दिवाली पूजा सामग्री लिस्ट: दिवाली पूजा की तैयारी अभी से करें। जानें लक्ष्मी पूजा सामग्री की पूरी सूची, पूजा करने का सही तरीका, शुभ मुहूर्त और जरूरी सावधानियां।
दिवाली पूजा सामग्री लिस्ट: दिवाली हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व दीपों की रोशनी, सुख-समृद्धि, खुशहाली और नई शुरुआत का प्रतीक है। कार्तिक मास की अमावस्या को मनाए जाने वाले इस त्योहार पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है। दिवाली की रात मां लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
दिवाली 2026 पर यदि आप भी घर में लक्ष्मी-गणेश पूजन की तैयारी कर रहे हैं, तो पूजा से पहले सभी जरूरी सामग्री एकत्रित कर लें। इस लेख में जानें दिवाली पूजा सामग्री लिस्ट 2026, लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा की संपूर्ण विधि, मंत्र, आरती, धार्मिक महत्व और पूजा से जुड़े जरूरी नियम।
दिवाली 2026 कब है? (Diwali 2026 Date)
वर्ष 2026 में दिवाली का त्योहार रविवार, 8 नवंबर को मनाया जाएगा। यह पर्व कार्तिक अमावस्या के अवसर पर मनाया जाता है। दिवाली की शाम मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और माता सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व है।
इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, रंगोली बनाते हैं, दीपक जलाते हैं और परिवार के साथ मिलकर दीपावली का उत्सव मनाते हैं।
दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त (Diwali Lakshmi Puja Muhurat 2026)
दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा प्रदोष काल में करना विशेष शुभ माना जाता है। प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद का समय होता है। इस दौरान स्थिर वृषभ लग्न में लक्ष्मी पूजन को विशेष महत्व दिया जाता है।
दिवाली 2026 तिथि और समय:
- दिवाली की तारीख: 8 नवंबर 2026, रविवार
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे
- अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे
लक्ष्मी पूजा की तिथियां और शुभ मुहूर्त
- लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त: शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक (अवधि: 1 घंटा 56 मिनट)
- प्रदोष काल: शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक
- वृषभ काल: शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 8 नवंबर 2026 को सुबह 11:27 बजे
- अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:31 बजे
अन्य विशेष मुहूर्त
- महानिशीथ काल (तांत्रिक पूजा एवं विशेष साधना के लिए): 8 नवंबर की रात 11:39 बजे से 9 नवंबर की रात 12:31 बजे तक।
- सिंह लग्न (व्यापारियों और दुकानदारों के लिए): 9 नवंबर को रात 12:51 बजे से सुबह 3:01 बजे तक।
दिवाली पूजा सामग्री लिस्ट (Diwali Puja Samagri List)
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा के लिए विभिन्न पूजन सामग्रियों की आवश्यकता होती है। पूजा के समय किसी वस्तु की कमी न हो, इसलिए खरीदारी से पहले यह पूरी सूची देख लें।
1. लक्ष्मी-गणेश पूजन की मुख्य सामग्री
- मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर
- भगवान गणेश की प्रतिमा
- माता सरस्वती की प्रतिमा (परंपरा के अनुसार)
- लकड़ी की चौकी
- लाल या पीला कपड़ा
- पूजा का आसन
- तांबे या पीतल का कलश
- नारियल
- आम के पत्ते
- गंगाजल
- चांदी या तांबे के सिक्के
- लक्ष्मी जी के चरण चिह्न
2. तिलक और पूजन सामग्री
- रोली और कुमकुम
- हल्दी
- चंदन
- अक्षत (साबुत चावल)
- मौली या कलावा
- जनेऊ
- सुपारी
- पान के पत्ते
- लौंग और इलायची
- इत्र
- फूल और फूलों की माला
- कमल का फूल
- कमल गट्टा
- धूपबत्ती और अगरबत्ती
- कपूर
- घंटी और शंख
3. दीपक और आरती की सामग्री
- मिट्टी के दीपक
- घी
- सरसों या तिल का तेल
- रुई की बत्तियां
- पांच बड़े दीपक
- आरती की थाली
- माचिस
- कपूर
