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Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज कब है? जानें तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज कब है? जानें तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
By Pt. Jitendra Vyas | Sep-10-2026

Hartalika Teej 2026 Date: जानें हरतालिका तीज कब है, पूजा का शुभ मुहूर्त, तिथि, पूजा विधि, व्रत के नियम और भगवान शिव-माता पार्वती की पूजा का महत्व।

Hartalika Teej 2026 Date: हरतालिका तीज हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से यह व्रत करती हैं।

हरतालिका तीज हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह पर्व खास है, क्योंकि इस बार हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन, 14 सितंबर को पड़ रही हैं।

आइए जानते हैं Hartalika Teej 2026 कब है शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, पूजा सामग्री, व्रत के नियम और हरतालिका तीज के धार्मिक महत्व के बारे में।

हरतालिका तीज 2026 कब है?

हरतालिका तीज 2026 में 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी।

यह व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर रखा जाएगा। पंचांग गणना के अनुसार तृतीया तिथि 13 सितंबर 2026 की सुबह से शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह तक रहेगी।

हरतालिका तीज 2026 तिथि

विवरण

जानकारी

पर्व

हरतालिका तीज 2026

तारीख

14 सितंबर 2026

दिन

सोमवार

पक्ष

शुक्ला पक्ष

तिथि

तृतीया

मास 

भाद्रपद

तृतीया तिथि प्रारंभ

13 सितंबर 2026, सुबह 7:08 बजे

तृतीया तिथि समाप्त

14 सितंबर 2026, सुबह 7:06 बजे

आराध्य देव

भगवान शिव और माता पार्वती

 

हरतालिका तीज 2026 शुभ मुहूर्त (Hartalika Teej 2026 Date And Time)

हरतालिका तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए प्रातःकाल का समय विशेष माना जाता है। इस दिन पूजा के लिए प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:32 बजे से 5:19 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक

2026 में हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन

साल 2026 में एक विशेष संयोग देखने को मिलेगा।  हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों 14 सितंबर को मनाई जाएंगी। तृतीया तिथि समाप्त होने के बाद चतुर्थी तिथि शुरू होती है, जिसके कारण दोनों पर्व एक ही तारीख पर पड़ रहे हैं।

यह स्थिति हर साल देखने को नहीं मिलती, इसलिए इस बार हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों पर्वों का धार्मिक महत्व और भी खास हो गया है।

हरतालिका तीज क्यों मनाई जाती है?

हरतालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र मिलन और माता पार्वती की कठोर तपस्या की स्मृति में मनाई जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए लंबे समय तक कठिन तपस्या की थी।

कहा जाता है कि माता पार्वती के पिता हिमालय उनका विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे। जब माता पार्वती को यह बात पता चली, तो उनकी सखियां उन्हें एकांत वन में ले गईं, ताकि वे अपनी इच्छा के अनुसार भगवान शिव की आराधना कर सकें। इसी कारण इस व्रत का नाम ‘हरतालिका’ पड़ा। ‘हरत’ का अर्थ हरण करना और ‘आलिका’ का अर्थ सखी माना जाता है।

वन में माता पार्वती ने बालू से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की आराधना की और कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति और तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया। इसी पौराणिक प्रसंग के कारण हरतालिका तीज का व्रत विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

हरतालिका तीज का धार्मिक महत्व

  • अखंड सौभाग्य की कामना: सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं।
  • मनचाहे जीवनसाथी की कामना: अविवाहित कन्याएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करके योग्य एवं मनचाहे जीवनसाथी की कामना करती हैं।
  • शिव-पार्वती की आराधना: इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। कई स्थानों पर मिट्टी या बालू से उनकी प्रतिमाएं बनाकर पूजन करने की परंपरा है।
  • तप और समर्पण का प्रतीक: यह व्रत माता पार्वती की अटूट भक्ति, तपस्या और भगवान शिव के प्रति उनके समर्पण की याद दिलाता है।
  • रात्रि जागरण की परंपरा: कई क्षेत्रों में महिलाएं रात्रि जागरण करती हैं और भजन-कीर्तन के साथ भगवान शिव एवं माता पार्वती का स्मरण करती हैं।

