✨ Dussehra / Vijayadashami 2026
दशहरा / विजयादशमी 2026 (Dussehra / Vijayadashami 2026): तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
20 अक्टूबर 2026, मंगलवार
लेखक:
Pt. Jitendra Vyas
· अपडेटेड: 07 अक्टूबर 2026
तारीख
20 अक्टू. 2026
तिथि
आश्विन शुक्ल दशमी
शुभ मुहूर्त
दोपहर 1:59 बजे - दोपहर 2:45 बजे
दशहरा / विजयादशमी 2026 का महत्व
शुभ मुहूर्त:
● विजया मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से दोपहर 2:45 बजे तक
● अपराह्न पूजा मुहूर्त: दोपहर 1:14 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक
● दशमी तिथि प्रारंभ: 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:50 बजे से
● दशमी तिथि समाप्त: 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:11 बजे तक
दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था। इसी कारण दशहरे के दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है।
विजयादशमी का संबंध मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी माना जाता है। इस दिन कई स्थानों पर मां दुर्गा की पूजा और विसर्जन किया जाता है। दशहरा लोगों को सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह पर्व अहंकार, अन्याय और नकारात्मक शक्तियों पर विजय का संदेश देता है।
● विजया मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से दोपहर 2:45 बजे तक
● अपराह्न पूजा मुहूर्त: दोपहर 1:14 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक
● दशमी तिथि प्रारंभ: 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:50 बजे से
● दशमी तिथि समाप्त: 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:11 बजे तक
दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था। इसी कारण दशहरे के दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है।
विजयादशमी का संबंध मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी माना जाता है। इस दिन कई स्थानों पर मां दुर्गा की पूजा और विसर्जन किया जाता है। दशहरा लोगों को सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह पर्व अहंकार, अन्याय और नकारात्मक शक्तियों पर विजय का संदेश देता है।
दशहरा / विजयादशमी 2026 पूजा विधि
1
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।
2
घर के मंदिर या पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद भगवान श्रीराम, माता सीता, भगवान हनुमान और मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
3
सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान और पूजन करें। इसके बाद भगवान श्रीराम और माता सीता की पूजा करें।
4
भगवान को जल, रोली, चंदन, अक्षत, फूल, धूप और दीप अर्पित करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार फल और मिठाइयों का भोग लगाएं।
5
भगवान श्रीराम की कृपा पाने के लिए राम रक्षा स्तोत्र, श्रीराम स्तुति या सुंदरकांड का पाठ करें। साथ ही श्रद्धा के अनुसार राम नाम का जप करें।
6
अपराह्न काल में उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण या किसी स्वच्छ स्थान पर मां अपराजिता की पूजा करें। मान्यता है कि मां अपराजिता विजय का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
7
दशहरे के दिन शमी वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। शमी के वृक्ष के पास दीपक जलाएं और उसकी पत्तियों का आदान-प्रदान कर बड़ों का आशीर्वाद लें।
8
इस दिन वाहन, औजार, शस्त्र या कार्य से जुड़ी वस्तुओं की पूजा करने की परंपरा है। इन्हें गंगाजल से साफ करके रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें।
9
अंत में कपूर या घी के दीपक से भगवान की आरती करें। परिवार के सदस्यों के साथ प्रसाद ग्रहण करें और सभी में प्रसाद बांटें।
दशहरा / विजयादशमी की व्रत कथा
रामायण की कथा के अनुसार लंकापति रावण ने माता सीता का हरण किया था। माता सीता को वापस लाने के लिए भगवान श्रीराम ने वानर सेना के साथ लंका की ओर प्रस्थान किया। श्रीराम और रावण के बीच भीषण युद्ध हुआ। लंबे युद्ध के बाद भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया। रावण का वध बुराई और अहंकार पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इसी विजय की स्मृति में विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है।
दशहरा को मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी जोड़ा जाता है। इस प्रकार यह पर्व दो प्रमुख धार्मिक कथाओं के माध्यम से धर्म और सत्य की विजय का संदेश देता है।
दशहरा को मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी जोड़ा जाता है। इस प्रकार यह पर्व दो प्रमुख धार्मिक कथाओं के माध्यम से धर्म और सत्य की विजय का संदेश देता है।
दशहरा / विजयादशमी 2026: राशि अनुसार प्रभाव
सामान्य ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार विजयादशमी का दिन सभी राशियों के लिए शुभ माना जाता है। हालांकि, किसी व्यक्ति पर इसका प्रभाव उसकी जन्मकुंडली और ग्रहों की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।
● सिंह राशि : कार्यक्षेत्र और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव के अवसर मिल सकते हैं।
● कन्या राशि : रुके हुए कार्यों में गति आने और नए अवसर मिलने की संभावना मानी जा सकती है।
● मकर राशि : करियर और आर्थिक मामलों में आगे बढ़ने के अवसर बन सकते हैं।
● मीन राशि : धन, नौकरी और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना मानी जा सकती है।
● सिंह राशि : कार्यक्षेत्र और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव के अवसर मिल सकते हैं।
● कन्या राशि : रुके हुए कार्यों में गति आने और नए अवसर मिलने की संभावना मानी जा सकती है।
● मकर राशि : करियर और आर्थिक मामलों में आगे बढ़ने के अवसर बन सकते हैं।
● मीन राशि : धन, नौकरी और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना मानी जा सकती है।
अपनी राशि का मासिक राशिफल देखें
आज का दैनिक राशिफल देखें →दशहरा / विजयादशमी 2026 के शुभ उपाय
● भगवान श्रीराम का ध्यान करके उनकी पूजा करें।
● मां दुर्गा को लाल फूल अर्पित करें।
● जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करें।
● दशहरे के दिन अहंकार और नकारात्मक विचारों का त्याग करने का संकल्प लें।
● शाम के समय परिवार के साथ भगवान श्रीराम की आरती करें।
● मां दुर्गा को लाल फूल अर्पित करें।
● जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करें।
● दशहरे के दिन अहंकार और नकारात्मक विचारों का त्याग करने का संकल्प लें।
● शाम के समय परिवार के साथ भगवान श्रीराम की आरती करें।
दशहरा / विजयादशमी 2026: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
2026 में दशहरा पूजा कब है? +
2026 में दशहरा यानी विजयादशमी 20 अक्टूबर, मंगलवार को मनाई जाएगी।
विजयादशमी का शुभ मुहूर्त कब है? +
विजयादशमी के दिन अपराह्न काल में विजय मुहूर्त शुभ माना जाता है। पूजा के लिए दिए गए मुहूर्त के अनुसार दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक विजय मुहूर्त रहेगा।
दशहरा के दिन किसका पूजन होता है? +
दशहरे पर मुख्य रूप से भगवान श्रीराम, माता सीता, भगवान हनुमान और मां दुर्गा की पूजा की जाती है। इसके साथ मां अपराजिता और शमी वृक्ष की पूजा की भी परंपरा है।
विजयादशमी और दशहरा में क्या अंतर है? +
विजयादशमी और दशहरा सामान्यत एक ही पर्व के नाम हैं। यह दिन भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय का प्रतीक माना जाता है।
घर पर दशहरा पूजा कैसे करें? +
घर पर दशहरा पूजा के लिए स्नान करके पूजा स्थल की सफाई करें। भगवान श्रीराम, माता सीता, भगवान हनुमान और मां दुर्गा का पूजन करें। जल, रोली, चंदन, अक्षत, फूल, धूप और दीप अर्पित करें। इसके बाद राम नाम का जप या राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें और अंत में आरती करके प्रसाद बांटें।







