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संकष्टी चतुर्थी और कजरी तीज 2026 एक ही दिन: जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत और महत्व

संकष्टी चतुर्थी और कजरी तीज 2026 एक ही दिन: जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत और महत्व
By Pt. Jitendra Vyas | Aug-25-2026

संकष्टी चतुर्थी और कजरी तीज 2026:  क्या 31 अगस्त 2026 को कजरी तीज और संकष्टी चतुर्थी दोनों का व्रत रखा जाएगा? जी हां, इस साल पंचांग की तिथि गणना के कारण दोनों महत्वपूर्ण पर्व एक ही दिन पड़ रहे हैं। सोमवार, 31 अगस्त 2026 को महिलाएं कजरी तीज का व्रत रखेंगी, वहीं भगवान गणेश के भक्त हेरंब संकष्टी चतुर्थी का उपवास करेंगे।

एक ओर कजरी तीज को सुखी दांपत्य और अखंड सौभाग्य की कामना से जोड़ा जाता है, तो दूसरी ओर संकष्टी चतुर्थी पर विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा कर संकटों से मुक्ति की कामना की जाती है। ऐसे में जानिए संकष्टी चतुर्थी और कजरी तीज 2026 कब है, पूजा का शुभ समय क्या है, व्रत की पूजा विधि क्या है और दोनों व्रतों का धार्मिक महत्व क्या माना जाता है।

31 अगस्त 2026 कौन सा व्रत है?

31 अगस्त 2026 को मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण व्रत हैं:

  • कजरी तीज व्रत
  • हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत

कजरी तीज में भगवान शिव-पार्वती की पूजा की जाती है और संकष्टी चतुर्थी में भगवान गणेश की आराधना की जाती है।

कजरी तीज और संकष्टी चतुर्थी 2026 एक ही दिन क्यों पड़ रही हैं?

कजरी तीज और हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी 2026 इस बार 31 अगस्त, सोमवार को एक ही दिन पड़ रही हैं। पहली नजर में यह थोड़ा अजीब लग सकता है, क्योंकि कजरी तीज कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि और संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। ऐसे में दोनों पर्व एक ही तारीख पर कैसे आ सकते हैं? इसका कारण हिंदू पंचांग में तिथियों की गणना और व्रत-पर्व के निर्धारण के नियम हैं।

तृतीया तिथि कब से कब तक रहेगी?

पंचांग के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 30 अगस्त 2026 को सुबह 09:36 बजे शुरू होगी और 31 अगस्त 2026 को सुबह 08:50 बजे समाप्त होगी।

चूंकि 31 अगस्त को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए उदया तिथि के आधार पर कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त 2026, सोमवार को रखा जाएगा।

तृतीया समाप्त होते ही शुरू होगी चतुर्थी

31 अगस्त को सुबह 08:50 बजे तृतीया तिथि समाप्त होने के बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी। यह चतुर्थी तिथि 1 सितंबर 2026 की सुबह तक रहने वाली है।

यानी एक ही कैलेंडर तारीख पर सुबह के समय तृतीया तिथि और उसके बाद चतुर्थी तिथि का क्रम बन रहा है। यही वजह है कि 31 अगस्त को दोनों पर्वों का संयोग दिखाई दे रहा है।

संकष्टी चतुर्थी भी 31 अगस्त को ही क्यों?

संकष्टी चतुर्थी का व्रत चतुर्थी तिथि में रखा जाता है और इसमें चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देने की विशेष परंपरा है। 31 अगस्त की रात चतुर्थी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी 31 अगस्त 2026 को ही रखा जाएगा।

इस तरह कजरी तीज के लिए 31 अगस्त की उदया तिथि में मौजूद तृतीया महत्वपूर्ण है, जबकि संकष्टी चतुर्थी के लिए उसी दिन रात में मौजूद चतुर्थी तिथि और चंद्रोदय महत्वपूर्ण है।

कजरी तीज 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त

कजरी तीज का व्रत इस वर्ष 31 अगस्त 2026, सोमवार को रखा जाएगा। यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 30 अगस्त की सुबह से शुरू होकर 31 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि 31 अगस्त को होने के कारण इसी दिन कजरी तीज का व्रत रखा जाएगा।

कजरी तीज 2026 की तिथि:

