रक्षाबंधन 2026: राखी बांधते समय किन बातों का ध्यान रखें? जानें रक्षाबंधन 2026 का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, सही दिशा, तीन गांठों का महत्व और रक्षा सूत्र मंत्र।
रक्षाबंधन 2026: भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और अटूट रिश्ते का पर्व रक्षाबंधन इस साल 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी यानी रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती है। वहीं भाई अपनी बहन की रक्षा, सम्मान और हर सुख-दुख में साथ देने का संकल्प लेता है।
रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने को लेकर कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि राखी बांधने का शुभ समय क्या है, भाई को किस दिशा में बैठाना चाहिए, पूजा की थाली में क्या रखना चाहिए, राखी में कितनी गांठ लगानी चाहिए और राखी बांधते समय कौन-सा मंत्र बोलना चाहिए?
अगर आप भी Raksha Bandhan 2026 पर राखी बांधने की सही विधि और शुभ मुहूर्त जानना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं पूरी जानकारी।
रक्षाबंधन 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
- रक्षाबंधन 2026 की तारीख: 28 अगस्त 2026
- दिन: शुक्रवार
- पर्व: श्रावण शुक्ल पक्ष पूर्णिमा
रक्षाबंधन 2026 राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार 28 अगस्त 2026 को रक्षा सूत्र बांधने के लिए शुभ समय हैं:
समय | वेला |
सुबह 6:20 से 11:04 बजे तक | लाभ-अमृत वेला |
दोपहर 12:40 से 1:04 बजे तक | अभिजित वेला |
दोपहर 12:39 से 02:14 बजे तक | शुभ वेला |
शाम 05:23 से 06:58 बजे तक | चंचल वेला |
रक्षाबंधन पर राखी बांधने की विधि
रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए नीचे दिए गए इन विधि को शामिल करें:
1. पूजा की थाली तैयार करें: थाली में राखी, रोली या कुमकुम, अक्षत, श्रीफल, दीपक और मिठाई रखें।
2. भाई को आसन पर बैठाएं: भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं।
3. भाई को तिलक लगाएं: सबसे पहले भाई के माथे पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाएं और उसके ऊपर अक्षत लगाएं।
4. रक्षा सूत्र बांधें: भाई की दाहिनी कलाई पर राखी या रक्षा सूत्र बांधें। राखी बांधते समय भाई की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करें।
5. राखी बांधते समय मंत्र बोलें: रक्षा सूत्र बांधते समय परंपरा के अनुसार “येन बद्धो बलिः राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥” मंत्र का जाप करें।
6. भाई की आरती करें: राखी बांधने के बाद दीपक से भाई की आरती उतारें।
7. मिठाई खिलाएं: आरती के बाद भाई को मिठाई खिलाएं और उसके सुखी जीवन की कामना करें।
8. भाई बहन को उपहार दे: इसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार देकर उसके प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करे। परिवार की परंपरा के अनुसार बहन भी भाई को उपहार दे सकती है।
राखी की पूजा थाली में क्या-क्या रखें?
रक्षाबंधन पर पूजा की थाली तैयार करते समय इन चीजों को शामिल किया जा सकता है:
- राखी या रक्षा सूत्र
- रोली या कुमकुम
- अक्षत यानी साबुत चावल
- श्रीफल यानी नारियल
- दीपक
- मिठाई
राखी किस हाथ में बांधनी चाहिए?
पारंपरिक मान्यता के अनुसार बहन भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधती है। राखी बांधते समय भाई के सुख, स्वास्थ्य, लंबी उम्र और समृद्धि की कामना की जाती है।
राखी बांधते समय भाई का मुंह किस दिशा में होना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राखी बांधते समय भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाना शुभ माना जाता है। बहन भाई के सामने बैठकर पहले तिलक लगाए, अक्षत लगाए और फिर उसकी दाहिनी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधे।
राखी में तीन गांठ क्यों लगाई जाती हैं?
रक्षाबंधन पर राखी बांधते समय तीन गांठ लगाना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन तीन गांठों को ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानी त्रिदेव का प्रतीक माना जाता है।
हालांकि कुछ क्षेत्रों और परिवारों में पांच गांठ लगाने की परंपरा भी होती है। पांच गांठों को पंचतत्वों से जोड़कर देखा जाता है लेकिन सामान्य रूप से राखी में तीन गांठ लगाने की परंपरा अधिक प्रचलित है।
राखी की तीन गांठों का क्या महत्व:
राखी की तीन गांठों को अलग-अलग शुभ संकल्पों से जोड़ा जाता है।
- पहली गांठ का महत्व
पहली गांठ भाई की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना का प्रतीक मानी जाती है। बहन इस गांठ के साथ भाई के स्वस्थ और सुखी जीवन की प्रार्थना करती है।
- दूसरी गांठ का महत्व
दूसरी गांठ बहन की लंबी उम्र और परिवार की सुख-शांति की कामना से जुड़ी मानी जाती है। यह पूरे परिवार में प्रेम और खुशहाली बनाए रखने की भावना को दर्शाती है।
- तीसरी गांठ का महत्व
तीसरी गांठ भाई-बहन के रिश्ते में हमेशा प्रेम, विश्वास और मिठास बनाए रखने की शुभकामना का प्रतीक मानी जाती है।
राखी बांधते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?
मंत्र का भाव रक्षा और सुरक्षा की कामना से जुड़ा है। इसलिए रक्षाबंधन पर रक्षा सूत्र बांधते समय इस मंत्र का उच्चारण किया जाना चाहिए।
येन बद्धो बलिः राजा
दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामभिबध्नामि
रक्षे मा चल मा चल॥
निष्कर्ष:
रक्षाबंधन 2026 भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सम्मान का पवित्र पर्व है। इस वर्ष 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को रक्षाबंधन मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार सुबह 06:20 से 11:04 बजे तक लाभ-अमृत वेला, दोपहर 12:14 से 01:04 बजे तक अभिजित वेला, 12:39 से 02:14 बजे तक शुभ वेला और शाम 05:23 से 06:58 बजे तक चंचल वेला में रक्षा सूत्र बांधना श्रेष्ठ बताया गया है।
आखिरकार रक्षाबंधन की सबसे बड़ी खूबसूरती किसी एक रस्म में नहीं, बल्कि उस प्रेम, विश्वास और साथ के वचन में है जो भाई-बहन एक-दूसरे को देते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
रक्षाबंधन 2026 में 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
पंचांग के अनुसार सुबह 06:20 से 11:04 बजे, दोपहर 12:14 से 01:04 बजे, 12:39 से 02:14 बजे और शाम 05:23 से 06:58 बजे तक शुभ वेलाएं बताई गई हैं।
भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाना शुभ माना जाता है।
परंपरा के अनुसार बहन भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधती है।
सामान्य रूप से राखी में तीन गांठ लगानी चाहिए। इन्हें त्रिदेव का प्रतीक माना जाता है।
रक्षा सूत्र बांधते समय “येन बद्धो बलिः राजा, दानवेन्द्रो महाबलः…” मंत्र का जाप किया जाता है।
पूजा थाली में राखी, रोली, अक्षत, श्रीफल, दीपक और मिठाई रखा जाना चाहिए।
हां, पारंपरिक पूजा विधि में राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारने और फिर मिठाई खिलाने की परंपरा है।
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