✨ Bhai Dooj 2026
भाई दूज 2026 (Bhai Dooj 2026): तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
11 नवम्बर 2026, बुधवार
लेखक:
Pt. Jitendra Vyas
· अपडेटेड: 17 अक्टूबर 2026
तारीख
11 नव. 2026
तिथि
कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि
शुभ मुहूर्त
दोपहर 1:10 बजे से - दोपहर 3:20 बजे तक
भाई दूज 2026 का महत्व
● द्वितीया तिथि प्रारंभ: 10 नवंबर 2026 को दोपहर 2:00 बजे
● द्वितीया तिथि समाप्त: 11 नवंबर 2026 को दोपहर 3:53 बजे
● तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त: दोपहर 1:10 बजे से दोपहर 3:20 बजे तक (नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार)
भाई दूज का त्योहार क्यों मनाया जाता है?
भाई दूज हिंदू धर्म में भाई-बहन के रिश्ते को सम्मान देने वाला महत्वपूर्ण पर्व है। यह त्योहार केवल तिलक लगाने या उपहार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रेम, विश्वास, पारिवारिक एकता और एक-दूसरे की खुशहाली की कामना का प्रतीक है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनके सुखी, स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की प्रार्थना करती हैं।
भाई अपनी बहनों की रक्षा, सम्मान और सुख-समृद्धि का संकल्प लेते हैं।
भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है। इसका संबंध भगवान यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी पौराणिक कथा से है।
इस दिन बहन के घर जाकर भोजन करने और उससे तिलक करवाने से भाई को शुभ फल प्राप्त होते हैं।
कई परिवारों में इस दिन भाई को मिठाई खिलाने, आरती उतारने और उपहार देने की परंपरा है।
कुछ क्षेत्रों में भाई दूज के अवसर पर यमुना नदी में स्नान करने का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
महाराष्ट्र में यह पर्व भाऊ बीज, जबकि बंगाल में भाई फोंटा के नाम से जाना जाता है।
अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की विधि और परंपराएं भिन्न हो सकती हैं, लेकिन सभी का मुख्य उद्देश्य भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत बनाना है।
यह त्योहार परिवार के सदस्यों को आपसी मतभेद भुलाकर प्रेम और अपनापन बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
भाई दूज का सबसे सुंदर संदेश है कि भाई-बहन का रिश्ता जीवनभर साथ निभाने, एक-दूसरे का सम्मान करने और कठिन समय में सहयोग देने का रिश्ता है।
● द्वितीया तिथि समाप्त: 11 नवंबर 2026 को दोपहर 3:53 बजे
● तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त: दोपहर 1:10 बजे से दोपहर 3:20 बजे तक (नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार)
भाई दूज का त्योहार क्यों मनाया जाता है?
भाई दूज हिंदू धर्म में भाई-बहन के रिश्ते को सम्मान देने वाला महत्वपूर्ण पर्व है। यह त्योहार केवल तिलक लगाने या उपहार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रेम, विश्वास, पारिवारिक एकता और एक-दूसरे की खुशहाली की कामना का प्रतीक है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनके सुखी, स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की प्रार्थना करती हैं।
भाई अपनी बहनों की रक्षा, सम्मान और सुख-समृद्धि का संकल्प लेते हैं।
भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है। इसका संबंध भगवान यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी पौराणिक कथा से है।
इस दिन बहन के घर जाकर भोजन करने और उससे तिलक करवाने से भाई को शुभ फल प्राप्त होते हैं।
कई परिवारों में इस दिन भाई को मिठाई खिलाने, आरती उतारने और उपहार देने की परंपरा है।
कुछ क्षेत्रों में भाई दूज के अवसर पर यमुना नदी में स्नान करने का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
महाराष्ट्र में यह पर्व भाऊ बीज, जबकि बंगाल में भाई फोंटा के नाम से जाना जाता है।
अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की विधि और परंपराएं भिन्न हो सकती हैं, लेकिन सभी का मुख्य उद्देश्य भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत बनाना है।
