✨ Dhanteras 2026
धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026): तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
06 नवम्बर 2026, शुक्रवार
लेखक:
Pt. Jitendra Vyas
· अपडेटेड: 15 अक्टूबर 2026
तारीख
06 नव. 2026
तिथि
कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी
शुभ मुहूर्त
शाम 06:02 बजे - रात 07:57 बजे
धनतेरस 2026 का महत्व
धनतेरस पूजा मुहूर्त (लक्ष्मी-कुबेर पूजा)
● मुख्य पूजा मुहूर्त: शाम 06:02 बजे से रात 07:57 बजे तक
● प्रदोष काल: शाम 05:33 बजे से रात 08:09 बजे तक
● वृषभ काल (स्थिर लग्न): शाम 06:02 बजे से रात 07:57 बजे तक
धनतेरस पर खरीदारी का शुभ मुहूर्त
● सुबह का मुहूर्त: सुबह 07:41 बजे से 09:08 बजे तक
● दोपहर का मुहूर्त: दोपहर 12:30 बजे से 02:15 बजे तक
● शाम का शुभ मुहूर्त: शाम 05:42 बजे से रात 07:38 बजे तक
धनतेरस क्यों मनाई जाती है?
धनतेरस का संबंध धन, स्वास्थ्य और समृद्धि की धार्मिक मान्यताओं से है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है, जबकि माता लक्ष्मी और कुबेर देव की आराधना सुख-समृद्धि के लिए की जाती है।
● भगवान धन्वंतरि की पूजा का महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। इसी कारण धनतेरस पर उनकी पूजा करके परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना की जाती है।
● माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा
माता लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। कुबेर देव को धन का अधिपति कहा जाता है। धनतेरस पर इनकी पूजा करके परिवार की आर्थिक स्थिरता, सुख और खुशहाली की कामना की जाती है।
धनतेरस पर खरीदारी क्यों करते हैं?
इस दिन सोना, चांदी, बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुएँ खरीदना शुभ माना जाता है। हालाँकि, खरीदारी करना अनिवार्य नहीं है। अपनी जरूरत और बजट के अनुसार कोई उपयोगी वस्तु खरीदकर भी इस परंपरा को निभाया जा सकता है।
● धनतेरस पर दीपदान का महत्व
धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जलाए जाते हैं। कई परिवारों में यम दीपदान भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह दीपदान परिवार के सदस्यों की मंगलकामना और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना का प्रतीक है।
● मुख्य पूजा मुहूर्त: शाम 06:02 बजे से रात 07:57 बजे तक
● प्रदोष काल: शाम 05:33 बजे से रात 08:09 बजे तक
● वृषभ काल (स्थिर लग्न): शाम 06:02 बजे से रात 07:57 बजे तक
धनतेरस पर खरीदारी का शुभ मुहूर्त
● सुबह का मुहूर्त: सुबह 07:41 बजे से 09:08 बजे तक
● दोपहर का मुहूर्त: दोपहर 12:30 बजे से 02:15 बजे तक
● शाम का शुभ मुहूर्त: शाम 05:42 बजे से रात 07:38 बजे तक
धनतेरस क्यों मनाई जाती है?
धनतेरस का संबंध धन, स्वास्थ्य और समृद्धि की धार्मिक मान्यताओं से है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है, जबकि माता लक्ष्मी और कुबेर देव की आराधना सुख-समृद्धि के लिए की जाती है।
● भगवान धन्वंतरि की पूजा का महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। इसी कारण धनतेरस पर उनकी पूजा करके परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना की जाती है।
● माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा
माता लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। कुबेर देव को धन का अधिपति कहा जाता है। धनतेरस पर इनकी पूजा करके परिवार की आर्थिक स्थिरता, सुख और खुशहाली की कामना की जाती है।
धनतेरस पर खरीदारी क्यों करते हैं?
