Yogini Ekadashi 2026: जुलाई 2026 में एकादशी कब है? जाने योगिनी एकादशी की सही तिथि

Yogini Ekadashi 2026: जुलाई 2026 में एकादशी कब है? जाने योगिनी एकादशी की सही तिथि
By Pt. Jitendra Vyas | Jul-10-2026

Yogini Ekadashi 2026: जुलाई 2026 में योगिनी एकादशी कब है? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पारण समय, पूजा विधि, व्रत कथा, महत्व, मंत्र, क्या करें और क्या न करें।

Yogini Ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन आषाढ़ कृष्ण पक्ष में आने वाली योगिनी एकादशी सबसे पुण्यदायी एकादशियों में से एक मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से पापों का नाश होता है, रोगों और कष्टों से मुक्ति मिलती है तथा सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

यदि आप भी जानना चाहते हैं कि जुलाई 2026 में योगिनी एकादशी कब है, तो इस लेख में जानें योगिनी एकादशी 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, व्रत का समय, पारण का समय, पूजा विधि, व्रत कथा, धार्मिक महत्व, मंत्र, क्या करें, क्या न करें और व्रत से जुड़े सभी महत्वपूर्ण नियम

जुलाई 2026 में योगिनी एकादशी कब है?

वर्ष 2026 में योगिनी एकादशी व्रत शनिवार, 11 जुलाई 2026 को रखा जाएगा।

योगिनी एकादशी 2026 तिथि:

एकादशी तिथि प्रारंभ: 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार) - रात्रि 08:28 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 11 जुलाई 2026 (शनिवार) - रात्रि 10:48 बजे
व्रत रखने की तिथि:11 जुलाई 2026 (शनिवार)

एकादशी व्रत हमेशा उदयातिथि के अनुसार रखा जाता है, इसलिए इस वर्ष योगिनी एकादशी का व्रत 11 जुलाई को किया जाएगा।

योगिनी एकादशी 2026 सूर्योदय और सूर्यास्त

सूर्योदय: लगभग प्रातः 5:30 बजे
सूर्यास्त: लगभग 7:20 बजे

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय शहर के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।

योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व

योगिनी एकादशी को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने वाली अत्यंत पुण्यदायी एकादशी माना गया है। पद्म पुराण में वर्णित है कि इस व्रत को करने से अनेक जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को रोग, दुख तथा आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्रत 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य प्रदान करता है। यही कारण है कि इसे अत्यंत फलदायी एकादशी माना गया है।

योगिनी एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार अलकापुरी में भगवान शिव के परम भक्त राजा कुबेर निवास करते थे। उनके यहां हेममाली नाम का एक माली कार्य करता था। उसका काम प्रतिदिन मानसरोवर से पुष्प लाकर भगवान शिव की पूजा के लिए देना था।

एक दिन हेममाली अपनी पत्नी के प्रेम में इतना मग्न हो गया कि समय पर भगवान शिव की पूजा के लिए फूल नहीं पहुंचा सका। इससे राजा कुबेर अत्यंत क्रोधित हुए और उन्होंने उसे कोढ़ी होने का श्राप दे दिया।

श्राप से पीड़ित हेममाली अनेक वर्षों तक जंगलों में भटकता रहा। अंततः उसकी भेंट महर्षि मार्कण्डेय से हुई। उन्होंने उसे आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।

हेममाली ने श्रद्धा और नियमपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया। भगवान विष्णु की कृपा से उसका कोढ़ दूर हो गया और उसे श्राप से मुक्ति मिल गई। तभी से योगिनी एकादशी को पापों और रोगों से मुक्ति दिलाने वाली एकादशी माना जाता है।

योगिनी एकादशी पूजा सामग्री

भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र
माता लक्ष्मी का चित्र
तुलसी दल
पीले पुष्प
चंदन
अक्षत
धूप
दीपक
घी
पंचामृत
मौसमी फल
नारियल
पंचमेवा
पीला वस्त्र
नैवेद्य

योगिनी एकादशी पूजा विधि

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
स्वच्छ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
दीपक जलाकर धूप अर्पित करें।
भगवान को पीले पुष्प, तुलसी दल और पंचामृत अर्पित करें।
विष्णु सहस्रनाम या भगवद्गीता का पाठ करें।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें।
दिनभर व्रत रखें।
शाम को पुनः आरती करें।
द्वादशी तिथि में विधि-विधान से पारण करें।

योगिनी एकादशी के दिन क्या करें?

भगवान विष्णु का ध्यान करें।
तुलसी की पूजा करें।
विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
गरीबों को अन्न और वस्त्र दान दें।
गाय को हरा चारा खिलाएं।
पीले वस्त्र पहनें।
मंदिर में दीपदान करें।
भगवान का भजन-कीर्तन करें।
पूरे दिन सात्विक विचार रखें।
परिवार के साथ भगवान विष्णु की कथा सुनें।

योगिनी एकादशी पर क्या नहीं करें?