- दीपक रखने के लिए थाली
4. भोग और प्रसाद की सामग्री
- खील और बताशे
- मिठाई
- फल
- नारियल
- पंचमेवा
- मखाने
- गुड़
- गन्ना
- साबुत धनिया
- घर में बने पकवान
- पंचामृत के लिए दूध, दही, घी, शहद और शक्कर
5. घर की सजावट के लिए सामग्री
- रंगोली के रंग
- फूलों की लड़ियां
- बंदनवार
- तोरण
- मिट्टी के दीपक
- मोमबत्तियां
- पूजा स्थल की सजावट के लिए फूल
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा कैसे करें? (Lakshmi Puja Vidhi in Hindi)
दिवाली की शाम मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा विधि-विधान से की जाती है। पूजा के दौरान सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन होता है और उसके बाद मां लक्ष्मी की आराधना की जाती है।
1. घर और पूजा स्थल की सफाई करें
दिवाली से पहले पूरे घर की अच्छी तरह सफाई करें। विशेष रूप से मुख्य द्वार, पूजा घर और घर के आंगन को साफ रखें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्वच्छ और व्यवस्थित घर में मां लक्ष्मी का वास होता है। मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं और फूलों से सजावट करें।
2. पूजा की चौकी स्थापित करें
शुभ मुहूर्त से पहले लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके बाद मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित करें। सामान्य पूजा परंपरा में भगवान गणेश को मां लक्ष्मी के बाईं ओर स्थान दिया जाता है।
प्रतिमाओं के सामने दीपक जलाएं और पूजा की सभी सामग्री व्यवस्थित रखें।
3. कलश स्थापना करें
एक कलश में स्वच्छ जल भरें। उसमें सुपारी, अक्षत और सिक्का डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते लगाकर नारियल स्थापित करें। कलश पर रोली से स्वस्तिक बनाएं और उसे पूजा स्थल पर रखें।
4. संकल्प और भगवान गणेश का पूजन करें
सबसे पहले हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर दिवाली पूजा का संकल्प करें। इसके बाद भगवान गणेश को तिलक लगाएं और दूर्वा, फूल, अक्षत तथा मोदक अर्पित करें।
गणेश मंत्र:
ॐ गं गणपतये नमः॥
मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें और भगवान गणेश से पूजा निर्विघ्न संपन्न होने की प्रार्थना करें।
5. मां लक्ष्मी का पूजन करें
अब मां लक्ष्मी को कुमकुम, चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करें। मां को लाल चुनरी, कमल का फूल, कमल गट्टा और श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं।
इसके बाद मां लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं और लक्ष्मी मंत्र का जाप करें।
मां लक्ष्मी मंत्र:
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
इस मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप करें।
6. भगवान कुबेर की पूजा करें
दिवाली पर भगवान कुबेर की पूजा का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें धन का देवता और धन-संपत्ति का रक्षक माना गया है।
पूजा के दौरान भगवान कुबेर को पुष्प, अक्षत और दीपक अर्पित करें।
कुबेर मंत्र:
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
7. बही-खाता और धन की पूजा करें
दिवाली पर व्यापारी वर्ग में बही-खाता और नए लेखा-जोखा की पूजा की विशेष परंपरा है। इस दिन नई बही, कलम, तिजोरी और धन रखने के स्थान पर तिलक लगाकर मां लक्ष्मी का आशीर्वाद लिया जाता है।
8. मां लक्ष्मी और गणेश जी को भोग लगाएं
पूजा के दौरान देवी-देवताओं को फल, मिठाई, खील, बताशे और घर में बने पकवानों का भोग लगाएं। इसके बाद जल अर्पित करें और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
9. लक्ष्मी-गणेश जी की आरती करें
अंत में भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की आरती करें। परिवार के सभी सदस्य आरती में शामिल हों। आरती के बाद सभी को प्रसाद बांटें और घर के मुख्य द्वार तथा अन्य स्थानों पर दीपक जलाएं।
दिवाली पर मां लक्ष्मी को क्या चढ़ाना चाहिए?
