Vyas Astrology
✨ Ahoi Ashtami 2026

अहोई अष्टमी 2026 (Ahoi Ashtami 2026): तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

01 नवम्बर 2026, रविवार
लेखक: Pt. Jitendra Vyas · अपडेटेड: 29 अक्टूबर 2026
अहोई अष्टमी 2026
तारीख
01 नव. 2026
तिथि
कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष की अष्टमी
शुभ मुहूर्त
शाम 5:36 बजे से - शाम 6:54 बजे तक

अहोई अष्टमी 2026 कब है?

अहोई अष्टमी 2026 में 1 नवम्बर, रविवार को है। तिथि: कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष की अष्टमी। शुभ मुहूर्त: शाम 5:36 बजे से शाम 6:54 बजे तक।

Ahoi Ashtami 2026 kab hai: 1 November 2026 (Sunday).

1 नवम्बर 2026 का पूरा पंचांग देखें →

अहोई अष्टमी 2026 का महत्व

अहोई अष्टमी 2026: तारीख, तिथि और शुभ मुहूर्त
● अष्टमी तिथि प्रारंभ: 1 नवंबर 2026 को दोपहर 2:51 बजे
● अष्टमी तिथि समाप्त: 2 नवंबर 2026 को दोपहर 1:10 बजे
● पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:36 बजे से शाम 6:54 बजे तक
● तारों को देखने का समय: लगभग शाम 6 बजे

अहोई अष्टमी का व्रत क्यों रखा जाता है?
अहोई अष्टमी का व्रत संतान की सुख-समृद्धि और उसके मंगलमय जीवन की कामना से जुड़ा है। उत्तर भारत में यह पर्व विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन माताएं अहोई माता की पूजा करती हैं और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं।

● संतान की लंबी आयु: धार्मिक मान्यता के अनुसार, माताएं अपनी संतान के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं।
● सुख-समृद्धि की कामना: अहोई माता की पूजा परिवार में सुख, शांति और खुशहाली की प्रार्थना के लिए की जाती है।
● मातृत्व और प्रेम का प्रतीक: यह व्रत मां और संतान के बीच प्रेम, ममता और भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है।
● व्रत और संयम: कई परिवारों में माताएं दिनभर उपवास रखती हैं और शाम को पूजा के बाद तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं।
● अहोई माता की आराधना: पूजा में अहोई माता का चित्र बनाया या स्थापित किया जाता है। कुछ परंपराओं में साही और उसके बच्चों का चित्र भी बनाया जाता है।
● पारिवारिक परंपरा: व्रत कथा सुनना, पूजा की थाली सजाना और संतान के लिए प्रार्थना करना इस पर्व की प्रमुख परंपराएं हैं।
● दान-पुण्य का महत्व: कुछ परिवार इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करते हैं।
● सांस्कृतिक विरासत: अहोई अष्टमी की पूजा और कथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही पारिवारिक तथा लोक परंपराओं का हिस्सा हैं।

अहोई अष्टमी का मुख्य संदेश संतान के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी और परिवार के कल्याण की कामना करना है।

अहोई अष्टमी 2026 पूजा विधि

1 अहोई अष्टमी के दिन पूजा की तैयारी सुबह से की जाती है। शाम को शुभ मुहूर्त में अहोई माता की पूजा और व्रत कथा का पाठ किया जाता है।
2 सुबह स्नान और संकल्प: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार संतान की खुशहाली के लिए व्रत का संकल्प लें।
3 पूजा स्थल तैयार करें: घर के पूजा स्थान को साफ करें। दीवार पर गेरू से अहोई माता का चित्र बनाएं या उनकी तस्वीर स्थापित करें। परंपरा के अनुसार साही और उसके बच्चों का चित्र भी बनाया जा सकता है।
4 पूजा सामग्री रखें: पूजा की थाली में रोली, अक्षत, फूल, दीपक, जल, मिठाई और अन्य आवश्यक सामग्री रखें। अपनी परंपरा के अनुसार करवा या जल से भरा पात्र भी रख सकती हैं।
5 अहोई माता की पूजा करें: शुभ मुहूर्त में दीपक जलाएं और अहोई माता को रोली, अक्षत तथा पुष्प अर्पित करें। संतान के स्वास्थ्य, सुख और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना करें।
6 व्रत कथा सुनें: अहोई अष्टमी की पारंपरिक कथा पढ़ें या परिवार के किसी सदस्य से सुनें। इसके बाद माता की आरती करें।
7 तारों को अर्घ्य दें: शाम को तारे दिखाई देने पर अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार जल अर्पित करें। कुछ परिवारों में चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा भी है।
8 व्रत का पारण करें: पूजा और अर्घ्य के बाद अपनी परंपरा के अनुसार व्रत खोलें। परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें।
9 ध्यान दें: व्रत रखने की विधि परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी वाले लोगों को निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

