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11 सितंबर 2030 का पंचांग, बुधवार

शुक्ल पक्ष पूर्णिमा • शतभिषा नक्षत्र • धृति योग
लेखक: Pt. Jitendra Vyas · अपडेटेड: 29 अक्टूबर 2026
11 सितंबर 2030 का पंचांग, बुधवार
तिथि
शुक्ल पक्ष पूर्णिमा
नक्षत्र
शतभिषा
योग
धृति
राहु काल
दोपहर 12:17 से दोपहर 1:51 तक

11 सितंबर 2030 को कौन सी तिथि है?

इस दिन (11 सितंबर 2030) शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि रात 2:48 (12 सितंबर) तक है, उसके बाद प्रतिपदा तिथि लगेगी।

11 September 2030 ko kaun si tithi hai: शुक्ल पक्ष पूर्णिमा (बुधवार).

11 सितंबर 2030 का पंचांग: संक्षेप में

इस दिन 11 सितंबर 2030, बुधवार को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि रात 2:48 (12 सितंबर) तक है, इसके बाद प्रतिपदा तिथि शुरू होगी। शतभिषा नक्षत्र शाम 5:59 तक रहेगा, फिर पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र लगेगा। योग धृति है और पहला करण विष्टि (भद्रा) है। चंद्रमा पूरे दिन कुंभ राशि में रहेगा और सूर्य सिंह राशि में है। नई दिल्ली में सूर्योदय सुबह 6:04 और सूर्यास्त शाम 6:31 पर होगा। राहु काल दोपहर 12:17 से दोपहर 1:51 तक है, इस समय किसी नए या शुभ काम की शुरुआत न करें। बुधवार होने के कारण आज अभिजीत मुहूर्त नहीं माना जाता, शुभ काम के लिए अमृत, शुभ या लाभ चौघड़िया देखें। भद्रा रात 3:40 से दोपहर 3:11 तक रहेगी, भद्रा में शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।

पंचांग के पांच अंग

तिथिपूर्णिमा — रात 2:48 (12 सितंबर) तक, फिर प्रतिपदा
नक्षत्रशतभिषा — शाम 5:59 तक, फिर पूर्वाभाद्रपद (चरण 2)
योगधृति — रात 9:32 तक, फिर शूल
करणविष्टि (भद्रा) — दोपहर 3:11 तक, फिर बव — रात 2:48 (12 सितंबर) तक, फिर बालव
वारबुधवार
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदयसुबह 6:04
सूर्यास्तशाम 6:31
चंद्रोदयशाम 5:57
चंद्रास्तसुबह 5:19
चंद्र राशिकुंभ
सूर्य राशिसिंह
सूर्य नक्षत्रपूर्वाफाल्गुनी
दिनमान12 घंटे 27 मिनट

हिंदू मास और संवत

मास (पूर्णिमांत)भाद्रपद
मास (अमांत)भाद्रपद
विक्रम संवत2087
शक संवत1952
ऋतुवर्षा
दिशा शूलउत्तर

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:31 से सुबह 5:17 तक
अभिजीत मुहूर्तनहीं (बुधवार)

अशुभ समय

राहु कालदोपहर 12:17 से दोपहर 1:51 तक
यमगंडसुबह 7:37 से सुबह 9:10 तक
गुलिक कालसुबह 10:44 से दोपहर 12:17 तक
भद्रारात 3:40 से दोपहर 3:11 तक

11 सितंबर 2030 का चौघड़िया

दिन का चौघड़िया
लाभसुबह 6:04 – सुबह 7:37शुभ
अमृतसुबह 7:37 – सुबह 9:10शुभ
कालसुबह 9:10 – सुबह 10:44अशुभ
शुभसुबह 10:44 – दोपहर 12:17शुभ
रोगदोपहर 12:17 – दोपहर 1:51अशुभ
उद्वेगदोपहर 1:51 – दोपहर 3:24अशुभ
चरदोपहर 3:24 – शाम 4:57सामान्य
लाभशाम 4:57 – शाम 6:31शुभ
रात का चौघड़िया
उद्वेगशाम 6:31 – रात 7:57अशुभ
शुभरात 7:57 – रात 9:24शुभ
अमृतरात 9:24 – रात 10:51शुभ
चररात 10:51 – रात 12:17 (12 सितंबर)सामान्य
रोगरात 12:17 (12 सितंबर) – रात 1:44 (12 सितंबर)अशुभ
कालरात 1:44 (12 सितंबर) – रात 3:11 (12 सितंबर)अशुभ
लाभरात 3:11 (12 सितंबर) – सुबह 4:37 (12 सितंबर)शुभ
उद्वेगसुबह 4:37 (12 सितंबर) – सुबह 6:04 (12 सितंबर)अशुभ
अपनी कुंडली के अनुसार शुभ मुहूर्त जानें

पंचांग पूरे देश के लिए सामान्य समय बताता है। विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीद या नए काम की शुरुआत के लिए सही मुहूर्त आपकी कुंडली और शहर से तय होता है।

  • विवाह और गृह प्रवेश मुहूर्त
  • वाहन, संपत्ति खरीद और व्यापार आरंभ
  • नामकरण, मुंडन और अन्य संस्कार

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पंचांग क्या है और इसे कैसे पढ़ें?

