✨ Sharad Navratri 2026
शारदीय नवरात्रि 2026 (Sharad Navratri 2026): तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
11 अक्टूबर 2026, रविवार
लेखक:
Pt. Jitendra Vyas
· अपडेटेड: 06 अक्टूबर 2026
तारीख
11 अक्टू. 2026
तिथि
प्रतिपदा तिथि, शुक्ल पक्ष
शुभ मुहूर्त
सुबह 6:19 बजे - सुबह 10:12 बजे
शारदीय नवरात्रि 2026 का महत्व
शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख और पवित्र पर्वों में से एक है। यह पर्व मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की आराधना को समर्पित है। नवरात्रि का पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है और नौ दिनों तक देवी शक्ति की पूजा की जाती है। नौ दिनों के बाद विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है।
Navratri 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से होगी। इस दिन घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा के साथ नवरात्रि का शुभारंभ होगा। पंचांग के अनुसार 11 अक्टूबर को प्रतिपदा तिथि में घटस्थापना की जाएगी शारदीय नवरात्रि में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, नवरात्रि के पहले दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना करने से भक्तों को शक्ति, साहस और आत्मबल प्राप्त होता है। इस दौरान लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं, देवी मंत्रों का जाप करते हैं और सुबह-शाम माता की आरती करते हैं।
नवरात्रि को देवी शक्ति की उपासना के साथ-साथ बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक भी माना जाता है। पौराणिक कथाओं में मां दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध इसी शक्ति और धर्म की विजय का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। 11 अक्टूबर को मां शैलपुत्री से पूजा शुरू होकर क्रमशः मां ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। इस प्रकार नवरात्रि केवल पूजा और व्रत का पर्व नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को आत्मसंयम, श्रद्धा, सकारात्मक सोच और बुराइयों से दूर रहने की प्रेरणा भी देता है।
Navratri 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से होगी। इस दिन घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा के साथ नवरात्रि का शुभारंभ होगा। पंचांग के अनुसार 11 अक्टूबर को प्रतिपदा तिथि में घटस्थापना की जाएगी शारदीय नवरात्रि में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, नवरात्रि के पहले दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना करने से भक्तों को शक्ति, साहस और आत्मबल प्राप्त होता है। इस दौरान लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं, देवी मंत्रों का जाप करते हैं और सुबह-शाम माता की आरती करते हैं।
नवरात्रि को देवी शक्ति की उपासना के साथ-साथ बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक भी माना जाता है। पौराणिक कथाओं में मां दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध इसी शक्ति और धर्म की विजय का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। 11 अक्टूबर को मां शैलपुत्री से पूजा शुरू होकर क्रमशः मां ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। इस प्रकार नवरात्रि केवल पूजा और व्रत का पर्व नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को आत्मसंयम, श्रद्धा, सकारात्मक सोच और बुराइयों से दूर रहने की प्रेरणा भी देता है।
शारदीय नवरात्रि 2026 पूजा विधि
1
नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करके उसे गंगाजल या स्वच्छ जल से शुद्ध करें।
3
एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
4
घटस्थापना के लिए मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और उसके ऊपर जल से भरा कलश स्थापित करें।
5
कलश में जल, अक्षत और सिक्का आदि रखने की परंपरा है। कलश के ऊपर आम या अन्य उपलब्ध पवित्र पत्ते रखकर नारियल स्थापित करें।
6
शुभ मुहूर्त में घटस्थापना करके मां दुर्गा का आह्वान करें और दीपक प्रज्वलित करें।
7
मां दुर्गा को रोली, अक्षत, लाल पुष्प, फल, मिठाई और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
8
नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां के अलग-अलग स्वरूप की पूजा करें और दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का पाठ करें।
9
अपनी श्रद्धा और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत रखें तथा सात्त्विक भोजन या फलाहार करें।
10
अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करें और कन्याओं को भोजन, उपहार या दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लें।
शारदीय नवरात्रि की व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार महिषासुर नामक असुर ने कठोर तपस्या करके ब्रह्माजी को प्रसन्न किया और वरदान प्राप्त किया। वरदान के प्रभाव से वह अत्यंत शक्तिशाली हो गया और उसे अपनी शक्ति पर अहंकार होने लगा।
महिषासुर ने देवताओं और ऋषि-मुनियों को परेशान करना शुरू कर दिया। उसने अपनी शक्ति के बल पर देवताओं को पराजित कर दिया और स्वर्ग पर अधिकार करने का प्रयास किया। उसके अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं ने भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव सहित अन्य देव शक्तियों से सहायता मांगी।
तब देवताओं की सामूहिक शक्ति से देवी दुर्गा का प्राकट्य हुआ। सभी देवताओं ने देवी को विभिन्न दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए। मां दुर्गा ने महिषासुर का सामना किया और दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ।