इस दिन सोना, चांदी, बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुएँ खरीदना शुभ माना जाता है। हालाँकि, खरीदारी करना अनिवार्य नहीं है। अपनी जरूरत और बजट के अनुसार कोई उपयोगी वस्तु खरीदकर भी इस परंपरा को निभाया जा सकता है।
● धनतेरस पर दीपदान का महत्व
धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जलाए जाते हैं। कई परिवारों में यम दीपदान भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह दीपदान परिवार के सदस्यों की मंगलकामना और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना का प्रतीक है।
धनतेरस 2026 पूजा विधि
1
धनतेरस पर घर में सरल तरीके से पूजा की जा सकती है। पूजा करते समय स्वच्छता, श्रद्धा और अपनी पारिवारिक परंपराओं का ध्यान रखें।
2
घर और पूजा स्थल की सफाई करें: पूजा की जगह को साफ करके वहाँ चौकी या स्वच्छ कपड़ा बिछाएँ।
3
देवी-देवताओं की स्थापना करें: भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की तस्वीर या प्रतिमा पूजा स्थल पर रखें।
4
दीपक जलाकर पूजा शुरू करें: सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें और पूजा निर्विघ्न संपन्न होने की प्रार्थना करें।
5
भगवान धन्वंतरि की पूजा करें: उन्हें फूल, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें। परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और आरोग्य की कामना करें।
6
माता लक्ष्मी और कुबेर देव का पूजन करें: रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें। परिवार में सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिरता की प्रार्थना करें।
7
खरीदी गई वस्तुओं की पूजा करें: यदि आपने सोना, चांदी, बर्तन या कोई उपयोगी वस्तु खरीदी है, तो पारिवारिक परंपरा के अनुसार उसे पूजा में शामिल करें।
8
यम दीपदान करें: यदि आपके परिवार में यम दीपदान की परंपरा है, तो शाम के समय उसे विधि के अनुसार निभाएँ।
9
आरती और प्रसाद वितरण करें: पूजा के अंत में आरती करें, प्रसाद अर्पित करें और परिवार के सदस्यों में बाँटें।
धनतेरस की व्रत कथा
भगवान धन्वंतरि और अमृत कलश की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया था। इस मंथन के दौरान अनेक दिव्य वस्तुएँ प्रकट हुईं। उन्हीं में भगवान धन्वंतरि भी अमृत कलश लेकर प्रकट हुए।
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। इसी मान्यता के कारण धनतेरस पर उनकी पूजा की जाती है और अच्छे स्वास्थ्य तथा दीर्घायु की कामना की जाती है।
राजा हेम के पुत्र और यम दीपदान की कथा
यह कथा राजा हेम के पुत्र से जुड़ी है। ज्योतिषीय भविष्यवाणी के अनुसार, राजकुमार की मृत्यु विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से होने की आशंका थी। यह जानकर उनकी पत्नी ने उस रात अपने पति को सोने नहीं दिया। उसने घर के प्रवेश द्वार पर सोने-चांदी के आभूषणों का ढेर लगाया और चारों ओर दीपक जलाकर राजकुमार को जगाए रखा।
कथा के अनुसार, जब यमराज सर्प के रूप में वहाँ पहुँचे, तो दीपकों की रोशनी और आभूषणों की चमक से उनका ध्यान भटक गया। वे राजकुमार के प्राण लिए बिना लौट गए। मान्यता है कि इसी कथा से धनतेरस पर यम दीपदान करने की परंपरा जुड़ी है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया था। इस मंथन के दौरान अनेक दिव्य वस्तुएँ प्रकट हुईं। उन्हीं में भगवान धन्वंतरि भी अमृत कलश लेकर प्रकट हुए।
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। इसी मान्यता के कारण धनतेरस पर उनकी पूजा की जाती है और अच्छे स्वास्थ्य तथा दीर्घायु की कामना की जाती है।
राजा हेम के पुत्र और यम दीपदान की कथा
यह कथा राजा हेम के पुत्र से जुड़ी है। ज्योतिषीय भविष्यवाणी के अनुसार, राजकुमार की मृत्यु विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से होने की आशंका थी। यह जानकर उनकी पत्नी ने उस रात अपने पति को सोने नहीं दिया। उसने घर के प्रवेश द्वार पर सोने-चांदी के आभूषणों का ढेर लगाया और चारों ओर दीपक जलाकर राजकुमार को जगाए रखा।
