✨ Chhath Puja 2026
छठ पूजा 2026 (Chhath Puja 2026): तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
15 नवम्बर 2026, रविवार
लेखक:
Pt. Jitendra Vyas
· अपडेटेड: 21 अक्टूबर 2026
तारीख
15 नव. 2026
तिथि
कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष की षष्ठी
शुभ मुहूर्त
14 नवंबर 2026, शनिवार, रात 11:24 बजे - 16 नवंबर 2026, सोमवार, रात 02:01 बजे
छठ पूजा 2026 का महत्व
Muhurat -
नहाय-खाय: 13 नवंबर 2026, शुक्रवार
खरना: 14 नवंबर 2026, शनिवार
संध्या अर्घ्य: 15 नवंबर 2026, रविवार
उषा अर्घ्य और पारण: 16 नवंबर 2026, सोमवार
छठ पूजा का त्योहार क्यों मनाया जाता है?
छठ पूजा भारतीय संस्कृति के सबसे अनुशासित और आस्था से जुड़े लोकपर्वों में से एक है। इस पर्व में भगवान सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा की जाती है। सूर्य को जीवन, ऊर्जा, प्रकाश और प्रकृति के पोषण का स्रोत माना जाता है। वहीं छठी मैया को संतान की रक्षा और परिवार के कल्याण से जोड़कर देखा जाता है। छठ महापर्व का धार्मिक महत्व कई परंपराओं में देखने को मिलता है:
● सूर्यदेव की उपासना: श्रद्धालु भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर अच्छे स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की कामना करते हैं।
● छठी मैया की आराधना: मान्यता है कि छठी मैया की पूजा करने से संतान के सुख और परिवार की खुशहाली के लिए आशीर्वाद प्राप्त होता है।
● संतान की मंगलकामना: कई व्रती अपनी संतान की लंबी आयु, उन्नति और अच्छे भविष्य के लिए यह व्रत रखते हैं।
● प्रकृति के प्रति आभार: इस पर्व में सूर्य, जल, फल और अनाज का विशेष महत्व है। यह प्रकृति से मिलने वाले संसाधनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है।
● शुद्धता और अनुशासन: छठ पूजा में साफ-सफाई, सात्विक भोजन और नियमों का पालन किया जाता है।
● अस्त और उदय होते सूर्य को अर्घ्य: छठ की विशेष परंपरा है कि डूबते और उगते, दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
● पारिवारिक एकता: परिवार और समुदाय के लोग मिलकर घाटों की सफाई, पूजा की तैयारी और प्रसाद बनाने में सहयोग करते हैं।
● लोकसंस्कृति का संरक्षण: छठ के पारंपरिक गीत, ठेकुआ, सूप और बांस की टोकरी जैसी परंपराएं भारतीय लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखती हैं।
नहाय-खाय: 13 नवंबर 2026, शुक्रवार
खरना: 14 नवंबर 2026, शनिवार
संध्या अर्घ्य: 15 नवंबर 2026, रविवार
उषा अर्घ्य और पारण: 16 नवंबर 2026, सोमवार
छठ पूजा का त्योहार क्यों मनाया जाता है?
छठ पूजा भारतीय संस्कृति के सबसे अनुशासित और आस्था से जुड़े लोकपर्वों में से एक है। इस पर्व में भगवान सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा की जाती है। सूर्य को जीवन, ऊर्जा, प्रकाश और प्रकृति के पोषण का स्रोत माना जाता है। वहीं छठी मैया को संतान की रक्षा और परिवार के कल्याण से जोड़कर देखा जाता है। छठ महापर्व का धार्मिक महत्व कई परंपराओं में देखने को मिलता है:
● सूर्यदेव की उपासना: श्रद्धालु भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर अच्छे स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की कामना करते हैं।
● छठी मैया की आराधना: मान्यता है कि छठी मैया की पूजा करने से संतान के सुख और परिवार की खुशहाली के लिए आशीर्वाद प्राप्त होता है।
● संतान की मंगलकामना: कई व्रती अपनी संतान की लंबी आयु, उन्नति और अच्छे भविष्य के लिए यह व्रत रखते हैं।
● प्रकृति के प्रति आभार: इस पर्व में सूर्य, जल, फल और अनाज का विशेष महत्व है। यह प्रकृति से मिलने वाले संसाधनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है।
● शुद्धता और अनुशासन: छठ पूजा में साफ-सफाई, सात्विक भोजन और नियमों का पालन किया जाता है।
● अस्त और उदय होते सूर्य को अर्घ्य: छठ की विशेष परंपरा है कि डूबते और उगते, दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
● पारिवारिक एकता: परिवार और समुदाय के लोग मिलकर घाटों की सफाई, पूजा की तैयारी और प्रसाद बनाने में सहयोग करते हैं।
● लोकसंस्कृति का संरक्षण: छठ के पारंपरिक गीत, ठेकुआ, सूप और बांस की टोकरी जैसी परंपराएं भारतीय लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखती हैं।
छठ पूजा 2026 पूजा विधि
1
छठ पूजा 2026 की पूजा विधि: चारों दिनों में क्या करें?