कहा जाता है कि महिषासुर अपनी शक्ति के बल पर अलग-अलग रूप धारण करता रहा, लेकिन मां दुर्गा ने उसका सामना किया। अंत में देवी ने महिषासुर का वध कर देवताओं और संसार को उसके अत्याचार से मुक्त कराया।
मां दुर्गा की इस विजय को धर्म और शक्ति की विजय का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है।
शारदीय नवरात्रि का संबंध भगवान श्रीराम की रावण पर विजय से भी जोड़ा जाता है। नवरात्रि के बाद आने वाली विजयादशमी को भगवान श्रीराम की विजय के रूप में भी मनाया जाता है। इस तरह यह पर्व शक्ति, धर्म और सत्य की विजय का संदेश देता है।
महिषासुर ने देवताओं और ऋषि-मुनियों को परेशान करना शुरू कर दिया। उसने अपनी शक्ति के बल पर देवताओं को पराजित कर दिया और स्वर्ग पर अधिकार करने का प्रयास किया। उसके अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं ने भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव सहित अन्य देव शक्तियों से सहायता मांगी।
तब देवताओं की सामूहिक शक्ति से देवी दुर्गा का प्राकट्य हुआ। सभी देवताओं ने देवी को विभिन्न दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए। मां दुर्गा ने महिषासुर का सामना किया और दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ।
कहा जाता है कि महिषासुर अपनी शक्ति के बल पर अलग-अलग रूप धारण करता रहा, लेकिन मां दुर्गा ने उसका सामना किया। अंत में देवी ने महिषासुर का वध कर देवताओं और संसार को उसके अत्याचार से मुक्त कराया।
मां दुर्गा की इस विजय को धर्म और शक्ति की विजय का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है।
शारदीय नवरात्रि का संबंध भगवान श्रीराम की रावण पर विजय से भी जोड़ा जाता है। नवरात्रि के बाद आने वाली विजयादशमी को भगवान श्रीराम की विजय के रूप में भी मनाया जाता है। इस तरह यह पर्व शक्ति, धर्म और सत्य की विजय का संदेश देता है।
शारदीय नवरात्रि 2026: राशि अनुसार प्रभाव
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का समय कुछ राशियों के लिए करियर, धन और व्यक्तिगत जीवन के लिहाज से सकारात्मक रह सकता है। हालांकि, किसी व्यक्ति का वास्तविक फल उसकी जन्मकुंडली और ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है।
मेष राशि: नवरात्रि के दौरान कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां और आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। मेहनत का अच्छा परिणाम मिलने तथा आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं।
वृषभ राशि: धन और आर्थिक मामलों के लिए यह समय सकारात्मक रहेगा। सोच-समझकर लिए गए फैसलों से लाभ मिलने और परिवार में सुख-शांति बढ़ने की संभावना है।
कन्या राशि: नवरात्रि के दौरान रुके हुए कार्य आगे बढ़ सकते हैं। करियर में नए अवसर और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
मीन राशि: नवरात्रि का समय मीन राशि वालों के लिए सकारात्मक है। करियर, आर्थिक स्थिति और व्यक्तिगत जीवन में आगे बढ़ने के अवसर मिलने की संभावना है।
मेष राशि: नवरात्रि के दौरान कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां और आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। मेहनत का अच्छा परिणाम मिलने तथा आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं।
वृषभ राशि: धन और आर्थिक मामलों के लिए यह समय सकारात्मक रहेगा। सोच-समझकर लिए गए फैसलों से लाभ मिलने और परिवार में सुख-शांति बढ़ने की संभावना है।
कन्या राशि: नवरात्रि के दौरान रुके हुए कार्य आगे बढ़ सकते हैं। करियर में नए अवसर और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
मीन राशि: नवरात्रि का समय मीन राशि वालों के लिए सकारात्मक है। करियर, आर्थिक स्थिति और व्यक्तिगत जीवन में आगे बढ़ने के अवसर मिलने की संभावना है।
अपनी राशि का मासिक राशिफल देखें
आज का दैनिक राशिफल देखें →शारदीय नवरात्रि 2026 के शुभ उपाय
- नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा को लाल पुष्प अर्पित करें।
- सुबह या शाम देवी के सामने घी का दीपक जलाएं।
- श्रद्धा के अनुसार दुर्गा चालीसा या दुर्गा मंत्र का जाप करें।
- नवरात्रि के दौरान घर और पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करके उन्हें भोजन और उपहार दें।
- जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करें।
श्री दुर्गा चालीसा पढ़ें →
- सुबह या शाम देवी के सामने घी का दीपक जलाएं।
- श्रद्धा के अनुसार दुर्गा चालीसा या दुर्गा मंत्र का जाप करें।
- नवरात्रि के दौरान घर और पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करके उन्हें भोजन और उपहार दें।
- जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करें।
शारदीय नवरात्रि 2026: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
2026 में शारदीय नवरात्रि कब से है? +
शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी।
9 दिन का नवरात्रि व्रत कब तोड़ना चाहिए? +
नवरात्रि का व्रत नवमी तिथि की पूजा और कन्या पूजन के बाद या अपनी परंपरा के अनुसार पारण करके तोड़ा जाता है।
शारदीय नवरात्रि का पारण कब है? +
नवरात्रि व्रत का पारण सामान्यतः नवमी तिथि की पूजा पूर्ण होने के बाद किया जाता है।
नवरात्रि के 9 दिन 9 देवी कौन हैं? +
शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री।
नौ देवियों के नौ रंग कौन से हैं? +
नवरात्रि के नौ दिनों के रंग पीला, हरा, ग्रे, नारंगी, सफेद, लाल, नीला, गुलाबी और बैंगनी माने जाते हैं।
नौ देवियों में से सबसे बड़ी देवी कौन सी है? +
नौ दुर्गाओं में किसी एक देवी को “सबसे बड़ी” नहीं माना जाता। सभी नौ रूप मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप हैं।