  • कजरी तीज: 31 अगस्त 2026, सोमवार
  • तृतीया तिथि का आरंभ: 30 अगस्त 2026, रविवार, प्रातः 09:36 बजे
  • तृतीया तिथि की समाप्ति: 31 अगस्त 2026, सोमवार, प्रातः 08:50 बजे
  • उदया तिथि: 31 अगस्त 2026, सोमवार

अर्थात तृतीया तिथि 30 अगस्त को शुरू होगी, लेकिन 31 अगस्त को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि विद्यमान रहने के कारण कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त को रखा जाएगा।

कजरी तीज 2026 के प्रमुख शुभ मुहूर्त:

कजरी तीज के दिन पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए दिन में कई शुभ समय मिलेंगे। इस दौरान अपनी सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा की जा सकती है।

  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:51 बजे से 05:37 बजे तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:14 बजे से 01:04 बजे तक
  • संध्या पूजा का शुभ समय: सायं 06:54 बजे से रात्रि 08:03 बजे तक

कजरी तीज 2026 के चौघड़िया मुहूर्त

पूजा या अन्य शुभ कार्यों के लिए चौघड़िया देखना चाहें तो इस दिन ये समय महत्वपूर्ण रहेंगे:

  • अमृत चौघड़िया: प्रातः 05:58 बजे से 07:34 बजे तक
  • शुभ चौघड़िया: प्रातः 09:10 बजे से 10:45 बजे तक
  • लाभ चौघड़िया: दोपहर 03:33 बजे से सायं 05:08 बजे तक

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी 2026 की तिथि और चंद्रोदय समय

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी 2026 का व्रत 31 अगस्त 2026, सोमवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान गणेश की पूजा के साथ संकष्टी चतुर्थी व्रत करने की परंपरा है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु शाम के समय गणेशजी की पूजा करते हैं और चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करते हैं।

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी 2026 की तिथि और मुख्य समय

  • संकष्टी चतुर्थी: 31 अगस्त 2026, सोमवार
  • चंद्रोदय का अनुमानित समय: रात्रि 09:17 बजे

चंद्रोदय का समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है, इसलिए व्रत का पारण करने से पहले अपने शहर के स्थानीय पंचांग में चंद्रोदय का समय जरूर देख लें।

कजरी तीज 2026 का धार्मिक महत्व

कजरी तीज हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण व्रत-पर्व है:

  • भारत के कई राज्यों में कजली तीज को सातूड़ी तीज, बड़ी तीज या बूढ़ी तीज के नाम से जाना जाता है।
  • इसे विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना से रखती हैं।
  • कई स्थानों पर अविवाहित कन्याएं भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से यह व्रत करती हैं।
  • कजरी तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है। शिव-पार्वती को आदर्श दांपत्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन उनकी आराधना करके वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम और सौहार्द की कामना की जाती है।
  • कजरी तीज उत्तर भारत के कई हिस्सों में विशेष उत्साह के साथ मनाई जाती है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में इस पर्व की अलग-अलग स्थानीय परंपराएं देखने को मिलती हैं।

कजरी तीज की पूजा विधि

कजरी तीज पूजा विधि को सरल तरीके से इस प्रकार समझ सकते हैं:

  • सुबह स्नान करें: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  • व्रत का संकल्प लें: भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करके अपनी मनोकामना के साथ व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थान तैयार करें: पूजा स्थान की सफाई करके भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • शिव-पार्वती का पूजन करें: भगवान शिव को जल, बेलपत्र, अक्षत, फूल आदि अर्पित करें। माता पार्वती को रोली, अक्षत, फूल और सुहाग सामग्री अर्पित करें।
  • व्रत कथा सुनें: कजरी तीज की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  • आरती करें: पूजा के अंत में शिव-पार्वती की आरती करें और परिवार के सुख-शांति की प्रार्थना करें।
  • व्रत का पारण करें: अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार व्रत का पारण करें।

कजरी तीज व्रत में क्या करें और क्या न करें?

क्या करें?

  • भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
  • व्रत कथा सुनें।
  • जरूरतमंद व्यक्ति को दान करें।
  • सुहाग सामग्री का पूजन करें।
  • परिवार के बड़ों का आशीर्वाद लें।
  • अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।

क्या न करें?

