Sawan 2026: सावन 2026 कब से शुरू होगा और कब समाप्त होगा? जानें सावन सोमवार 2026 की सभी तिथियां, श्रावण मास का महत्व, पूजा विधि, व्रत के नियम, क्या करें और क्या न करें।
Sawan 2026: भोलेनाथ की भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का सबसे पवित्र महीना हिंदू धर्म में सावन (श्रावण) का महीना केवल एक धार्मिक मास नहीं, बल्कि आस्था, तप, संयम, सेवा और शिव भक्ति का महापर्व माना जाता है। सावन के महीने को श्रावण मास भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस पूरे महीने भगवान शिव की सच्चे मन से आराधना करने वाले भक्तों पर भोलेनाथ विशेष कृपा बरसाते हैं। यही कारण है कि सावन आते ही देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है, कांवड़ यात्रा शुरू होती है और हर ओर "हर हर महादेव" का जयघोष सुनाई देता है।
यदि आप भी जानना चाहते हैं कि सावन 2026 कब से शुरू होगा, कब समाप्त होगा, कितने सावन सोमवार पड़ेंगे, पूजा कैसे करें, शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं, क्या करें और क्या न करें, तो यहां आपको सभी महत्वपूर्ण जानकारी एक ही जगह मिलेगी।
सावन महीना क्या होता है?
सावन (श्रावण) हिंदू पंचांग का पाँचवाँ महीना माना जाता है, जो वर्षा ऋतु के दौरान आता है। यह महीना भगवान शिव की आराधना, व्रत, पूजा, तप, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान देशभर के शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा निकालकर पवित्र नदियों का जल भगवान शिव को अर्पित करते हैं।
सावन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि प्रकृति और आध्यात्मिक चेतना का भी प्रतीक माना जाता है। चारों ओर हरियाली, वर्षा और शुद्ध वातावरण मन को सकारात्मक ऊर्जा से भर देते हैं। यही कारण है कि इस पूरे महीने को भक्ति, संयम और आत्मचिंतन का श्रेष्ठ समय माना गया है।
सावन 2026 कब से कब तक रहेगा?
उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार सावन 30 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक रहेगा। इस पूरे महीने शिव भक्त व्रत रखते हैं, भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
वहीं महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और दक्षिण भारत के कई राज्यों में अमांत पंचांग का पालन किया जाता है। इसलिए वहां श्रावण मास की शुरुआत और समाप्ति की तिथियां अलग हो सकती हैं। हालांकि, भगवान शिव की पूजा का महत्व और धार्मिक भाव समान रहता है।
सावन भगवान शिव को क्यों समर्पित है?
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होने के पीछे कई पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं, जिनमें सबसे प्रसिद्ध कथा समुद्र मंथन की है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया, तब सबसे पहले हलाहल नामक विष निकला। यह विष इतना प्रचंड था कि उससे पूरी सृष्टि के नष्ट होने का खतरा उत्पन्न हो गया। संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया, जिसके कारण उनका कंठ नीला पड़ गया और उन्हें नीलकंठ कहा जाने लगा।
विष के प्रभाव से भगवान शिव के शरीर में उत्पन्न हुई तीव्र गर्मी को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर निरंतर जल अर्पित किया। इसी घटना के आधार पर सावन में शिवलिंग पर जल, गंगाजल और दूध से अभिषेक करने की परंपरा प्रचलित हुई। आज भी श्रद्धालु इसी आस्था के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
एक अन्य धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कई वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या सफल होने के बाद भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसलिए सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन, प्रेम, समर्पण और अखंड सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। यही कारण है कि इस महीने में विवाहित महिलाएं सुखी दांपत्य जीवन और अविवाहित युवक-युवतियां योग्य जीवनसाथी की कामना से व्रत और पूजा करती हैं।
सावन में भगवान शिव की पूजा करने से क्या लाभ मिलते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान शिव की पूजा करने से अनेक शुभ फल प्राप्त होते हैं:
● भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
● अविवाहित युवक-युवतियों को योग्य जीवनसाथी मिलने की मान्यता है।
● वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और मधुरता बढ़ती है।
● परिवार में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
● मानसिक तनाव कम होकर मन को शांति मिलती है।
● आध्यात्मिक उन्नति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
● जीवन की बाधाओं को दूर करने और मनोकामना पूर्ति के लिए यह महीना अत्यंत शुभ माना जाता है।
