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घर में मंदिर किस दिशा में होना चाहिए: वास्तु नियम

Mandir vastu: sahi disha, niyam aur vastu tips

✓ पं. जितेंद्र व्यास द्वारा समीक्षित
सीधा जवाब
वास्तु के अनुसार शुभ

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में मंदिर (पूजा घर) उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में होना सबसे शुभ माना जाता है। ईशान कोण न मिले तो पूर्व या उत्तर दिशा भी अच्छी है। पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए। मंदिर को दक्षिण दिशा, सीढ़ियों के नीचे, बेडरूम में या टॉयलेट की दीवार से सटाकर नहीं बनाना चाहिए।

घर में मंदिर किस दिशा में होना चाहिए: वास्तु नियम - mandir vastu

घर में मंदिर की दिशा: क्या करें और क्या न करें

✅ क्या करें

  • मंदिर उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में बनाएं; विकल्प के रूप में पूर्व या उत्तर।
  • पूजा करते समय मुख पूर्व या उत्तर की ओर रखें।
  • मूर्तियां ज़मीन से कुछ ऊंचाई पर, साफ चौकी या आसन पर रखें।
  • मंदिर के आसपास का रंग सफेद, हल्का पीला या हल्का नारंगी रखें।
  • रोज़ सफाई करें और सुबह-शाम दीपक जलाएं।

❌ क्या न करें

  • दक्षिण दिशा में मंदिर न बनाएं।
  • सीढ़ियों के नीचे या बेसमेंट में मंदिर न रखें।
  • टॉयलेट की दीवार से सटाकर या उसके ठीक ऊपर-नीचे मंदिर न बनाएं।
  • बेडरूम में मंदिर बनाने से बचें; मजबूरी हो तो पर्दा लगाएं।
  • टूटी या खंडित मूर्तियां और फटी तस्वीरें मंदिर में न रखें।

एक नज़र में: घर में मंदिर की दिशा

विषयवास्तु के अनुसार
मंदिर के लिए ईशान कोण क्यों सबसे शुभ हैवास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व कोने को ईशान कोण कहा जाता है।
पूर्व और उत्तर दिशा में मंदिरफ्लैट या छोटे घर में ईशान कोण में जगह न मिले तो मंदिर पूर्व दिशा में बनाया जा सकता है।
भगवान का मुख किस दिशा में होवास्तु के अनुसार पूजा करने वाले का मुख पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए।
मूर्तियों की ऊंचाई और संख्यामूर्तियां ज़मीन पर सीधे न रखें, लकड़ी की चौकी या आसन पर रखें।
फ्लैट और छोटे घर में मंदिरफ्लैट में अलग पूजा कमरा न हो तो लिविंग रूम के उत्तर-पूर्व कोने में दीवार पर लगने वाला लकड़ी का मंदिर रख सकते हैं।
मंदिर से जुड़ी आम गलतियांमंदिर को टॉयलेट की दीवार से सटाकर बनाना: फ्लैटों में यह बहुत आम गलती है।
मंदिर का रंग, रोशनी और ज़रूरी चीज़ेंमंदिर और पूजा घर के लिए सफेद, हल्का पीला, क्रीम या हल्का नारंगी रंग अच्छा माना जाता है।

घर में मंदिर की दिशा: पूरी जानकारी

मंदिर के लिए ईशान कोण क्यों सबसे शुभ है

वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व कोने को ईशान कोण कहा जाता है। ईशान का अर्थ है ईश्वर का स्थान। माना जाता है कि सुबह की पहली सकारात्मक ऊर्जा और सूर्य की रोशनी इसी दिशा से घर में आती है। इसलिए पूजा, ध्यान और मंदिर के लिए यह दिशा सबसे पवित्र मानी जाती है।

ईशान कोण को हमेशा साफ, हल्का और खुला रखने की सलाह दी जाती है। यहां भारी सामान, कूड़ा या जूते-चप्पल नहीं रखने चाहिए।

पूर्व और उत्तर दिशा में मंदिर

फ्लैट या छोटे घर में ईशान कोण में जगह न मिले तो मंदिर पूर्व दिशा में बनाया जा सकता है। पूर्व सूर्य की दिशा है और ज्ञान व स्वास्थ्य से जुड़ी मानी जाती है।

उत्तर दिशा कुबेर की मानी जाती है, यहां भी मंदिर बनाना शुभ है। पश्चिम दिशा को सामान्य माना जाता है, और दक्षिण दिशा में मंदिर बनाने से बचना चाहिए।

भगवान का मुख किस दिशा में हो

वास्तु के अनुसार पूजा करने वाले का मुख पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए। इसके लिए मूर्तियों और तस्वीरों का मुख पश्चिम या दक्षिण की ओर रखा जाता है।

अगर मंदिर पूर्व की दीवार पर है तो भगवान का मुख पश्चिम की ओर होगा और आप पूर्व की ओर मुख करके पूजा करेंगे। यह सबसे अच्छा माना जाता है।

मूर्तियां एक-दूसरे के ठीक आमने-सामने न रखें और मूर्तियों को दीवार से थोड़ा आगे रखें।

मूर्तियों की ऊंचाई और संख्या

मूर्तियां ज़मीन पर सीधे न रखें, लकड़ी की चौकी या आसन पर रखें। आम सलाह है कि भगवान के चरण बैठे हुए व्यक्ति के सीने के आसपास की ऊंचाई पर हों।

घर के मंदिर में बहुत बड़ी मूर्तियां न रखें; 9 इंच या उससे छोटी मूर्ति घर के लिए ठीक मानी जाती है। एक ही भगवान की कई मूर्तियां या तस्वीरें रखने से बचें।