  • पूजा के दौरान क्रोध और विवाद से बचें।
  • किसी का अपमान न करें।
  • व्रत को केवल दिखावे के लिए न रखें।
  • स्वास्थ्य खराब होने पर जबरदस्ती निर्जला व्रत न करें।

संकष्टी चतुर्थी 2026 का महत्व

  • संकष्टी चतुर्थी 2026 भगवान गणेश को समर्पित व्रत है। प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है।
  • 31 अगस्त 2026 की संकष्टी चतुर्थी को हेरंब संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। पंचांग के अनुसार यह भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है।
  • धार्मिक मान्यता में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा गया है। इसलिए संकष्टी चतुर्थी पर भक्त उनकी पूजा करके जीवन की बाधाओं से मुक्ति, सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करते हैं।
  • हेरंब भगवान गणेश के प्रमुख स्वरूपों में से एक माने जाते हैं।

संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि

संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि इस प्रकार कर सकते हैं:

  • सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • भगवान गणेश के सामने व्रत का संकल्प लें।
  • गणेशजी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • दीपक और धूप जलाएं।
  • भगवान गणेश को दूर्वा और लाल फूल अर्पित करें।
  • सिंदूर और अक्षत चढ़ाएं।
  • मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
  • गणेश मंत्र, गणेश चालीसा या गणेश स्तुति का पाठ करें।
  • शाम को भगवान गणेश की पूजा और आरती करें।
  • चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें।
  • इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें।

क्या संकष्टी चतुर्थी और कजरी तीज का व्रत एक साथ रख सकते हैं?

हां, संकष्टी चतुर्थी और कजरी तीज का व्रत एक ही दिन रखा जा सकता है। 31 अगस्त 2026 को दोनों पर्व पड़ रहे हैं, इसलिए जो महिलाएं दोनों व्रत रखने की इच्छा रखती हैं, वे अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार दोनों का पालन कर सकती हैं।

हालांकि, दोनों व्रतों की पूजा-विधि और धार्मिक मान्यताएं अलग-अलग हैं। कजरी तीज में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है, जबकि संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित होती है। इसलिए दोनों व्रत रखने वाली महिलाएं दोनों देवी-देवताओं की विधि-विधान से पूजा कर सकती हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार किसी भी व्रत का फल श्रद्धा, नियम और संकल्प से जुड़ा होता है। इसलिए केवल व्रतों की संख्या अधिक होने से पुण्य कई गुना बढ़ने की बात निश्चित रूप से नहीं कही जा सकती। अपनी क्षमता, स्वास्थ्य और परिवार की परंपरा को ध्यान में रखते हुए व्रत रखना ही उचित है।

निष्कर्ष:

संकष्टी चतुर्थी और कजरी तीज 2026 इस वर्ष एक ही कैलेंडर तारीख पर पड़ने वाले दो महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर हैं। 31 अगस्त 2026, सोमवार को कजरी तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाएगी, जबकि हेरंब संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की आराधना की जाएगी।

दोनों व्रत एक ही दिन होने के कारण पूजा करते समय तिथि, स्थानीय पंचांग और अपनी पारिवारिक परंपरा का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। संकष्टी चतुर्थी के व्रती विशेष रूप से चंद्रोदय के बाद ही पारण करें और चंद्रोदय का स्थानीय समय जरूर देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

संकष्टी चतुर्थी 2026 कब है? +

संकष्टी चतुर्थी 2026 में 31 अगस्त, सोमवार को है। इस दिन हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा।

कजरी तीज 2026 कब है? +

कजरी तीज 2026 में 31 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी।

31 अगस्त 2026 कौन सा व्रत है? +

31 अगस्त 2026 को कजरी तीज और हेरंब संकष्टी चतुर्थी दोनों महत्वपूर्ण व्रत हैं।

संकष्टी चतुर्थी का व्रत कब खोलना चाहिए? +

सामान्य परंपरा के अनुसार चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर और भगवान गणेश की पूजा करने के बाद व्रत खोला जाता है।

क्या कजरी तीज और संकष्टी चतुर्थी एक ही दिन हैं? +

हां, 2026 में दोनों पर्व 31 अगस्त, सोमवार को पड़ रहे हैं। हालांकि दोनों अलग-अलग तिथियों और धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं।

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