चावल का सेवन न करें।
लहसुन और प्याज न खाएं।
मांसाहार और शराब से दूर रहें।
झूठ न बोलें।
क्रोध न करें।
किसी का अपमान न करें।
निंदा और विवाद से बचें।
तामसिक भोजन न करें।
दिन में अधिक देर तक न सोएं।
तुलसी के पत्ते न तोड़ें।

योगिनी एकादशी व्रत में क्या खाएं?

फल
दूध
दही
मखाना
साबूदाना
सिंघाड़े का आटा
कुट्टू का आटा
राजगिरा
सेंधा नमक
सूखे मेवे
नारियल पानी

योगिनी एकादशी पर क्या दान करें?

पीले वस्त्र
अन्न
फल
घी
छाता
जल से भरा घड़ा
तुलसी का पौधा
दक्षिणा
गरीबों को भोजन

योगिनी एकादशी के लाभ

भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
अनेक जन्मों के पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।
रोगों से राहत की कामना की जाती है।
मानसिक शांति मिलती है।
आर्थिक उन्नति के मार्ग खुलते हैं।
परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
आध्यात्मिक उन्नति होती है।
मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

योगिनी एकादशी के शक्तिशाली मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
ॐ विष्णवे नमः॥
विष्णु गायत्री मंत्र
  • ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

योगिनी एकादशी से जुड़े नियम

दशमी तिथि से सात्विक भोजन करें।
ब्रह्मचर्य का पालन करें।
क्रोध और नकारात्मक विचारों से बचें।
भगवान विष्णु का अधिक से अधिक स्मरण करें।
द्वादशी तिथि में समय पर पारण करें

योगिनी एकादशी 2026 पारण समय

द्वादशी तिथि में हरिवासर समाप्त होने के बाद ही व्रत का पारण करना शुभ माना जाता है।

यदि आप 11 जुलाई (गौण/वैष्णव परंपरा) का व्रत रखते हैं, तो 12 जुलाई 2026 को प्रातः लगभग 5:30 बजे से 8:40 बजे के बीच पारण किया जा सकता है।

निष्कर्ष:

योगिनी एकादशी 2026 का व्रत 11 जुलाई 2026 (शनिवार) को रखा जाएगा। यह दिन भगवान विष्णु की आराधना, व्रत, दान-पुण्य और आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन किया जाए, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

जुलाई 2026 में योगिनी एकादशी कब है? +

11 जुलाई 2026, शनिवार।

योगिनी एकादशी किस भगवान की पूजा की जाती है? +

भगवान श्रीहरि विष्णु की।

क्या महिलाएं योगिनी एकादशी का व्रत रख सकती हैं? +

हाँ, श्रद्धा और स्वास्थ्य के अनुसार महिलाएं भी यह व्रत रख सकती हैं।

क्या एकादशी पर चाय पी सकते हैं? +

यह व्यक्तिगत व्रत-परंपरा और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। कई लोग फलाहार के साथ चाय लेते हैं, जबकि कुछ केवल फल, दूध और पानी का सेवन करते हैं।

क्या योगिनी एकादशी पर फलाहार कर सकते हैं? +

हाँ, फलाहार करना मान्य है।

एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते? +

धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है।

योगिनी एकादशी का पारण कब किया जाता है? +

द्वादशी तिथि में हरिवासर समाप्त होने के बाद शुभ समय में।

2026 में योगिनी एकादशी 10 जुलाई है या 11 जुलाई? +

2026 में तिथि की स्थिति के कारण अलग-अलग परंपराओं में मतभेद है। कई पंचांग 10 जुलाई को स्मार्त योगिनी एकादशी और 11 जुलाई को गौण/वैष्णव योगिनी एकादशी मानते हैं। अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार व्रत करें।

योगिनी एकादशी का व्रत किसके लिए लाभकारी माना जाता है? +

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत स्वास्थ्य, मानसिक शांति, पापों के क्षय, सुख-समृद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

क्या योगिनी एकादशी पर पानी पी सकते हैं? +

हाँ। अधिकांश श्रद्धालु फलाहार या जल के साथ व्रत रखते हैं। निर्जल व्रत केवल वही रखें जो स्वास्थ्य की दृष्टि से सक्षम हों।

Talk to an Expert Astrologer Today - Get your Kundali reading, Vastu consultation, or personalized guidance.

🎉

Appointment Booked!

Appointment booked successfully!
Connecting you to WhatsApp for confirmation...

Book an Appointment

+91