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नरली पूर्णिमा और श्रावण पूर्णिमा 2026 एक ही दिन: जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

नरली पूर्णिमा और श्रावण पूर्णिमा 2026 एक ही दिन: जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
By Pt. Jitendra Vyas | Aug-26-2026

नरली पूर्णिमा और श्रावण पूर्णिमा 2026: नरली पूर्णिमा और श्रावण पूर्णिमा 2026 एक ही दिन क्यों हैं? जानें 28 अगस्त की तिथि, पूर्णिमा तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, नारियल अर्पित करने की परंपरा और धार्मिक महत्व।

 

नरली पूर्णिमा और श्रावण पूर्णिमा 2026: नरली पूर्णिमा 2026 और श्रावण पूर्णिमा 2026 इस बार एक ही दिन मनाई जाएंगी। पंचांग के अनुसार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को श्रावण पूर्णिमा है और इसी दिन महाराष्ट्र व कोंकण क्षेत्र में नरली पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन रक्षाबंधन भी है, इसलिए 28 अगस्त का दिन धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद खास रहने वाला है।

वहीं श्रावण पूर्णिमा पूरे देश में धार्मिक महत्व रखने वाली पूर्णिमा तिथि है। इस दिन स्नान, दान, पूजा, जप और विभिन्न क्षेत्रीय धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं।

आइए जानते हैं नरली पूर्णिमा 2026 कब है, श्रावण पूर्णिमा 2026 की तिथि क्या है, पूर्णिमा तिथि का समय, पूजा विधि, नारियल चढ़ाने का महत्व और इस दिन से जुड़ी खास परंपराएं।

नरली पूर्णिमा क्या है?

यह श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला प्रमुख क्षेत्रीय पर्व है। महाराष्ट्र के तटीय इलाकों और कोंकण क्षेत्र में इसे नारली पूर्णिमा या नारियल पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन समुद्र देव यानी वरुण देव की पूजा करके समुद्र को नारियल अर्पित करने की परंपरा है।

नरली पूर्णिमा 2026 कब है?

नरली पूर्णिमा 2026, 28 अगस्त शुक्रवार को मनाई जाएगी।

पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 9:08 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त 2026 को सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी। स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार पूजा के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।

नरली पूर्णिमा 2026 की जानकारी

  • पर्व: नरली पूर्णिमा
  • दूसरा नाम: नारियल पूर्णिमा, नारली पौर्णिमा
  • तारीख: 28 अगस्त 2026
  • दिन: शुक्रवार
  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 27 अगस्त, सुबह 9:08 बजे
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 28 अगस्त, सुबह 9:48 बजे
  • मुख्य आराध्य: समुद्र देव/वरुण देव
  • मुख्य परंपरा: समुद्र को नारियल अर्पित करना

श्रावण पूर्णिमा 2026 कब है?

श्रावण पूर्णिमा सावन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को कहा जाता है। हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इसी महीने की पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन स्नान, दान, जप, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान करने की परंपरा है।

वर्ष 2026 में श्रावण पूर्णिमा (सावन पूर्णिमा) 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसी दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं देखने को मिलेंगी। कहीं इस दिन रक्षाबंधन मनाया जाएगा, तो महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में इसी तिथि को नरली पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।

श्रावण पूर्णिमा तिथि का समय:

  • आरंभ: 27 अगस्त 2026, गुरुवार को सुबह 09:08 बजे
  • समाप्त: 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को सुबह 09:48 बजे

इसी दिन अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग पर्व और परंपराएं देखने को मिलती हैं। 2026 में श्रावण पूर्णिमा, नरली पूर्णिमा और रक्षाबंधन एक ही तारीख पर पड़ रहे हैं।

श्रावण पूर्णिमा का महत्व

  • श्रावण पूर्णिमा को भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। 
  • सावन के पूरे महीने भगवान शिव की आराधना करने के बाद पूर्णिमा के दिन पूजा, जप और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • इस दिन श्रद्धालु सुबह पवित्र नदी, सरोवर या घर में स्नान करके भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। 
  • शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद भगवान शिव की आरती और मंत्र जाप किया जाता है।
  • श्रावण पूर्णिमा दान-पुण्य और धार्मिक साधना के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, फल, दक्षिणा या जरूरत की वस्तुओं का दान किया जा सकता है।