मां लक्ष्मी की पूजा में कुछ वस्तुओं का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। दिवाली के दिन इन वस्तुओं को पूजा में शामिल करने की परंपरा है।
- कमल का फूल: कमल का फूल मां लक्ष्मी का प्रिय पुष्प माना जाता है। इसे पूजा में अर्पित करना शुभ होता है।
- कमल गट्टा: कमल गट्टे का इस्तेमाल मां लक्ष्मी की पूजा और मंत्र जाप में किया जाता है।
- कौड़ी: कौड़ी को धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। कई परिवारों में इसे लक्ष्मी पूजन में शामिल किया जाता है।
- खील और बताशे: दिवाली पर खील और बताशे का भोग लगाने की पुरानी परंपरा है।
- नारियल: पूजा में नारियल को शुभता और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।
- फल और मिठाई: मां लक्ष्मी को ताजे फल और मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।
- हल्दी और कुमकुम: पूजा में हल्दी, रोली और कुमकुम का इस्तेमाल शुभ माना जाता है।
दिवाली पर दीपक जलाने का महत्व
दिवाली पर दीपक जलाने की परंपरा का विशेष धार्मिक, पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन घरों, मंदिरों और आंगन में दीपक जलाकर सुख, शांति, ज्ञान और समृद्धि की कामना की जाती है।
दीपक जलाने का प्रमुख पौराणिक और धार्मिक महत्व
- भगवान श्रीराम का अयोध्या आगमन: 14 वर्ष का वनवास पूरा करने और रावण का वध करने के बाद भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी दिवाली के दिन अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को घी के दीपकों से रोशन किया था। तभी से दिवाली पर दीपक जलाने की परंपरा प्रचलित है।
- माता लक्ष्मी का प्राकट्य: कार्तिक अमावस्या के दिन समुद्र मंथन से माता महालक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। माता लक्ष्मी के स्वागत और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए दिवाली की रात घरों में दीपक जलाए जाते हैं।
- अज्ञानता और नकारात्मकता का नाश: दीपक का प्रकाश अज्ञानता, भय और निराशा के अंधकार को दूर करने का प्रतीक है। यह जीवन में ज्ञान, आशा, सकारात्मकता और खुशहाली का संदेश देता है।
दीपक जलाने का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व
- सकारात्मकता का प्रतीक: दिवाली पर मिट्टी के दीपक जलाना शुभ माना जाता है। यह घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने का प्रतीक है।
- मन की शांति और एकाग्रता: दीपक की लौ को एकटक देखने की परंपरा ध्यान और एकाग्रता से जुड़ी है। शांत वातावरण में दीपक जलाने से मन को सुकून मिलता है और पूजा के समय ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिलती है।
- विशेष स्थानों पर दीपक जलाने की परंपरा: दिवाली की रात घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, तुलसी के पास और अन्य शुभ स्थानों पर दीपक जलाने का विधान है।
दिवाली पूजा के नियम और सावधानियां
- पूजा की दिशा: पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख रखें। घर का ईशान कोण पूजा के लिए शुभ माना जाता है।
- मूर्तियों की स्थापना: भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की मूर्तियां उचित दूरी पर स्थापित करें। माता लक्ष्मी की कमल पर विराजमान बैठी हुई प्रतिमा शुभ मानी जाती है।
- पूजा की तैयारी: चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर कलश स्थापित करें। पूजा सामग्री में श्रीयंत्र, कौड़ी और गोमती चक्र भी शामिल करें।
दीपक और आरती: घी या तेल का दीपक जलाएं और कपूर से आरती करें। माता लक्ष्मी की स्तुति के लिए श्रीसूक्त या उनके मंत्रों का जाप करें।
दिवाली पूजा में इन गलतियों से बचें
- मुहूर्त का ध्यान रखें: पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त में ही लक्ष्मी पूजन करें।
- खंडित मूर्तियों की पूजा न करें: टूटी हुई मूर्तियों को पूजा में शामिल न करें। पुरानी मूर्तियों का विसर्जन धार्मिक परंपरा के अनुसार करें।
- घर में अंधेरा न रखें: दिवाली की रात मुख्य द्वार और घर के अन्य हिस्सों में दीपक जलाएं। घर में स्वच्छता और शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखें।
दिवाली का धार्मिक महत्व क्या है?
- भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी: 14 वर्ष का वनवास पूरा करने और रावण का वध करने के बाद भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर पूरे नगर को रोशन किया था।
- माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा: कार्तिक अमावस्या की रात माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। माता लक्ष्मी धन-समृद्धि और भगवान गणेश बुद्धि एवं शुभता के प्रतीक हैं।
- भगवान कृष्ण और नरकासुर वध: भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर 16,000 कन्याओं को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था। इस विजय की खुशी में दीप जलाने की परंपरा जुड़ी है।
- समुद्र मंथन और माता लक्ष्मी का प्राकट्य: समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसी समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि भी अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, जिनकी स्मृति में धनतेरस मनाई जाती है।
- भगवान विष्णु का वामन अवतार: भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि का अभिमान दूर किया और उन्हें पाताल लोक का राजा बनाया। इस कथा का संबंध दीपोत्सव की परंपराओं से भी जोड़ा जाता है।
- मां काली की आराधना: पश्चिम बंगाल सहित कई क्षेत्रों में दिवाली की अमावस्या की रात मां काली की विशेष पूजा की जाती है। इसे काली पूजा के रूप में मनाया जाता है।
दिवाली का पर्व मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना के साथ जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संदेश देता है। इस दिन घर की साफ-सफाई, दीप प्रज्वलन और विधि-विधान से लक्ष्मी पूजन करने की परंपरा है।
यदि आप भी दिवाली पर घर में पूजा की तैयारी कर रहे हैं, तो ऊपर दी गई दिवाली पूजा सामग्री लिस्ट के अनुसार सभी जरूरी वस्तुएं पहले से एकत्रित कर लें। शुभ मुहूर्त में परिवार के साथ लक्ष्मी-गणेश पूजन करें और दीपों के इस त्योहार को श्रद्धा तथा उल्लास के साथ मनाएं।
Vyas Astrology की ओर से आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
दिवाली 2026 का त्योहार 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन कार्तिक अमावस्या पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होगी।
दिवाली पूजा सामग्री में लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा, चौकी, लाल कपड़ा, कलश, नारियल, आम के पत्ते, रोली, हल्दी, अक्षत, फूल, माला, दीपक, घी, कपूर, अगरबत्ती, फल, मिठाई, खील और बताशे शामिल करें।
8 नवंबर 2026 को लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त 5:54 से रात 7:50 बजे और बेंगलुरु में शाम 6:18 से रात 8:20 बजे तक है।
दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन में सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इसके बाद मां लक्ष्मी और अन्य देवी-देवताओं का पूजन होता है।
दिवाली पर दीपक जलाने की कोई एक अनिवार्य संख्या नहीं है। परिवार की परंपरा और श्रद्धा के अनुसार घर, मुख्य द्वार, पूजा स्थल और आंगन में दीपक जलाए जाते हैं।
मां लक्ष्मी को खील, बताशे, नारियल, फल, मिठाई, पंचमेवा और घर में बने सात्विक पकवानों का भोग लगाया जाता है।
हां, दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के साथ कुबेर देव की पूजा की भी परंपरा है। उन्हें धन और संपत्ति का रक्षक माना जाता है।
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