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4 अगस्त 2028 का पंचांग, शुक्रवार

शुक्ल पक्ष चतुर्दशी • उत्तराषाढ़ा नक्षत्र • प्रीति योग
लेखक: Pt. Jitendra Vyas · अपडेटेड: 26 अक्टूबर 2026
4 अगस्त 2028 का पंचांग, शुक्रवार
तिथि
शुक्ल पक्ष चतुर्दशी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा
योग
प्रीति
राहु काल
सुबह 10:46 से दोपहर 12:27 तक

4 अगस्त 2028 को कौन सी तिथि है?

इस दिन (4 अगस्त 2028) शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 11:52 तक है, उसके बाद पूर्णिमा तिथि लगेगी।

4 August 2028 ko kaun si tithi hai: शुक्ल पक्ष चतुर्दशी (शुक्रवार).

4 अगस्त 2028 का पंचांग: संक्षेप में

इस दिन 4 अगस्त 2028, शुक्रवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 11:52 तक है, इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू होगी। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रात 7:27 तक रहेगा, फिर श्रवण नक्षत्र लगेगा। योग प्रीति है और पहला करण वणिज है। चंद्रमा पूरे दिन मकर राशि में रहेगा और सूर्य कर्क राशि में है। नई दिल्ली में सूर्योदय सुबह 5:44 और सूर्यास्त रात 7:09 पर होगा। राहु काल सुबह 10:46 से दोपहर 12:27 तक है, इस समय किसी नए या शुभ काम की शुरुआत न करें। दिन का सबसे शुभ समय अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 से दोपहर 12:53 तक है। भद्रा सुबह 11:52 से रात 12:44 (5 अगस्त) तक रहेगी, भद्रा में शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।

पंचांग के पांच अंग

तिथिचतुर्दशी — सुबह 11:52 तक, फिर पूर्णिमा
नक्षत्रउत्तराषाढ़ा — रात 7:27 तक, फिर श्रवण (चरण 2)
योगप्रीति — शाम 4:10 तक, फिर आयुष्मान
करणवणिज — सुबह 11:52 तक, फिर विष्टि (भद्रा) — रात 12:44 (5 अगस्त) तक, फिर बव
वारशुक्रवार
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदयसुबह 5:44
सूर्यास्तरात 7:09
चंद्रोदयशाम 6:32
चंद्रास्तसुबह 4:36
चंद्र राशिमकर
सूर्य राशिकर्क
सूर्य नक्षत्रआश्लेषा
दिनमान13 घंटे 25 मिनट

हिंदू मास और संवत

मास (पूर्णिमांत)श्रावण
मास (अमांत)श्रावण
विक्रम संवत2085
शक संवत1950
ऋतुवर्षा
दिशा शूलपश्चिम

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:19 से सुबह 5:02 तक
अभिजीत मुहूर्तदोपहर 12:00 से दोपहर 12:53 तक

अशुभ समय

राहु कालसुबह 10:46 से दोपहर 12:27 तक
यमगंडदोपहर 3:48 से शाम 5:29 तक
गुलिक कालसुबह 7:25 से सुबह 9:05 तक
भद्रासुबह 11:52 से रात 12:44 (5 अगस्त) तक

4 अगस्त 2028 का चौघड़िया

दिन का चौघड़िया
चरसुबह 5:44 – सुबह 7:25सामान्य
लाभसुबह 7:25 – सुबह 9:05शुभ
अमृतसुबह 9:05 – सुबह 10:46शुभ
कालसुबह 10:46 – दोपहर 12:27अशुभ
शुभदोपहर 12:27 – दोपहर 2:07शुभ
रोगदोपहर 2:07 – दोपहर 3:48अशुभ
उद्वेगदोपहर 3:48 – शाम 5:29अशुभ
चरशाम 5:29 – रात 7:09सामान्य
रात का चौघड़िया
रोगरात 7:09 – रात 8:29अशुभ
कालरात 8:29 – रात 9:48अशुभ
लाभरात 9:48 – रात 11:07शुभ
उद्वेगरात 11:07 – रात 12:27 (5 अगस्त)अशुभ
शुभरात 12:27 (5 अगस्त) – रात 1:46 (5 अगस्त)शुभ
अमृतरात 1:46 (5 अगस्त) – रात 3:06 (5 अगस्त)शुभ
चररात 3:06 (5 अगस्त) – सुबह 4:25 (5 अगस्त)सामान्य
रोगसुबह 4:25 (5 अगस्त) – सुबह 5:45 (5 अगस्त)अशुभ
अपनी कुंडली के अनुसार शुभ मुहूर्त जानें

पंचांग पूरे देश के लिए सामान्य समय बताता है। विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीद या नए काम की शुरुआत के लिए सही मुहूर्त आपकी कुंडली और शहर से तय होता है।

  • विवाह और गृह प्रवेश मुहूर्त
  • वाहन, संपत्ति खरीद और व्यापार आरंभ
  • नामकरण, मुंडन और अन्य संस्कार

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पंचांग क्या है और इसे कैसे पढ़ें?