फ्लैट और छोटे घर में मंदिर

फ्लैट में अलग पूजा कमरा न हो तो लिविंग रूम के उत्तर-पूर्व कोने में दीवार पर लगने वाला लकड़ी का मंदिर रख सकते हैं।

रसोई में मंदिर रखना हो तो उत्तर-पूर्व हिस्से में रखें, चूल्हे से दूर। बेडरूम में मजबूरी में मंदिर हो तो सोते समय उस पर पर्दा डाल दें और पैर मंदिर की ओर करके न सोएं।

मंदिर से जुड़ी आम गलतियां

मंदिर को टॉयलेट की दीवार से सटाकर बनाना: फ्लैटों में यह बहुत आम गलती है। वास्तु में इसे बड़ा दोष माना जाता है; हो सके तो मंदिर की जगह बदल दें या बीच में लकड़ी का पैनल लगाएं।

मंदिर में पूर्वजों की तस्वीर रखना: पितरों की तस्वीर भगवान के साथ मंदिर में नहीं रखनी चाहिए। इसे दक्षिण-पश्चिम दीवार पर अलग जगह लगाएं।

मंदिर के ऊपर सामान रखना: मंदिर के ऊपर की अलमारी में जूते, कपड़े या कबाड़ न रखें।

मंदिर में बहुत ज़्यादा मूर्तियां: छोटी जगह में ढेर सारी मूर्तियां रखने से भीड़ लगती है। अपने इष्ट देव और कुछ मुख्य देवताओं की मूर्तियां ही रखें।

टूटी चीज़ें: टूटा दीपक, फटी तस्वीर या खंडित मूर्ति तुरंत हटा दें।

मंदिर का रंग, रोशनी और ज़रूरी चीज़ें

मंदिर और पूजा घर के लिए सफेद, हल्का पीला, क्रीम या हल्का नारंगी रंग अच्छा माना जाता है। गहरे काले या भूरे रंग से बचें।

दीपक मंदिर के दक्षिण-पूर्व हिस्से में जलाना शुभ माना जाता है। मंदिर में शंख, घंटी, गंगाजल और ताज़े फूल रख सकते हैं। मुरझाए फूल और बासी प्रसाद रोज़ हटा दें।

घर में मंदिर की दिशा: आसान वास्तु टिप्स

  • मंदिर में रोज़ सुबह-शाम घी का दीपक जलाएं।
  • ईशान कोण को साफ रखें, वहां कूड़ादान या भारी सामान न रखें।
  • खंडित मूर्तियों को सम्मान से नदी या पीपल के पेड़ के पास रख दें।
  • मंदिर दक्षिण दिशा में बना हो और बदल न सकें तो भगवान का मुख ऐसा रखें कि पूजा करने वाले का मुख पूर्व या उत्तर की ओर हो।
  • नए घर में मंदिर की जगह तय करने से पहले नक्शे के साथ वास्तु विशेषज्ञ की सलाह लें।
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घर में मंदिर की दिशा: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

घर में मंदिर किस दिशा में होना चाहिए? +

वास्तु के अनुसार घर का मंदिर उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में होना सबसे शुभ है। जगह न हो तो पूर्व या उत्तर दिशा भी अच्छी है।

Ghar me mandir kis disha me hona chahiye? +

Vastu ke anusar ghar ka mandir north-east (ishan kon) me sabse shubh hai. Uske baad east ya north disha theek mani jati hai.

पूजा करते समय मुख किस दिशा में होना चाहिए? +

पूजा करते समय मुख पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए। इसके लिए भगवान का मुख पश्चिम या दक्षिण की ओर रखा जाता है।

क्या दक्षिण दिशा में मंदिर बना सकते हैं? +

वास्तु में दक्षिण दिशा में मंदिर बनाने से बचने की सलाह दी जाती है। मजबूरी हो तो भगवान का मुख ऐसा रखें कि आप पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके पूजा करें।

क्या बेडरूम में मंदिर रख सकते हैं? +

बेडरूम में मंदिर बनाने से बचें। मजबूरी हो तो उत्तर-पूर्व कोने में रखें और रात को उस पर पर्दा डाल दें।

घर के मंदिर में कितनी बड़ी मूर्ति रखनी चाहिए? +

घर के मंदिर में लगभग 9 इंच या उससे छोटी मूर्ति रखना ठीक माना जाता है। बहुत बड़ी मूर्तियां मंदिरों के लिए होती हैं।

क्या सीढ़ियों के नीचे मंदिर बना सकते हैं? +

नहीं, वास्तु में सीढ़ियों के नीचे मंदिर बनाना अशुभ माना जाता है।
ध्यान दें: यह जानकारी पारंपरिक वास्तु शास्त्र और प्रचलित वास्तु नियमों पर आधारित है। हर घर का नक्शा, दिशा और ज़रूरत अलग होती है, इसलिए निर्माण, तोड़-फोड़ या बड़े बदलाव से पहले अपने घर का नक्शा दिखाकर वास्तु विशेषज्ञ और इंजीनियर की सलाह ज़रूर लें। स्वास्थ्य, धन या कानून से जुड़े निर्णय केवल वास्तु के आधार पर न लें।
लेखक: VyasAstrology संपादकीय टीम  |  समीक्षा: Pt. Jitendra Vyas (03/11/2026)  |  अपडेट: 03/11/2026
Pt. Jitendra Vyas
समीक्षक
Pt. Jitendra Vyas
Expert Vedic Astrologer & Vastu Consultant

Pt. Jitendra Vyas 1955 से चली आ रही वैदिक ज्योतिष परंपरा के वाहक और वास्तु शास्त्र के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने हज़ारों लोगों को करियर, विवाह और स्वास्थ्य जैसे जीवन के मामलों में मार्गदर्शन दिया है।

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