससे किसी भी दिन का शुभ-अशुभ समय जाना जाता है। "पंचांग" का अर्थ है पांच अंग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, वाहन खरीद, यात्रा या किसी नए काम की शुरुआत से पहले इन्हीं पांच अंगों को देखकर मुहूर्त तय किया जाता है। व्रत और त्योहारों की तारीख भी पंचांग की तिथि से ही निकलती है।

पंचांग के पांच अंगों का अर्थ

  • तिथि: सूर्य और चंद्रमा के बीच हर 12 अंश की दूरी एक तिथि होती है। एक चंद्र मास में 30 तिथियां होती हैं: 15 शुक्ल पक्ष में (अमावस्या के बाद से पूर्णिमा तक) और 15 कृष्ण पक्ष में।
  • वार: सप्ताह का दिन। पंचांग में वार सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक माना जाता है, आधी रात से नहीं।
  • नक्षत्र: आकाश को 27 बराबर भागों में बांटा गया है। चंद्रमा जिस भाग में होता है, वही उस समय का नक्षत्र है। हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं।
  • योग: सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 योग बनते हैं, जैसे प्रीति, सिद्धि, शुभ। व्यतीपात और वैधृति जैसे कुछ योग शुभ कामों के लिए टाले जाते हैं।
  • करण: तिथि का आधा भाग करण कहलाता है, इसलिए एक तिथि में दो करण होते हैं। कुल 11 करण हैं, जिनमें विष्टि करण को भद्रा कहते हैं।

राहु काल, यमगंड और गुलिक काल

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बांटा जाता है। वार के अनुसार इनमें से एक भाग राहु काल, एक यमगंड और एक गुलिक काल होता है। हर भाग लगभग डेढ़ घंटे का होता है, लेकिन मौसम के साथ दिन छोटा-बड़ा होने पर यह समय बदलता रहता है। राहु काल में नया काम, खरीदारी या यात्रा शुरू न करने की परंपरा है।

चौघड़िया कैसे देखें

चौघड़िया में दिन और रात दोनों को आठ-आठ भागों में बांटा जाता है। अमृत, शुभ और लाभ चौघड़िया अच्छे माने जाते हैं। चर चौघड़िया सामान्य है और यात्रा के लिए ठीक माना जाता है। उद्वेग, रोग और काल चौघड़िया में शुभ काम टाले जाते हैं। जल्दी में कोई काम करना हो तो लोग अक्सर चौघड़िया देखकर ही समय चुनते हैं।

अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

दिन के 15 मुहूर्तों में आठवां मुहूर्त अभिजीत कहलाता है, जो दोपहर के आसपास लगभग 45-50 मिनट का होता है। बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं माना जाता। ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले का समय है, जो पूजा, ध्यान और पढ़ाई के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

यह पंचांग कैसे तैयार होता है

इस पेज का पंचांग खगोलीय गणना से तैयार किया जाता है। ग्रहों की स्थिति लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांश से निकाली गई है और सभी समय नई दिल्ली के सूर्योदय के आधार पर भारतीय समय (IST) में दिए गए हैं। आपके शहर में सूर्योदय, राहु काल और चौघड़िया का समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। विवाह जैसे बड़े मुहूर्त के लिए अपनी कुंडली के अनुसार पंडित जी से सलाह जरूर लें।

30 नवंबर 2026 का पंचांग: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस दिन कौन सी तिथि है?

+
इस दिन (30 नवंबर 2026) कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि रात 12:12 (1 दिसंबर) तक है, उसके बाद अष्टमी तिथि लगेगी।

इस दिन राहु काल कब है?

+
नई दिल्ली के सूर्योदय के अनुसार इस दिन (सोमवार) राहु काल सुबह 8:13 से सुबह 9:32 तक है। आपके शहर में यह समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।

इस दिन का शुभ मुहूर्त क्या है?

+
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 से दोपहर 12:30 तक है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:07 से सुबह 6:01 तक है। दिन में शुभ चौघड़िया: अमृत (सुबह 6:55 – सुबह 8:13), शुभ (सुबह 9:32 – सुबह 10:51), लाभ (दोपहर 2:46 – शाम 4:05), अमृत (शाम 4:05 – शाम 5:23)।

इस दिन कौन सा नक्षत्र है?

+
इस दिन आश्लेषा नक्षत्र सुबह 9:41 तक है, फिर मघा नक्षत्र शुरू होगा।

इस दिन चंद्रमा किस राशि में है?

+
इस दिन चंद्रमा कर्क राशि में है और सुबह 9:41 बजे सिंह राशि में जाएगा। चंद्रमा की राशि से ही दैनिक राशिफल तय होता है।

पंचांग के पांच अंग कौन से हैं?

+
पंचांग के पांच अंग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण हैं। इन्हीं पांचों से किसी भी दिन का शुभ-अशुभ समय और मुहूर्त निकाला जाता है।
Pt. Jitendra Vyas
लेखक
Pt. Jitendra Vyas
Expert Vedic Astrologer & Vastu Consultant

Pt. Jitendra Vyas 1955 से चली आ रही वैदिक ज्योतिष परंपरा के वाहक और वास्तु शास्त्र के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने हज़ारों लोगों को करियर, विवाह और स्वास्थ्य जैसे जीवन के मामलों में मार्गदर्शन दिया है।

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