पंचांग हिंदू कालगणना की वह पद्धति है जिससे किसी भी दिन का शुभ-अशुभ समय जाना जाता है। "पंचांग" का अर्थ है पांच अंग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, वाहन खरीद, यात्रा या किसी नए काम की शुरुआत से पहले इन्हीं पांच अंगों को देखकर मुहूर्त तय किया जाता है। व्रत और त्योहारों की तारीख भी पंचांग की तिथि से ही निकलती है।

पंचांग के पांच अंगों का अर्थ

  • तिथि: सूर्य और चंद्रमा के बीच हर 12 अंश की दूरी एक तिथि होती है। एक चंद्र मास में 30 तिथियां होती हैं: 15 शुक्ल पक्ष में (अमावस्या के बाद से पूर्णिमा तक) और 15 कृष्ण पक्ष में।
  • वार: सप्ताह का दिन। पंचांग में वार सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक माना जाता है, आधी रात से नहीं।
  • नक्षत्र: आकाश को 27 बराबर भागों में बांटा गया है। चंद्रमा जिस भाग में होता है, वही उस समय का नक्षत्र है। हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं।
  • योग: सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 योग बनते हैं, जैसे प्रीति, सिद्धि, शुभ। व्यतीपात और वैधृति जैसे कुछ योग शुभ कामों के लिए टाले जाते हैं।
  • करण: तिथि का आधा भाग करण कहलाता है, इसलिए एक तिथि में दो करण होते हैं। कुल 11 करण हैं, जिनमें विष्टि करण को भद्रा कहते हैं।

राहु काल, यमगंड और गुलिक काल

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बांटा जाता है। वार के अनुसार इनमें से एक भाग राहु काल, एक यमगंड और एक गुलिक काल होता है। हर भाग लगभग डेढ़ घंटे का होता है, लेकिन मौसम के साथ दिन छोटा-बड़ा होने पर यह समय बदलता रहता है। राहु काल में नया काम, खरीदारी या यात्रा शुरू न करने की परंपरा है।

चौघड़िया कैसे देखें

चौघड़िया में दिन और रात दोनों को आठ-आठ भागों में बांटा जाता है। अमृत, शुभ और लाभ चौघड़िया अच्छे माने जाते हैं। चर चौघड़िया सामान्य है और यात्रा के लिए ठीक माना जाता है। उद्वेग, रोग और काल चौघड़िया में शुभ काम टाले जाते हैं। जल्दी में कोई काम करना हो तो लोग अक्सर चौघड़िया देखकर ही समय चुनते हैं।

अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

दिन के 15 मुहूर्तों में आठवां मुहूर्त अभिजीत कहलाता है, जो दोपहर के आसपास लगभग 45-50 मिनट का होता है। बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं माना जाता। ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले का समय है, जो पूजा, ध्यान और पढ़ाई के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

यह पंचांग कैसे तैयार होता है

इस पेज का पंचांग खगोलीय गणना से तैयार किया जाता है। ग्रहों की स्थिति लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांश से निकाली गई है और सभी समय नई दिल्ली के सूर्योदय के आधार पर भारतीय समय (IST) में दिए गए हैं। आपके शहर में सूर्योदय, राहु काल और चौघड़िया का समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। विवाह जैसे बड़े मुहूर्त के लिए अपनी कुंडली के अनुसार पंडित जी से सलाह जरूर लें।

4 अगस्त 2028 का पंचांग: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

4 August 2028 ko kaun si tithi hai?

+
इस दिन (4 अगस्त 2028) शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 11:52 तक है, उसके बाद पूर्णिमा तिथि लगेगी।

इस दिन कौन सी तिथि है?

+
इस दिन (4 अगस्त 2028) शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 11:52 तक है, उसके बाद पूर्णिमा तिथि लगेगी।

इस दिन राहु काल कब है?

+
नई दिल्ली के सूर्योदय के अनुसार इस दिन (शुक्रवार) राहु काल सुबह 10:46 से दोपहर 12:27 तक है। आपके शहर में यह समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।

इस दिन का शुभ मुहूर्त क्या है?

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अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 से दोपहर 12:53 तक है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:19 से सुबह 5:02 तक है। दिन में शुभ चौघड़िया: लाभ (सुबह 7:25 – सुबह 9:05), अमृत (सुबह 9:05 – सुबह 10:46), शुभ (दोपहर 12:27 – दोपहर 2:07)।

इस दिन कौन सा नक्षत्र है?

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इस दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रात 7:27 तक है, फिर श्रवण नक्षत्र शुरू होगा।

इस दिन चंद्रमा किस राशि में है?

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इस दिन चंद्रमा मकर राशि में है। चंद्रमा की राशि से ही दैनिक राशिफल तय होता है।

पंचांग के पांच अंग कौन से हैं?

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पंचांग के पांच अंग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण हैं। इन्हीं पांचों से किसी भी दिन का शुभ-अशुभ समय और मुहूर्त निकाला जाता है।
Pt. Jitendra Vyas
लेखक
Pt. Jitendra Vyas
Expert Vedic Astrologer & Vastu Consultant

Pt. Jitendra Vyas 1955 से चली आ रही वैदिक ज्योतिष परंपरा के वाहक और वास्तु शास्त्र के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने हज़ारों लोगों को करियर, विवाह और स्वास्थ्य जैसे जीवन के मामलों में मार्गदर्शन दिया है।

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