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छठ पूजा चार दिनों तक चलती है और प्रत्येक दिन का अपना विशेष महत्व होता है। पूजा की विधि परिवार और क्षेत्र की परंपराओं के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है।
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पहला दिन: नहाय-खाय - 13 नवंबर 2026, शुक्रवार
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व्रती सुबह स्नान करके घर और रसोई की अच्छी तरह सफाई करते हैं।
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कई परंपराओं में गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान किया जाता है। ऐसा संभव न हो तो घर पर स्नान करके पूजा की तैयारी की जाती है।
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इस दिन सात्विक भोजन बनाया जाता है। पारंपरिक रूप से लौकी की सब्जी, चने की दाल और चावल जैसे व्यंजन खाए जाते हैं।
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भोजन की शुद्धता और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है।
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दूसरा दिन: खरना - 14 नवंबर 2026, शनिवार
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व्रती दिनभर उपवास रखते हैं और परंपरा के अनुसार सूर्यास्त के बाद खरना का प्रसाद तैयार करते हैं।
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गुड़ की खीर, रोटी और अन्य पारंपरिक प्रसाद बनाया जाता है।
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भगवान सूर्यदेव और छठी मैया का स्मरण करके प्रसाद अर्पित किया जाता है।
12
पूजा के बाद व्रती प्रसाद ग्रहण करते हैं और फिर निर्जला व्रत शुरू करते हैं, जो अगले दिन संध्या अर्घ्य और उसके बाद उषा अर्घ्य तक चलता है।
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तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य - 15 नवंबर 2026, रविवार
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सुबह से ही छठ पूजा के प्रसाद की तैयारी की जाती है। इसमें ठेकुआ, फल और अन्य पारंपरिक सामग्री शामिल होती है।
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प्रसाद को साफ सूप या टोकरी में सजाया जाता है।
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शाम को व्रती परिवार के सदस्यों के साथ नदी, तालाब या निर्धारित घाट पर जाते हैं।
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डूबते सूर्य को जल और दूध से अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाती है। दूध का प्रयोग स्थानीय रीति के अनुसार किया जाता है।
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सूर्यदेव और छठी मैया की आराधना करके परिवार के सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की जाती है।
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चौथा दिन: उषा अर्घ्य और पारण - 16 नवंबर 2026, सोमवार
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व्रती सुबह सूर्योदय से पहले घाट पर पहुंचते हैं।
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उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और छठी मैया की पूजा की जाती है।
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परिवार की खुशहाली, संतान के कल्याण और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की जाती है।
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पूजा पूरी होने के बाद परंपरा के अनुसार व्रत का पारण किया जाता है।
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प्रसाद परिवार, रिश्तेदारों और अन्य श्रद्धालुओं में बांटा जाता है।
छठ पूजा की व्रत कथा
छठ पूजा से जुड़ी कई लोककथाएं प्रचलित हैं। इनमें सूर्यदेव की उपासना, छठी मैया की कृपा और संतान के कल्याण की मान्यताएं प्रमुख हैं।
एक प्रचलित धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्राचीन समय में राजा प्रियव्रत और उनकी पत्नी संतान न होने के कारण दुखी रहते थे। उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए धार्मिक अनुष्ठान किए। मान्यता है कि उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई, लेकिन वह मृत पैदा हुआ।
राजा और रानी शोक में डूब गए। तभी देवी षष्ठी प्रकट हुईं, जिन्हें कई परंपराओं में छठी मैया के रूप में पूजा जाता है। देवी ने राजा को अपनी उपासना करने और श्रद्धा रखने का संदेश दिया।
कथा के अनुसार, देवी की कृपा से राजा के घर खुशियां लौटीं। इसके बाद संतान के सुख और परिवार के कल्याण के लिए देवी षष्ठी की पूजा की परंपरा प्रचलित हुई।
इसी धार्मिक विश्वास के कारण छठ पूजा में छठी मैया की विशेष आराधना की जाती है। व्रती संतान की खुशहाली, परिवार की समृद्धि और जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं।