श्रावण पूर्णिमा पर क्या दान करें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा के दिन दान करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, फल, मिठाई, दक्षिणा और दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं दान कर सकते हैं।

दान करते समय दिखावे के बजाय जरूरतमंद व्यक्ति की आवश्यकता को प्राथमिकता देना अधिक महत्वपूर्ण है।

श्रावण पूर्णिमा पूजा विधि

श्रावण पूर्णिमा के दिन अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार ये कार्य किए जा सकते हैं-

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करें।
  • शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें।
  • भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें।
  • जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करें।
  • घर में दीपक जलाकर परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
  • अपनी क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार रक्षाबंधन या अन्य धार्मिक अनुष्ठान करें।

नरली पूर्णिमा और श्रावण पूर्णिमा का क्या संबंध है?

नरली पूर्णिमा और श्रावण पूर्णिमा को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि क्या ये दो अलग-अलग पर्व हैं।

दरअसल, नरली पूर्णिमा कोई अलग पूर्णिमा तिथि नहीं है। यह श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला क्षेत्रीय पर्व है। महाराष्ट्र, मुंबई, गोवा और कोंकण के तटीय क्षेत्रों में श्रावण पूर्णिमा के दिन समुद्र देव की पूजा और नारियल अर्पित करने की परंपरा के कारण इसे नरली पूर्णिमा कहा जाता है।

इसलिए 2026 में श्रावण पूर्णिमा 28 अगस्त को होने के कारण नरली पूर्णिमा भी 28 अगdस्त को ही मनाई जाएगी।

यानी एक ही पूर्णिमा तिथि को देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के साथ मनाया जाता है।

मछुआरा समुदाय के लिए नरली पूर्णिमा क्यों खास है?

नरली पूर्णिमा मछुआरा समुदाय के लिए विशेष महत्व रखती है। समुद्र पर निर्भर परिवार इस दिन समुद्र देव और वरुण देव की पूजा करते हैं।

मान्यता के अनुसार इस दिन समुद्र देव से सुरक्षित समुद्री यात्रा, शांत समुद्र और अच्छी मछली पकड़ने की प्रार्थना की जाती है। कई स्थानों पर इसी अवसर से समुद्र में मछली पकड़ने के नए मौसम से जुड़ी परंपराएं भी शुरू होती हैं। 

इस वजह से नरली पूर्णिमा उनके लिए केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि जीवन और आजीविका से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर भी है।

नरली पूर्णिमा 2026 की पूजा विधि

नरली पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके भगवान गणेश और अपने इष्ट देव का स्मरण करें।

नरली पूर्णिमा पूजा विधि

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थान या समुद्र तट को साफ करें।
  3. भगवान गणेश का ध्यान करें।
  4. वरुण देव या समुद्र देव का स्मरण करें।
  5. दीपक और धूप जलाएं।
  6. नारियल, फूल, अक्षत, फल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
  7. श्रद्धापूर्वक नारियल समुद्र को समर्पित करें।
  8. परिवार की सुरक्षा, सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करें।
  9. अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को दान करें।

जरूरी सावधानी: समुद्र में प्लास्टिक, पॉलिथीन या ऐसी सामग्री न डालें जिससे समुद्री जीवों और पर्यावरण को नुकसान हो।

नरली पूर्णिमा पर समुद्र को नारियल क्यों चढ़ाते हैं?

नरली पूर्णिमा की सबसे प्रमुख परंपरा समुद्र को नारियल अर्पित करना है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार नारियल अर्पित करके वरुण देव के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। मछुआरा समुदाय समुद्र से अपनी आजीविका प्राप्त करता है, इसलिए इस दिन सुरक्षित यात्रा और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है। 

नरली पूर्णिमा पर कौन-कौन से व्यंजन बनाए जाते हैं?