पंचांग हिंदू कालगणना की वह पद्धति है जिससे किसी भी दिन का शुभ-अशुभ समय जाना जाता है। "पंचांग" का अर्थ है पांच अंग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, वाहन खरीद, यात्रा या किसी नए काम की शुरुआत से पहले इन्हीं पांच अंगों को देखकर मुहूर्त तय किया जाता है। व्रत और त्योहारों की तारीख भी पंचांग की तिथि से ही निकलती है।

पंचांग के पांच अंगों का अर्थ

  • तिथि: सूर्य और चंद्रमा के बीच हर 12 अंश की दूरी एक तिथि होती है। एक चंद्र मास में 30 तिथियां होती हैं: 15 शुक्ल पक्ष में (अमावस्या के बाद से पूर्णिमा तक) और 15 कृष्ण पक्ष में।
  • वार: सप्ताह का दिन। पंचांग में वार सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक माना जाता है, आधी रात से नहीं।
  • नक्षत्र: आकाश को 27 बराबर भागों में बांटा गया है। चंद्रमा जिस भाग में होता है, वही उस समय का नक्षत्र है। हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं।
  • योग: सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 योग बनते हैं, जैसे प्रीति, सिद्धि, शुभ। व्यतीपात और वैधृति जैसे कुछ योग शुभ कामों के लिए टाले जाते हैं।
  • करण: तिथि का आधा भाग करण कहलाता है, इसलिए एक तिथि में दो करण होते हैं। कुल 11 करण हैं, जिनमें विष्टि करण को भद्रा कहते हैं।

राहु काल, यमगंड और गुलिक काल

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बांटा जाता है। वार के अनुसार इनमें से एक भाग राहु काल, एक यमगंड और एक गुलिक काल होता है। हर भाग लगभग डेढ़ घंटे का होता है, लेकिन मौसम के साथ दिन छोटा-बड़ा होने पर यह समय बदलता रहता है। राहु काल में नया काम, खरीदारी या यात्रा शुरू न करने की परंपरा है।

चौघड़िया कैसे देखें

चौघड़िया में दिन और रात दोनों को आठ-आठ भागों में बांटा जाता है। अमृत, शुभ और लाभ चौघड़िया अच्छे माने जाते हैं। चर चौघड़िया सामान्य है और यात्रा के लिए ठीक माना जाता है। उद्वेग, रोग और काल चौघड़िया में शुभ काम टाले जाते हैं। जल्दी में कोई काम करना हो तो लोग अक्सर चौघड़िया देखकर ही समय चुनते हैं।

अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

दिन के 15 मुहूर्तों में आठवां मुहूर्त अभिजीत कहलाता है, जो दोपहर के आसपास लगभग 45-50 मिनट का होता है। बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं माना जाता। ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले का समय है, जो पूजा, ध्यान और पढ़ाई के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

यह पंचांग कैसे तैयार होता है

इस पेज का पंचांग खगोलीय गणना से तैयार किया जाता है। ग्रहों की स्थिति लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांश से निकाली गई है और सभी समय नई दिल्ली के सूर्योदय के आधार पर भारतीय समय (IST) में दिए गए हैं। आपके शहर में सूर्योदय, राहु काल और चौघड़िया का समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। विवाह जैसे बड़े मुहूर्त के लिए अपनी कुंडली के अनुसार पंडित जी से सलाह जरूर लें।

11 सितंबर 2030 का पंचांग: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

11 September 2030 ko kaun si tithi hai?

+
इस दिन (11 सितंबर 2030) शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि रात 2:48 (12 सितंबर) तक है, उसके बाद प्रतिपदा तिथि लगेगी।

इस दिन कौन सी तिथि है?

+
इस दिन (11 सितंबर 2030) शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि रात 2:48 (12 सितंबर) तक है, उसके बाद प्रतिपदा तिथि लगेगी।

इस दिन राहु काल कब है?

+
नई दिल्ली के सूर्योदय के अनुसार इस दिन (बुधवार) राहु काल दोपहर 12:17 से दोपहर 1:51 तक है। आपके शहर में यह समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।

इस दिन का शुभ मुहूर्त क्या है?

+
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:31 से सुबह 5:17 तक है। दिन में शुभ चौघड़िया: लाभ (सुबह 6:04 – सुबह 7:37), अमृत (सुबह 7:37 – सुबह 9:10), शुभ (सुबह 10:44 – दोपहर 12:17), लाभ (शाम 4:57 – शाम 6:31)।

इस दिन कौन सा नक्षत्र है?

+
इस दिन शतभिषा नक्षत्र शाम 5:59 तक है, फिर पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र शुरू होगा।

इस दिन चंद्रमा किस राशि में है?

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इस दिन चंद्रमा कुंभ राशि में है। चंद्रमा की राशि से ही दैनिक राशिफल तय होता है।

पंचांग के पांच अंग कौन से हैं?

+
पंचांग के पांच अंग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण हैं। इन्हीं पांचों से किसी भी दिन का शुभ-अशुभ समय और मुहूर्त निकाला जाता है।
Pt. Jitendra Vyas
लेखक
Pt. Jitendra Vyas
Expert Vedic Astrologer & Vastu Consultant

Pt. Jitendra Vyas 1955 से चली आ रही वैदिक ज्योतिष परंपरा के वाहक और वास्तु शास्त्र के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने हज़ारों लोगों को करियर, विवाह और स्वास्थ्य जैसे जीवन के मामलों में मार्गदर्शन दिया है।

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