हरतालिका तीज की पूजा विधि

हरतालिका तीज की पूजा के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।

पूजा विधि इस प्रकार है-

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. पूजा स्थल को साफ करके चौकी स्थापित करें।
  3. चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र रखें।
  4. परंपरा के अनुसार मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर भी पूजा की जाती है।
  5. सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें।
  6. भगवान शिव को जल, बेलपत्र, अक्षत और फूल अर्पित करें।
  7. माता पार्वती को रोली, अक्षत, फूल और सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
  8. हरतालिका तीज की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  9. भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
  10. अंत में परिवार के सुख, समृद्धि और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना करें।

हरतालिका तीज पूजा सामग्री

हरतालिका तीज की पूजा के लिए सामग्री पहले से तैयार कर लेना अच्छा रहता है।

मुख्य पूजा सामग्री:

  • भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा
  • गणेश जी की प्रतिमा
  • मिट्टी या बालू
  • बेलपत्र
  • फूल
  • अक्षत
  • रोली और कुमकुम
  • चंदन
  • मौली
  • धूप और दीपक
  • कपूर
  • फल
  • नारियल
  • पंचामृत
  • पान और सुपारी
  • सिंदूर
  • मेहंदी
  • चूड़ियां
  • सुहाग की अन्य सामग्री
  • नैवेद्य

हरतालिका तीज पर निर्जला व्रत क्यों रखा जाता है?

हरतालिका तीज पर निर्जला व्रत रखने की परंपरा माता पार्वती की भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए की गई कठोर तपस्या से जुड़ी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक कठोर तप किया और इस दौरान अन्न-जल का त्याग किया।

कहा जाता है कि माता पार्वती ने जंगल में मिट्टी और बालू से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की आराधना की थी। उनकी तपस्या और अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसी तप और समर्पण की स्मृति में हरतालिका तीज पर निर्जला व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है।

सुहागिन महिलाएं इस व्रत के माध्यम से पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं भी मनचाहे और योग्य जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं।

परंपरा के अनुसार, निर्जला व्रत में पूरे दिन अन्न और जल का सेवन नहीं किया जाता और अगले दिन पूजा-पाठ के बाद व्रत का पारण किया जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए व्रत का पालन अपनी क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार करना चाहिए।

हरतालिका तीज पर क्या करें?

हरतालिका तीज के दिन इन बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है-

  • सुबह स्नान करके पूजा की तैयारी करें।
  • भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करें।
  • हरतालिका तीज की कथा सुनें।
  • माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
  • शिव-पार्वती के मंत्रों का जाप करें।
  • अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करें।
  • घर में सुख-शांति की प्रार्थना करें।

हरतालिका तीज पर क्या नहीं करना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत के दिन मन को शांत रखना और पूजा में श्रद्धा बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन-

  • पूजा में बासी या अशुद्ध सामग्री का प्रयोग न करें।
  • जानबूझकर किसी का अपमान या विवाद न करें।
  • पूजा को केवल दिखावे के लिए न करें।
  • व्रत अपनी क्षमता के अनुसार रखें।
  • स्वास्थ्य खराब होने पर जबरदस्ती निर्जला व्रत न रखें।

निष्कर्ष:

Hartalika Teej 2026 इस बार 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। सुहागिन महिलाएं सुखी दांपत्य और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की कामना से पूजा करती हैं।

2026 में हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का एक ही तारीख पर पड़ना इस पर्व को और विशेष बनाता है।
 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

हरतालिका तीज 2026 में कब है? +

हरतालिका तीज 2026 में 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी।

हरतालिका तीज में कौन सा रंग पहनना चाहिए? +

हरतालिका तीज पर हरा रंग पहनना शुभ माना जाता है।

हरतालिका तीज व्रत में पानी कब पीना चाहिए? +

निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं पूजा और व्रत के पारण के बाद पानी पीती हैं।

क्या हरतालिका तीज के दिन बाल धोना चाहिए? +

हरतालिका तीज का व्रत रखने के एक दिन पहले महिला को अपने बाल धुल लेने चाहिए।

क्या हरतालिका तीज व्रत में महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और पूजा करती हैं? +

हां, महिलाएं पूरा दिन और पूरी रात बिना अन्न औजल ग्रहण किए निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं।

हरतालिका तीज की पूजा में क्या-क्या सामान लगता है? +

पूजा में शिव-पार्वती की प्रतिमा, गणेश जी, बेलपत्र, फूल, अक्षत, रोली, चंदन, दीपक, धूप, फल, नारियल और सुहाग सामग्री मुख्य रूप से शामिल होती है।

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