नरली पूर्णिमा पर नारियल से बने पारंपरिक व्यंजन बनाने की भी परंपरा है। महाराष्ट्र में नारली भात, यानी नारियल और चावल से बनाया जाने वाला मीठा व्यंजन, विशेष रूप से लोकप्रिय है।

इसके अलावा घरों में नारियल से बनी मिठाइयां और अन्य पारंपरिक पकवान भी बनाए जाते हैं।

इस परंपरा में नारियल केवल पूजा सामग्री नहीं बल्कि पर्व के भोजन और सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

नरली पूर्णिमा के क्षेत्रीय नाम और परंपराएं

भारत में एक ही पूर्णिमा तिथि अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नाम और परंपराओं के साथ मनाई जाती है।

  • महाराष्ट्र और कोंकण: नरली पूर्णिमा
  • दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों: अवनि अवित्तम
  • उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों: कजरी पूर्णिमा
  • कई क्षेत्रों में: श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन

नरली पूर्णिमा पर क्या करें?

नरली पूर्णिमा के दिन अपनी क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार ये कार्य किए जा सकते हैं-

  • सुबह स्नान करके पूजा करें।
  • भगवान गणेश और इष्ट देव का स्मरण करें।
  • समुद्र देव/वरुण देव की पूजा करें।
  • नारियल अर्पित करें।
  • परिवार की सुरक्षा और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
  • नारियल से बने पारंपरिक व्यंजन बनाएं।
  • जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र का दान करें।
  • प्रकृति और समुद्र की स्वच्छता का ध्यान रखें।

नरली पूर्णिमा पर क्या नहीं करना चाहिए?

धार्मिक पर्व के दिन मन और वाणी को संयमित रखने की परंपरा है। इसलिए विवाद, क्रोध और अपशब्दों से बचना चाहिए।

इसके अलावा समुद्र में पूजा सामग्री डालते समय पर्यावरण का विशेष ध्यान रखें। धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति और समुद्री जीवों की सुरक्षा भी हमारी जिम्मेदारी है।

28 अगस्त 2026 को कौन-कौन से पर्व हैं?

28 अगस्त 2026, शुक्रवार को श्रावण पूर्णिमा से जुड़े कई महत्वपूर्ण अवसर हैं।

मुख्य रूप से इस दिन-

  • श्रावण पूर्णिमा
  • नरली पूर्णिमा
  • रक्षाबंधन
  • गायत्री जयंती/गायत्री जाप
  • संस्कृत दिवस

निष्कर्ष:

नरली पूर्णिमा और श्रावण पूर्णिमा 2026 शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाई जाएंगी। नरली पूर्णिमा श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला प्रमुख क्षेत्रीय पर्व है, जिसकी खास पहचान समुद्र देव या वरुण देव की पूजा और नारियल अर्पित करने की परंपरा है।

महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में यह पर्व विशेष रूप से मछुआरा समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिन समुद्र की पूजा करके सुरक्षित यात्रा, शांत समुद्र और अच्छी आजीविका की प्रार्थना की जाती है। वहीं 28 अगस्त को रक्षाबंधन भी होने के कारण यह दिन धार्मिक और पारिवारिक दोनों दृष्टि से विशेष बन गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

नरली पूर्णिमा 2026 कब है? +

नरली पूर्णिमा 2026 में 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाई जाएगी।

श्रावण पूर्णिमा 2026 कब है? +

श्रावण पूर्णिमा 2026 28 अगस्त, शुक्रवार को है। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह समाप्त होगी।

क्या नरली पूर्णिमा और श्रावण पूर्णिमा एक ही दिन होती हैं? +

हां। नरली पूर्णिमा श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला क्षेत्रीय पर्व है, इसलिए दोनों की तिथि एक ही होती है।

नरली पूर्णिमा मुख्य रूप से कहां मनाई जाती है? +

यह पर्व खासतौर पर महाराष्ट्र, मुंबई, कोंकण और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में प्रसिद्ध है। मछुआरा समुदाय के लिए इसका विशेष महत्व है।

नरली पूर्णिमा पर किस देवता की पूजा होती है? +

नरली पूर्णिमा पर समुद्र देव / वरुण देव की पूजा की जाती है और समुद्र को नारियल अर्पित किया जाता है।

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