कथा के अनुसार, जब यमराज सर्प के रूप में वहाँ पहुँचे, तो दीपकों की रोशनी और आभूषणों की चमक से उनका ध्यान भटक गया। वे राजकुमार के प्राण लिए बिना लौट गए। मान्यता है कि इसी कथा से धनतेरस पर यम दीपदान करने की परंपरा जुड़ी है।
धनतेरस 2026: राशि अनुसार प्रभाव
धनतेरस पर सभी राशियों के लोग अपनी आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जरूरतों के अनुसार ये संकल्प ले सकते हैं:
● मेष राशि: अनावश्यक खर्चों की समीक्षा करें और बचत के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय करें।
● वृषभ राशि: खरीदारी से पहले बजट बनाएँ और जरूरत की वस्तुओं को प्राथमिकता दें।
● कन्या राशि: परिवार के खर्चों और बचत का हिसाब व्यवस्थित करने पर ध्यान दें।
● तुला राशि: त्योहार के खर्चों और नियमित जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखें।
● मकर राशि: भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों के लिए नियमित बचत की योजना बनाएँ।
● मेष राशि: अनावश्यक खर्चों की समीक्षा करें और बचत के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय करें।
● वृषभ राशि: खरीदारी से पहले बजट बनाएँ और जरूरत की वस्तुओं को प्राथमिकता दें।
● कन्या राशि: परिवार के खर्चों और बचत का हिसाब व्यवस्थित करने पर ध्यान दें।
● तुला राशि: त्योहार के खर्चों और नियमित जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखें।
● मकर राशि: भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों के लिए नियमित बचत की योजना बनाएँ।
अपनी राशि का मासिक राशिफल देखें
आज का दैनिक राशिफल देखें →धनतेरस 2026 के शुभ उपाय
धनतेरस पर अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार ये उपाय किए जा सकते हैं:
- भगवान धन्वंतरि की पूजा करें: परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और आरोग्य की कामना करें।
- माता लक्ष्मी और कुबेर देव का स्मरण करें: धन के सदुपयोग और आर्थिक स्थिरता के लिए प्रार्थना करें।
- घर में दीपक जलाएँ: शाम को पूजा स्थल और मुख्य द्वार पर दीप जलाने की परंपरा निभाएँ।
- जरूरतमंदों की सहायता करें: अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या जरूरी सामग्री दान करें।
- बचत का संकल्प लें: अपने खर्चों की समीक्षा करें और भविष्य के लिए नियमित बचत की योजना बनाएँ।
- भगवान धन्वंतरि की पूजा करें: परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और आरोग्य की कामना करें।
- माता लक्ष्मी और कुबेर देव का स्मरण करें: धन के सदुपयोग और आर्थिक स्थिरता के लिए प्रार्थना करें।
- घर में दीपक जलाएँ: शाम को पूजा स्थल और मुख्य द्वार पर दीप जलाने की परंपरा निभाएँ।
- जरूरतमंदों की सहायता करें: अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या जरूरी सामग्री दान करें।
- बचत का संकल्प लें: अपने खर्चों की समीक्षा करें और भविष्य के लिए नियमित बचत की योजना बनाएँ।
धनतेरस 2026: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
धनतेरस 2026 में कब है? +
धनतेरस 2026 में शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाई जाएगी। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ती है।
धनतेरस 2026 पर पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? +
मुख्य पूजा मुहूर्त शाम 06:02 बजे से रात 07:57 बजे तक है।
धनतेरस पर किन देवी-देवताओं की पूजा की जाती है? +
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा की जाती है। भगवान धन्वंतरि से स्वास्थ्य और माता लक्ष्मी तथा कुबेर देव से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है? +
धनतेरस पर सोना, चांदी, बर्तन और घर की जरूरत की उपयोगी वस्तुएँ खरीदना शुभ माना जाता है।