छठ पर्व में सूर्यदेव की उपासना भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सूर्य को जीवन और ऊर्जा का आधार माना जाता है, इसलिए उन्हें अर्घ्य देकर प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है।
यह कथा धार्मिक और लोकमान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों में छठ पूजा से जुड़ी अन्य कथाएं भी सुनाई जाती हैं।
एक प्रचलित धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्राचीन समय में राजा प्रियव्रत और उनकी पत्नी संतान न होने के कारण दुखी रहते थे। उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए धार्मिक अनुष्ठान किए। मान्यता है कि उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई, लेकिन वह मृत पैदा हुआ।
राजा और रानी शोक में डूब गए। तभी देवी षष्ठी प्रकट हुईं, जिन्हें कई परंपराओं में छठी मैया के रूप में पूजा जाता है। देवी ने राजा को अपनी उपासना करने और श्रद्धा रखने का संदेश दिया।
कथा के अनुसार, देवी की कृपा से राजा के घर खुशियां लौटीं। इसके बाद संतान के सुख और परिवार के कल्याण के लिए देवी षष्ठी की पूजा की परंपरा प्रचलित हुई।
इसी धार्मिक विश्वास के कारण छठ पूजा में छठी मैया की विशेष आराधना की जाती है। व्रती संतान की खुशहाली, परिवार की समृद्धि और जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं।
छठ पर्व में सूर्यदेव की उपासना भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सूर्य को जीवन और ऊर्जा का आधार माना जाता है, इसलिए उन्हें अर्घ्य देकर प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है।
यह कथा धार्मिक और लोकमान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों में छठ पूजा से जुड़ी अन्य कथाएं भी सुनाई जाती हैं।
छठ पूजा 2026: राशि अनुसार प्रभाव
छठ पूजा मुख्य रूप से भगवान सूर्यदेव और छठी मैया की आराधना का पर्व है। सूर्य से जुड़ी इन राशियों के जातक इस अवसर पर विशेष रूप से सूर्यदेव का स्मरण कर सकते हैं:
● मेष राशि: आत्मविश्वास, ऊर्जा और कार्यों में सफलता के लिए सूर्यदेव से प्रार्थना करें।
● सिंह राशि: सूर्य को सिंह राशि का स्वामी माना जाता है। इस दिन सूर्यदेव की उपासना और सेवा का संकल्प विशेष महत्व रख सकता है।
● धनु राशि: जीवन में सही दिशा, विवेक और सकारात्मक सोच के लिए प्रार्थना करें।
● मकर राशि: अनुशासन, धैर्य और कार्यों में निरंतरता बनाए रखने का संकल्प लें।
● मेष राशि: आत्मविश्वास, ऊर्जा और कार्यों में सफलता के लिए सूर्यदेव से प्रार्थना करें।
● सिंह राशि: सूर्य को सिंह राशि का स्वामी माना जाता है। इस दिन सूर्यदेव की उपासना और सेवा का संकल्प विशेष महत्व रख सकता है।
● धनु राशि: जीवन में सही दिशा, विवेक और सकारात्मक सोच के लिए प्रार्थना करें।
● मकर राशि: अनुशासन, धैर्य और कार्यों में निरंतरता बनाए रखने का संकल्प लें।
अपनी राशि का मासिक राशिफल देखें
आज का दैनिक राशिफल देखें →छठ पूजा 2026 के शुभ उपाय
छठ महापर्व पर अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार ये कार्य किए जा सकते हैं:
● सूर्यदेव को अर्घ्य देकर परिवार के स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की प्रार्थना करें।
● छठी मैया का स्मरण करें और संतान के कल्याण की कामना करें।
● जरूरतमंदों को फल, अनाज या भोजन दान करें।
● पूजा के घाट और आसपास की जगहों को साफ रखने में सहयोग करें।
● फल, अनाज और जल की बर्बादी न करें तथा प्रकृति के संरक्षण का संकल्प लें।
● सूर्यदेव को अर्घ्य देकर परिवार के स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की प्रार्थना करें।
● छठी मैया का स्मरण करें और संतान के कल्याण की कामना करें।
● जरूरतमंदों को फल, अनाज या भोजन दान करें।
● पूजा के घाट और आसपास की जगहों को साफ रखने में सहयोग करें।
● फल, अनाज और जल की बर्बादी न करें तथा प्रकृति के संरक्षण का संकल्प लें।
छठ पूजा 2026: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
छठ पूजा 2026 कब है? +
छठ पूजा 2026 का मुख्य पर्व रविवार, 15 नवंबर को मनाया जाएगा। चार दिवसीय छठ महापर्व 13 नवंबर को नहाय-खाय से शुरू होकर 16 नवंबर को उषा अर्घ्य और पारण के साथ पूरा होगा।
छठ पूजा में संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य कब दिया जाएगा? +
संध्या अर्घ्य 15 नवंबर 2026 को डूबते सूर्य को दिया जाएगा। उषा अर्घ्य 16 नवंबर को उगते सूर्य को दिया जाएगा।
छठ पूजा में कौन-कौन से प्रसाद बनाए जाते हैं? +
छठ पूजा में ठेकुआ, गुड़ की खीर, फल, गन्ना और अन्य पारंपरिक प्रसाद चढ़ाए जाते हैं।
छठ पूजा में डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य क्यों दिया जाता है? +
डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है, जबकि उगते सूर्य को अर्घ्य देकर नई ऊर्जा, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की जाती है। दोनों अर्घ्य छठ पूजा के प्रमुख अनुष्ठान हैं।