यह त्योहार परिवार के सदस्यों को आपसी मतभेद भुलाकर प्रेम और अपनापन बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
भाई दूज का सबसे सुंदर संदेश है कि भाई-बहन का रिश्ता जीवनभर साथ निभाने, एक-दूसरे का सम्मान करने और कठिन समय में सहयोग देने का रिश्ता है।
भाई दूज 2026 पूजा विधि
1
भाई दूज के दिन बहनें अपने भाइयों के लिए विशेष पूजा की थाली तैयार करती हैं। इस दिन तिलक, आरती और मिठाई खिलाने की परंपरा निभाई जाती है। पूजा करते समय इन चरणों का पालन करें:-
2
स्नान करके पूजा की तैयारी करें: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा के स्थान को साफ करें और भगवान का स्मरण करके दिन की शुरुआत करें।
3
पूजा की थाली सजाएं: थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, मिठाई, फूल और पूजा में उपयोग होने वाली अन्य सामग्री रखें।
4
शुभ मुहूर्त में भाई को बैठाएं: भाई को स्वच्छ आसन पर बैठाएं। पारिवारिक परंपरा के अनुसार बहन भाई के माथे पर तिलक लगाने की तैयारी करे।
5
भाई को तिलक लगाएं: भाई के माथे पर रोली या कुमकुम से तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें। इस दौरान भाई की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना करें।
6
आरती उतारें: दीपक से भाई की आरती उतारें। परिवार की परंपरा के अनुसार भगवान का स्मरण करें और भाई की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
7
मिठाई खिलाएं: भाई को मिठाई खिलाएं और उसके सुखी जीवन की कामना करें। कई परिवारों में इस अवसर पर भाई को भोजन कराने की भी परंपरा है।
8
उपहार और आशीर्वाद का आदान-प्रदान करें: भाई अपनी बहन को उपहार दे सकता है। दोनों एक-दूसरे के प्रति प्रेम, सम्मान और सहयोग बनाए रखने का संकल्प लें।
9
परिवार के साथ पर्व मनाएं: पूजा के बाद परिवार के सदस्यों के साथ भोजन करें और इस अवसर को प्रेम तथा खुशियों के साथ मनाएं।
भाई दूज की व्रत कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान सूर्यदेव और देवी संज्ञा के दो संतानें थीं- यमराज और यमुना। दोनों भाई-बहन एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। समय बीतने के साथ यमराज अपने कार्यों में व्यस्त रहने लगे, जबकि यमुना चाहती थीं कि उनका भाई उनसे मिलने आए।
यमुना ने कई बार यमराज को अपने घर आने का निमंत्रण दिया। अंततः कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने उनके घर पहुंचे। यमुना ने अपने भाई का प्रेमपूर्वक स्वागत किया। उन्होंने यमराज को तिलक लगाया, आरती उतारी और स्वादिष्ट भोजन कराया। बहन का स्नेह देखकर यमराज प्रसन्न हुए और उनसे वरदान मांगने के लिए कहा।
यमुना ने प्रार्थना की कि इस दिन जो भाई अपनी बहन के घर जाकर उससे तिलक करवाए, उसे सुख, समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त हो। यमराज ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की। इसी मान्यता के कारण भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी खुशहाली की कामना करती हैं।
यह कथा भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और एक-दूसरे के प्रति समर्पण का संदेश देती है। हालांकि, यह एक धार्मिक मान्यता पर आधारित पौराणिक कथा है।
यमुना ने कई बार यमराज को अपने घर आने का निमंत्रण दिया। अंततः कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने उनके घर पहुंचे। यमुना ने अपने भाई का प्रेमपूर्वक स्वागत किया। उन्होंने यमराज को तिलक लगाया, आरती उतारी और स्वादिष्ट भोजन कराया। बहन का स्नेह देखकर यमराज प्रसन्न हुए और उनसे वरदान मांगने के लिए कहा।
यमुना ने प्रार्थना की कि इस दिन जो भाई अपनी बहन के घर जाकर उससे तिलक करवाए, उसे सुख, समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त हो। यमराज ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की। इसी मान्यता के कारण भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी खुशहाली की कामना करती हैं।