सावन 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहार
सावन का महीना केवल भगवान शिव की पूजा तक सीमित नहीं है। इस पूरे माह में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार आते हैं, जिनका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बेहद खास माना जाता है। शिव भक्त इन तिथियों पर विशेष पूजा, व्रत, रुद्राभिषेक और दान-पुण्य करते हैं।
सावन 2026 के व्रत और त्योहारों की लिस्ट
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पर्व / व्रत |
तिथि 2026 |
महत्व |
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सावन प्रारंभ |
30 जुलाई, गुरुवार |
भगवान शिव की विशेष पूजा का आरंभ |
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पहला सावन सोमवार |
3 अगस्त, सोमवार |
शिव कृपा प्राप्त करने के लिए पहला सोमवारी व्रत |
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दूसरा सावन सोमवार |
10 अगस्त, सोमवार |
रुद्राभिषेक और सोम प्रदोष का विशेष संयोग |
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श्रावण शिवरात्रि |
11 अगस्त, मंगलवार |
भगवान शिव की विशेष रात्रि पूजा |
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हरियाली अमावस्या |
12 अगस्त, बुधवार |
दान-पुण्य और पितरों के निमित्त शुभ दिन |
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हरियाली तीज़ |
15 अगस्त, शनिवार |
माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा |
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नाग पंचमी |
17 अगस्त, सोमवार |
नाग देवता और भगवान शिव की आराधना |
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तीसरा सावन सोमवार |
17 अगस्त, सोमवार |
सोमवारी व्रत का विशेष महत्व |
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पुत्रदा एकादशी |
23 अगस्त, रविवार |
संतान सुख और परिवार की मंगलकामना |
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चौथा सावन सोमवार |
24 अगस्त, सोमवार |
सावन का अंतिम सोमवार व्रत |
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रक्षाबंधन / श्रावण पूर्णिमा |
28 अगस्त, शुक्रवार |
सावन मास का समापन |
सावन 2026 में कितने सोमवार पड़ेंगे?
सावन 2026 में कुल 4 सावन सोमवार पड़ेंगे। हिंदू धर्म में सावन सोमवार का व्रत भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने तथा शिवलिंग का जलाभिषेक करने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
सावन सोमवार 2026 की तिथियां:
● पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026
● दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026
● तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026
● चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026
सावन सोमवार का महत्व
सोमवार को भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है। जब यह दिन सावन के पवित्र महीने में आता है, तो इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए सावन सोमवार का व्रत और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार को श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान शिव की पूजा करने से-
● भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
● मनोकामनाओं की पूर्ति होने की मान्यता है।
● अविवाहित लोगों को योग्य जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद मिलता है।
● वैवाहिक जीवन में प्रेम, सुख और सामंजस्य बढ़ता है।
● परिवार में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
● मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
इसी कारण सावन के प्रत्येक सोमवार को शिव मंदिरों में विशेष भीड़ देखने को मिलती है और भक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक तथा "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
सावन 2026 में भगवान शिव की पूजा कैसे करें?
यदि आप सावन में भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो पूजा के समय इन बातों का ध्यान रखें।
पूजा की आसान विधि:
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद स्नान करें।
- साफ और हल्के रंग के वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थान और शिवलिंग को स्वच्छ करें।
- शिवलिंग पर क्रमशः जल, गंगाजल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें।
- बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद पुष्प और चंदन अर्पित करें।
- धूप-दीप जलाकर भगवान शिव की आरती करें।
- "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
- अंत में अपनी मनोकामना व्यक्त कर भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त करें।
सावन में कौन-से मंत्र का जाप करें?