अहोई अष्टमी की व्रत कथा

अहोई अष्टमी से जुड़ी एक प्रसिद्ध लोककथा एक साहूकार की पत्नी और उसके सात बेटों के बारे में है।
कथा के अनुसार, एक बार साहूकार की पत्नी घर की मरम्मत के लिए मिट्टी लेने जंगल गई। मिट्टी खोदते समय अनजाने में उसकी कुदाल से साही के एक बच्चे को चोट लग गई, जिससे उसकी मृत्यु हो गई।
इस घटना से साही बहुत दुखी हुई। लोककथा के अनुसार, उसने साहूकार की पत्नी को श्राप दिया, जिसके कारण उसके सातों बेटों की मृत्यु हो गई। अपने बच्चों को खोने के दुख में वह स्त्री अत्यंत व्याकुल रहने लगी।
दुखी होकर उसने अपनी पीड़ा अन्य महिलाओं को बताई। महिलाओं ने उसे अहोई माता की पूजा करने और अपनी भूल के लिए प्रार्थना करने की सलाह दी।
इसके बाद साहूकार की पत्नी ने श्रद्धापूर्वक अहोई माता का व्रत रखा और उनकी आराधना की। लोकमान्यता के अनुसार, उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता ने उस पर कृपा की और उसके परिवार में फिर से खुशियां लौट आईं।
तभी से माताएं संतान के कल्याण की कामना से अहोई अष्टमी का व्रत रखने लगीं। इस दिन अहोई माता के साथ साही और उसके बच्चों का चित्र बनाने की परंपरा भी इसी कथा से जुड़ी मानी जाती है।

अहोई अष्टमी 2026: राशि अनुसार प्रभाव

अहोई अष्टमी संतान की खुशहाली और पारिवारिक सुख की कामना से जुड़ा पर्व है। सभी राशियों की माताएं श्रद्धापूर्वक पूजा कर सकती हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन राशियों के जातक इस दिन परिवार और संतान के कल्याण के लिए विशेष प्रार्थना कर सकते हैं।
- कर्क राशि: परिवार में भावनात्मक जुड़ाव और सुख-शांति बनाए रखने की कामना करें।
- सिंह राशि: संतान के आत्मविश्वास, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना करें।
- कन्या राशि: संतान के स्वास्थ्य, अनुशासन और पढ़ाई में प्रगति की कामना करें।
- मीन राशि: परिवार में प्रेम, सद्भाव और संतान के सुखी जीवन के लिए अहोई माता का स्मरण करें।

अपनी राशि का मासिक राशिफल देखें

आज का दैनिक राशिफल देखें →

अहोई अष्टमी 2026 के शुभ उपाय

अहोई अष्टमी पर श्रद्धालु अपनी आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार ये कार्य कर सकते हैं:
● अहोई माता को फूल अर्पित करके संतान के अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की प्रार्थना करें।
● पूजा के समय अहोई अष्टमी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
● तारों को अर्घ्य देते समय परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
● जरूरतमंद बच्चों या परिवारों को भोजन, कपड़े, पुस्तकें अथवा उपयोगी वस्तुएं दान करें।
● संतान के साथ समय बिताएं और उसे प्रेम, सुरक्षा तथा अच्छे संस्कार देने का संकल्प लें।
परामर्श बुक करें

अहोई अष्टमी या कुंडली से जुड़े मार्गदर्शन के लिए अपना विवरण भरें।

अहोई अष्टमी 2026: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

अहोई अष्टमी 2026 कब है? +

अहोई अष्टमी का व्रत रविवार, 1 नवंबर 2026 को रखा जाएगा। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।

अहोई अष्टमी 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है? +

नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार, 1 नवंबर 2026 को पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:36 बजे से 6:54 बजे तक है।

अहोई अष्टमी पर व्रत क्यों रखा जाता है? +

धार्मिक मान्यता के अनुसार, माताएं संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना से अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं।

अहोई अष्टमी पर व्रत कब खोलना चाहिए? +

कई परिवारों में शाम को तारे दिखाई देने के बाद उन्हें अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। कुछ परिवार चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पारण करते हैं।
Pt. Jitendra Vyas
लेखक
Pt. Jitendra Vyas
Expert Vedic Astrologer & Vastu Consultant

Pt. Jitendra Vyas 1955 से चली आ रही वैदिक ज्योतिष परंपरा के वाहक और वास्तु शास्त्र के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने हज़ारों लोगों को करियर, विवाह और स्वास्थ्य जैसे जीवन के मामलों में मार्गदर्शन दिया है।

पूरा प्रोफ़ाइल देखें →

हाल के रील्स और शॉर्ट्स

सभी रील्स देखें →