यह कथा भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और एक-दूसरे के प्रति समर्पण का संदेश देती है। हालांकि, यह एक धार्मिक मान्यता पर आधारित पौराणिक कथा है।
भाई दूज 2026: राशि अनुसार प्रभाव
भाई दूज का मुख्य उद्देश्य भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करना है। यह पर्व सभी राशियों के लिए प्रेम, पारिवारिक एकता और शुभकामनाओं का अवसर है। इन राशियों के जातक इस दिन परिवार के रिश्तों को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दे:-
● मेष राशि: भाई-बहन के बीच पुराने मतभेद दूर करने और संवाद बढ़ाने का प्रयास करें।
● वृषभ राशि: परिवार में प्रेम, स्थिरता और आपसी सहयोग को महत्व दें।
● कर्क राशि: भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करने और परिवार के साथ समय बिताने पर ध्यान दें।
● तुला राशि: रिश्तों में संतुलन बनाए रखने और एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करने का संकल्प लें।
● मीन राशि: भाई-बहन के प्रति स्नेह व्यक्त करें और जरूरत के समय एक-दूसरे का सहयोग करें।
● मेष राशि: भाई-बहन के बीच पुराने मतभेद दूर करने और संवाद बढ़ाने का प्रयास करें।
● वृषभ राशि: परिवार में प्रेम, स्थिरता और आपसी सहयोग को महत्व दें।
● कर्क राशि: भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करने और परिवार के साथ समय बिताने पर ध्यान दें।
● तुला राशि: रिश्तों में संतुलन बनाए रखने और एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करने का संकल्प लें।
● मीन राशि: भाई-बहन के प्रति स्नेह व्यक्त करें और जरूरत के समय एक-दूसरे का सहयोग करें।
अपनी राशि का मासिक राशिफल देखें
आज का दैनिक राशिफल देखें →भाई दूज 2026 के शुभ उपाय
भाई दूज के दिन अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार ये उपाय कर सकते हैं:
- शुभ मुहूर्त में भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसके अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की प्रार्थना करें।
- भगवान यमराज, देवी यमुना और अपने इष्टदेव का स्मरण करें।
- जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दें।
- भाई-बहन के बीच किसी प्रकार का मनमुटाव हो, तो बातचीत करके उसे दूर करने का प्रयास करें।
- परिवार के बुजुर्गों का आशीर्वाद लें और रिश्तों में प्रेम, सम्मान तथा सहयोग बनाए रखने का संकल्प करें।
- शुभ मुहूर्त में भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसके अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की प्रार्थना करें।
- भगवान यमराज, देवी यमुना और अपने इष्टदेव का स्मरण करें।
- जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दें।
- भाई-बहन के बीच किसी प्रकार का मनमुटाव हो, तो बातचीत करके उसे दूर करने का प्रयास करें।
- परिवार के बुजुर्गों का आशीर्वाद लें और रिश्तों में प्रेम, सम्मान तथा सहयोग बनाए रखने का संकल्प करें।
भाई दूज 2026: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भाई दूज 2026 में कब मनाई जाएगी? +
भाई दूज 2026 में बुधवार, 11 नवंबर को मनाई जाएगी। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है।
भाई दूज 2026 में तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त क्या है? +
पंचांग के अनुसार, 11 नवंबर 2026 को भाई दूज का तिलक मुहूर्त दोपहर 1:10 बजे से 3:20 बजे तक है।
भाई दूज पर भाई को तिलक क्यों लगाया जाता है? +
बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसके लंबे, स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना करती हैं। यह रस्म भाई-बहन के प्रेम और आपसी विश्वास का प्रतीक है।
भाई दूज को यम द्वितीया क्यों कहा जाता है? +
कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भगवान यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने गए थे। इसी मान्यता के कारण भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है।