सावन के महीने में भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और एकाग्र मन से मंत्र जाप करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और मन को शांति मिलती है।
1. पंचाक्षरी मंत्र
ॐ नमः शिवाय॥
यह भगवान शिव का सबसे प्रसिद्ध मंत्र है। सावन में प्रतिदिन 108 बार इसका जाप करना शुभ माना जाता है।
2. महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं
पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
यह मंत्र स्वास्थ्य, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए जपा जाता है।
3. शिव गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय
धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
यह मंत्र भगवान शिव की कृपा और आध्यात्मिक उन्नति के लिए शुभ माना जाता है।
4. ॐ नमो भगवते रुद्राय
यह मंत्र भगवान रुद्र की आराधना के लिए जपा जाता है और सावन में इसका विशेष महत्व माना जाता है।
मंत्र जाप करते समय इन बातों का रखें ध्यान
● सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर मंत्र जाप करें।
● पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
● रुद्राक्ष की माला से 108 बार मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है।
● मंत्र जाप के बाद भगवान शिव से अपनी मनोकामना प्रार्थना करें।
सावन में शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए?
सावन में भगवान शिव को उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है।
● जल
● गंगाजल
● कच्चा दूध
● पंचामृत
● बेलपत्र
● धतूरा
● भांग
● सफेद फूल
● चंदन
● शमी के पत्ते
● अक्षत (चावल)
● मौसमी फल
इन वस्तुओं को श्रद्धा और नियमपूर्वक अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं।
सावन 2026 में क्या करें? (Do's During Sawan)
सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति, आत्मसंयम और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने कुछ विशेष नियमों का पालन करने से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।
1. प्रतिदिन भगवान शिव का जलाभिषेक करें
सावन में सुबह स्नान के बाद शिवलिंग पर जल या गंगाजल अर्पित करें। यदि संभव हो तो सोमवार के दिन दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से पंचामृत अभिषेक भी करें।
2. बेलपत्र सही विधि से अर्पित करें
भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है। बेलपत्र अर्पित करते समय ध्यान रखें कि वह साफ, ताजा और बिना कटे-फटे हो। मान्यता है कि तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाना विशेष शुभ माना जाता है।
3. "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें
सावन में प्रतिदिन कम से कम 108 बार "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इससे मन शांत रहता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
4. सोमवार का व्रत रखें
यदि स्वास्थ्य अनुमति देता है तो सावन सोमवार का व्रत रखें। व्रत के दौरान सात्विक भोजन करें और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करें।
5. दान-पुण्य करें
सावन में जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र, फल या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना पुण्यदायी माना गया है।
6. सात्विक जीवनशैली अपनाएं
इस महीने सरल, शुद्ध और सात्विक भोजन करें। साथ ही क्रोध, अहंकार और नकारात्मक विचारों से दूर रहने का प्रयास करें।
सावन 2026 में क्या नहीं करें? (Don'ts During Sawan)
सावन में कुछ कार्यों से बचने की भी सलाह दी जाती है। इन नियमों का उद्देश्य व्यक्ति को अनुशासित, संयमी और आध्यात्मिक जीवन की ओर प्रेरित करना है।
1. मांस, मछली और शराब का सेवन न करें
सावन में सात्विक भोजन को प्राथमिकता दी जाती है। इसलिए तामसिक भोजन और नशे से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
2. झूठ, क्रोध और अपशब्दों से बचें
इस महीने वाणी और व्यवहार में मधुरता बनाए रखना शुभ माना जाता है।
3. किसी का अपमान न करें
धार्मिक मान्यता है कि सावन में सभी के प्रति सम्मान और करुणा का भाव रखना चाहिए।
4. प्रकृति को नुकसान न पहुंचाएं
सावन हरियाली और वर्षा का महीना है। इसलिए पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की रक्षा करना भी पुण्य का कार्य माना जाता है।
सावन में शिवलिंग पर क्या नहीं चढ़ाना चाहिए?
भगवान शिव की पूजा करते समय कुछ वस्तुएं अर्पित नहीं की जातीं। कई लोग अनजाने में ये गलतियां कर देते हैं।
● हल्दी
● सिंदूर
● तुलसी के पत्ते
● केतकी का फूल
● बासी या सूखे फूल
● टूटा हुआ बेलपत्र
● खराब या सड़ा हुआ फल
ध्यान रखें कि पूजा में हमेशा ताजी और स्वच्छ सामग्री का ही उपयोग करें।
महिलाओं के लिए सावन के विशेष नियम
सावन का महीना महिलाओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है। विवाहित और अविवाहित महिलाएं अपनी-अपनी मनोकामना के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं।
विवाहित महिलाओं के लिए:
● पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से सोमवार व्रत रखें।
● हरियाली तीज और मंगला गौरी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है।
● माता पार्वती और भगवान शिव की संयुक्त पूजा करें।
अविवाहित लड़कियों के लिए:
मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने से योग्य जीवनसाथी प्राप्त होने का आशीर्वाद मिलता है। इसलिए कई अविवाहित युवतियां पूरे सावन या केवल सोमवार का व्रत रखती हैं।
सावन में क्या खाना चाहिए?
