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घड़ी किस दिशा में लगाएं: दीवार घड़ी के वास्तु नियम

Ghadi kis disha me lagaye: sahi disha, niyam aur vastu tips

✓ पं. जितेंद्र व्यास द्वारा समीक्षित
सीधा जवाब
दिशा और नियम पर निर्भर

वास्तु शास्त्र के अनुसार दीवार घड़ी को उत्तर, पूर्व या पश्चिम दिशा की दीवार पर लगाना शुभ माना जाता है। उत्तर दिशा धन (कुबेर) की और पूर्व दिशा नई शुरुआत (सूर्य) की मानी जाती है, इसलिए घड़ी के लिए ये सबसे अच्छी दिशाएं हैं। दक्षिण दिशा की दीवार पर घड़ी लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। घर में बंद, टूटी या पीछे चलने वाली घड़ी नहीं रखनी चाहिए, और घड़ी मुख्य द्वार के ठीक ऊपर नहीं लगानी चाहिए।

घड़ी किस दिशा में लगाएं: दीवार घड़ी के वास्तु नियम - ghadi kis disha me lagaye

घड़ी की सही दिशा: क्या करें और क्या न करें

✅ क्या करें

  • घड़ी उत्तर या पूर्व की दीवार पर लगाएं; पश्चिम भी ठीक है।
  • गोल, अंडाकार या आठ कोने वाली घड़ी चुनें।
  • घड़ी हमेशा सही समय पर चलती रहे, या कुछ मिनट आगे रखें।
  • लकड़ी की या हल्के रंग की घड़ी अच्छी मानी जाती है।
  • पेंडुलम वाली घड़ी ड्रॉइंग रूम की उत्तर या पूर्व दीवार पर लगा सकते हैं।

❌ क्या न करें

  • दक्षिण दिशा की दीवार पर घड़ी न लगाएं।
  • बंद, टूटी या कांच टूटी घड़ी घर में न रखें।
  • मुख्य द्वार के ठीक ऊपर घड़ी न लगाएं।
  • बेडरूम में सिरहाने के ठीक ऊपर या पीछे घड़ी न लगाएं।
  • घड़ी को पीछे (कम समय) पर न रखें।

एक नज़र में: घड़ी की सही दिशा

विषयवास्तु के अनुसार
वास्तु में घड़ी का महत्वघड़ी समय और गति का प्रतीक है।
घड़ी किस दिशा में लगाएं (ghadi kis disha me lagaye)उत्तर दिशा: कुबेर की दिशा मानी जाती है।
बंद, टूटी और पीछे चलने वाली घड़ीबंद घड़ी: वास्तु में बंद घड़ी को सबसे बड़ी गलती माना जाता है।
बेडरूम, ड्रॉइंग रूम और ऑफिस में घड़ीबेडरूम: घड़ी उत्तर या पूर्व दीवार पर लगाएं।
घड़ी का आकार, रंग और प्रकारआकार: गोल, अंडाकार, चौकोर और आठ कोनों वाली घड़ी अच्छी मानी जाती है।
घड़ी उपहार में देनी चाहिए या नहींभारत में घड़ी उपहार में देना आम है।

घड़ी की सही दिशा: पूरी जानकारी

वास्तु में घड़ी का महत्व

घड़ी समय और गति का प्रतीक है। वास्तु में माना जाता है कि घर की घड़ी सही दिशा में और सही हालत में हो तो परिवार का अच्छा समय आता है और काम समय पर पूरे होते हैं। बंद या खराब घड़ी को रुके हुए समय और रुकी तरक्की का प्रतीक माना जाता है।

घड़ी लगभग हर कमरे में होती है, इसलिए इसकी सही जगह जानना आसान और काम का वास्तु उपाय है।

घड़ी किस दिशा में लगाएं (ghadi kis disha me lagaye)

उत्तर दिशा: कुबेर की दिशा मानी जाती है। यहां घड़ी लगाने से धन और नए अवसर आने की मान्यता है।

पूर्व दिशा: सूर्य की दिशा है, जो नई शुरुआत और ऊर्जा का प्रतीक है। पढ़ाई के कमरे और ड्रॉइंग रूम में पूर्व दीवार पर घड़ी अच्छी मानी जाती है।

पश्चिम दिशा: इसे भी घड़ी के लिए ठीक माना जाता है, खासकर जब उत्तर और पूर्व की दीवार खाली न हो।

दक्षिण दिशा: इसे यम की दिशा माना जाता है। वास्तु में दक्षिण दीवार पर घड़ी लगाने से तरक्की रुकने और परिवार के मुखिया के स्वास्थ्य पर असर की मान्यता है, इसलिए इससे बचें।

बंद, टूटी और पीछे चलने वाली घड़ी

बंद घड़ी: वास्तु में बंद घड़ी को सबसे बड़ी गलती माना जाता है। सेल खत्म हो तो तुरंत बदलें, और खराब घड़ी ठीक करवाएं या हटा दें।

टूटी घड़ी: कांच टूटी या फटी घड़ी नकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती है।

पीछे चलने वाली घड़ी: घड़ी कभी पीछे न रखें। कई लोग घड़ी 5-10 मिनट आगे रखते हैं, ताकि समय पर पहुंच सकें; वास्तु में इसे ठीक माना जाता है।

बेडरूम, ड्रॉइंग रूम और ऑफिस में घड़ी

बेडरूम: घड़ी उत्तर या पूर्व दीवार पर लगाएं। सिरहाने के ठीक ऊपर या पीछे घड़ी न हो, और बहुत तेज़ टिक-टिक करने वाली घड़ी से नींद खराब हो सकती है।