सावन में हल्का और सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है। आप अपने भोजन में शामिल कर सकते हैं-
● मौसमी फल
● दूध और दही
● सूखे मेवे
● साबूदाना
● कुट्टू और सिंघाड़े का आटा (व्रत के अनुसार)
● मूंगफली
● नारियल
● ताजा हरी सब्जियां (यदि व्रत के नियम अनुमति दें)
साफ-सुथरा, ताजा और घर का बना भोजन स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभदायक माना जाता है।
क्या सावन में बाल और नाखून काट सकते हैं?
धार्मिक ग्रंथों में पूरे सावन भर बाल या नाखून काटने पर सार्वभौमिक निषेध नहीं मिलता। हालांकि, कुछ परिवारों और क्षेत्रों में परंपरा के अनुसार सोमवार या विशेष व्रत वाले दिन बाल, नाखून या दाढ़ी न बनवाने की मान्यता है। यदि आपके परिवार में ऐसी परंपरा है तो उसका सम्मान करना उचित है।
निष्कर्ष:
सावन 2026 भगवान शिव की भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक साधना का विशेष महीना है। उत्तर भारत के अनुसार यह 30 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक रहेगा। इस दौरान सावन सोमवार, श्रावण शिवरात्रि, नाग पंचमी, हरियाली तीज और रक्षाबंधन जैसे कई महत्वपूर्ण पर्व मनाए जाएंगे।
यदि आप सावन में श्रद्धा, नियम और सात्विक जीवनशैली के साथ भगवान शिव की पूजा करते हैं, तो यह महीना आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और भक्ति का सुंदर अवसर बन सकता है। धार्मिक परंपराओं का पालन करते समय अपने परिवार और स्थानीय परंपरा का भी सम्मान करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
भारत के अनुसार 30 जुलाई 2026 से श्रावण (सावन) मास शुरू होगा।
कई लोग इस महीने उड़द (काली दाल) और अधिक तामसिक या भारी भोजन से परहेज करते हैं।
शिवलिंग पर जल चढ़ाएं, बेलपत्र अर्पित करें, "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें और सात्विक भोजन करें।
यह कई परिवारों की धार्मिक परंपरा है। इसे शुभ नहीं माना जाता।
सावन 2026 में 4 सोमवार पड़ेंगे।
पूर्णिमांत और अमांत पंचांग के कारण श्रावण की तिथियां अलग होती हैं।
पहले सावन सोमवार को सफेद या हरा रंग शुभ माना जाता है।
30 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन जलाभिषेक किया जा सकता है।
पहला सावन सोमवार 3 अगस्त 2026 को है।
हाँ, सावन में दूध पी सकते हैं। ताज़ा और सीमित मात्रा में दूध का सेवन करना बेहतर माना जाता है।
सावन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को श्रावण पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा।
मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं तथा वैवाहिक और पारिवारिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, पंचामृत, बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन और सफेद फूल अर्पित किए जा सकते हैं।
शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर, तुलसी के पत्ते, केतकी का फूल, बासी फूल और टूटा हुआ बेलपत्र अर्पित नहीं करना चाहिए।
हाँ, सावन के पूरे महीने प्रतिदिन शिवलिंग पर जल या गंगाजल चढ़ाना शुभ माना जाता है।
हाँ, धार्मिक मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने से योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
हाँ, विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए सावन सोमवार का व्रत रखती हैं।
"ॐ नमः शिवाय" भगवान शिव का सबसे लोकप्रिय और शुभ मंत्र माना जाता है।
सावन में सात्विक भोजन करने और मांसाहार व नशे से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
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