ड्रॉइंग रूम: बड़ी या पेंडुलम वाली घड़ी उत्तर या पूर्व दीवार पर लगाएं, जहां आते ही नज़र पड़े।

ऑफिस: घड़ी सामने की उत्तर या पूर्व दीवार पर हो, ताकि समय दिखता रहे। कुर्सी के ठीक पीछे घड़ी न लगाएं।

मुख्य द्वार: दरवाज़े के ठीक ऊपर घड़ी लगाने से बचें; मान्यता है कि इससे घर से निकलते समय तनाव रहता है।

घड़ी का आकार, रंग और प्रकार

आकार: गोल, अंडाकार, चौकोर और आठ कोनों वाली घड़ी अच्छी मानी जाती है। बहुत नुकीले या अजीब आकार से बचें।

रंग: उत्तर दीवार पर नीली, हरी या सफेद घड़ी; पूर्व दीवार पर लकड़ी के रंग की या हरी घड़ी अच्छी मानी जाती है। काले रंग की बड़ी घड़ी से बचने की सलाह दी जाती है।

पेंडुलम घड़ी: लगातार हिलता पेंडुलम गति और ऊर्जा का प्रतीक है। इसे ड्रॉइंग रूम की पूर्व या उत्तर दीवार पर लगाना शुभ माना जाता है।

घड़ी उपहार में देनी चाहिए या नहीं

भारत में घड़ी उपहार में देना आम है। वास्तु में इसे अशुभ नहीं माना जाता, बस उपहार की घड़ी अच्छी हालत में और चलती हुई हो।

चीनी परंपरा में घड़ी उपहार में देना अच्छा नहीं माना जाता, क्योंकि वहां 'घड़ी देना' के शब्द का उच्चारण अंतिम संस्कार जैसा होता है। यह भारतीय वास्तु का नियम नहीं है।

घड़ी की सही दिशा: आसान वास्तु टिप्स

  • घर की सभी घड़ियां चेक करें; बंद घड़ी का सेल तुरंत बदलें।
  • दक्षिण दीवार की घड़ी उत्तर या पूर्व दीवार पर लगाएं।
  • टूटी घड़ियां घर से हटा दें।
  • घड़ी सही समय या कुछ मिनट आगे रखें।
  • घर के पूरे वास्तु के लिए नक्शे के साथ विशेषज्ञ से सलाह लें।
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मंदिर, टॉयलेट, रसोई या बेडरूम गलत दिशा में हों तो घर का नक्शा दिखाकर आसान वास्तु उपाय जानें।

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घड़ी की सही दिशा: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

घड़ी किस दिशा में लगानी चाहिए? +

वास्तु के अनुसार दीवार घड़ी उत्तर, पूर्व या पश्चिम दिशा की दीवार पर लगाना शुभ है। दक्षिण दिशा से बचें।

Ghadi kis disha me lagaye vastu ke anusar? +

Ghadi ko north ya east ki deewar par lagana sabse shubh mana jata hai. South ki deewar par ghadi na lagayen.

दक्षिण दिशा में घड़ी क्यों नहीं लगानी चाहिए? +

वास्तु में दक्षिण को यम की दिशा माना जाता है। यहां घड़ी लगाने से तरक्की रुकने की मान्यता है।

क्या बंद घड़ी घर में रखना अशुभ है? +

हां, वास्तु में बंद घड़ी को रुके हुए समय और रुकी तरक्की का प्रतीक माना जाता है। इसे ठीक करवाएं या हटा दें।

बेडरूम में घड़ी कहां लगाएं? +

बेडरूम में घड़ी उत्तर या पूर्व की दीवार पर लगाएं। सिरहाने के ऊपर या पीछे न लगाएं।

क्या मुख्य द्वार के ऊपर घड़ी लगा सकते हैं? +

वास्तु में मुख्य द्वार के ठीक ऊपर घड़ी लगाने से बचने की सलाह दी जाती है।

घड़ी कैसी होनी चाहिए? +

गोल, अंडाकार या चौकोर, चलती हुई और साफ घड़ी अच्छी मानी जाती है। लकड़ी या हल्के रंग की घड़ी चुनें।
ध्यान दें: यह जानकारी पारंपरिक वास्तु शास्त्र और प्रचलित वास्तु नियमों पर आधारित है। हर घर का नक्शा, दिशा और ज़रूरत अलग होती है, इसलिए निर्माण, तोड़-फोड़ या बड़े बदलाव से पहले अपने घर का नक्शा दिखाकर वास्तु विशेषज्ञ और इंजीनियर की सलाह ज़रूर लें। स्वास्थ्य, धन या कानून से जुड़े निर्णय केवल वास्तु के आधार पर न लें।
लेखक: VyasAstrology संपादकीय टीम  |  समीक्षा: Pt. Jitendra Vyas (03/11/2026)  |  अपडेट: 03/11/2026
Pt. Jitendra Vyas
समीक्षक
Pt. Jitendra Vyas
Expert Vedic Astrologer & Vastu Consultant

Pt. Jitendra Vyas 1955 से चली आ रही वैदिक ज्योतिष परंपरा के वाहक और वास्तु शास्त्र के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने हज़ारों लोगों को करियर, विवाह और स्वास्थ्य जैसे जीवन के मामलों में मार्गदर्शन दिया है।

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