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19 मार्च 2026 का पंचांग, गुरुवार

कृष्ण पक्ष अमावस्या • उत्तराभाद्रपद नक्षत्र • शुक्ल योग
लेखक: Pt. Jitendra Vyas · अपडेटेड: 22 अक्टूबर 2026
19 मार्च 2026 का पंचांग, गुरुवार
तिथि
कृष्ण पक्ष अमावस्या
नक्षत्र
उत्तराभाद्रपद
योग
शुक्ल
राहु काल
दोपहर 1:59 से दोपहर 3:30 तक

19 मार्च 2026 का पंचांग: संक्षेप में

इस दिन 19 मार्च 2026, गुरुवार को चैत्र (पूर्णिमांत), फाल्गुन (अमांत) मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि सुबह 6:54 तक है, इसके बाद प्रतिपदा तिथि शुरू होगी। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र सुबह 4:04 (20 मार्च) तक रहेगा, फिर रेवती नक्षत्र लगेगा। योग शुक्ल है और पहला करण नाग है। चंद्रमा पूरे दिन मीन राशि में रहेगा और सूर्य मीन राशि में है। नई दिल्ली में सूर्योदय सुबह 6:26 और सूर्यास्त शाम 6:31 पर होगा। राहु काल दोपहर 1:59 से दोपहर 3:30 तक है, इस समय किसी नए या शुभ काम की शुरुआत न करें। दिन का सबसे शुभ समय अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से दोपहर 12:53 तक है।

पंचांग के पांच अंग

तिथिअमावस्या — सुबह 6:54 तक, फिर प्रतिपदा — सुबह 4:53 (20 मार्च) तक, फिर द्वितीया
नक्षत्रउत्तराभाद्रपद — सुबह 4:04 (20 मार्च) तक, फिर रेवती (चरण 1)
योगशुक्ल — रात 1:15 (20 मार्च) तक, फिर ब्रह्म
करणनाग — सुबह 6:54 तक, फिर किंस्तुघ्न — शाम 5:57 तक, फिर बव — सुबह 4:53 (20 मार्च) तक, फिर बालव
वारगुरुवार
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदयसुबह 6:26
सूर्यास्तशाम 6:31
चंद्रोदयसुबह 6:24
चंद्रास्तशाम 6:58
चंद्र राशिमीन
सूर्य राशिमीन
सूर्य नक्षत्रउत्तराभाद्रपद
दिनमान12 घंटे 5 मिनट

हिंदू मास और संवत

मास (पूर्णिमांत)चैत्र
मास (अमांत)फाल्गुन
विक्रम संवत2082
शक संवत1947
ऋतुशिशिर
दिशा शूलदक्षिण

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:51 से सुबह 5:38 तक
अभिजीत मुहूर्तदोपहर 12:05 से दोपहर 12:53 तक

अशुभ समय

राहु कालदोपहर 1:59 से दोपहर 3:30 तक
यमगंडसुबह 6:26 से सुबह 7:57 तक
गुलिक कालसुबह 9:27 से सुबह 10:58 तक

19 मार्च 2026 का चौघड़िया

दिन का चौघड़िया
शुभसुबह 6:26 – सुबह 7:57शुभ
रोगसुबह 7:57 – सुबह 9:27अशुभ
उद्वेगसुबह 9:27 – सुबह 10:58अशुभ
चरसुबह 10:58 – दोपहर 12:29सामान्य
लाभदोपहर 12:29 – दोपहर 1:59शुभ
अमृतदोपहर 1:59 – दोपहर 3:30शुभ
कालदोपहर 3:30 – शाम 5:01अशुभ
शुभशाम 5:01 – शाम 6:31शुभ
रात का चौघड़िया
अमृतशाम 6:31 – रात 8:01शुभ
चररात 8:01 – रात 9:30सामान्य
रोगरात 9:30 – रात 10:59अशुभ
कालरात 10:59 – रात 12:28 (20 मार्च)अशुभ
लाभरात 12:28 (20 मार्च) – रात 1:57 (20 मार्च)शुभ
उद्वेगरात 1:57 (20 मार्च) – रात 3:27 (20 मार्च)अशुभ
शुभरात 3:27 (20 मार्च) – सुबह 4:56 (20 मार्च)शुभ
अमृतसुबह 4:56 (20 मार्च) – सुबह 6:25 (20 मार्च)शुभ
अपनी कुंडली के अनुसार शुभ मुहूर्त जानें

पंचांग पूरे देश के लिए सामान्य समय बताता है। विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीद या नए काम की शुरुआत के लिए सही मुहूर्त आपकी कुंडली और शहर से तय होता है।

  • विवाह और गृह प्रवेश मुहूर्त
  • वाहन, संपत्ति खरीद और व्यापार आरंभ
  • नामकरण, मुंडन और अन्य संस्कार

चंद्रमा मीन राशि में: आज का राशिफल

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पंचांग क्या है और इसे कैसे पढ़ें?

पंचांग हिंदू कालगणना की वह पद्धति है जिससे किसी भी दिन का शुभ-अशुभ समय जाना जाता है। "पंचांग" का अर्थ है पांच अंग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, वाहन खरीद, यात्रा या किसी नए काम की शुरुआत से पहले इन्हीं पांच अंगों को देखकर मुहूर्त तय किया जाता है। व्रत और त्योहारों की तारीख भी पंचांग की तिथि से ही निकलती है।

पंचांग के पांच अंगों का अर्थ

  • तिथि: सूर्य और चंद्रमा के बीच हर 12 अंश की दूरी एक तिथि होती है। एक चंद्र मास में 30 तिथियां होती हैं: 15 शुक्ल पक्ष में (अमावस्या के बाद से पूर्णिमा तक) और 15 कृष्ण पक्ष में।
  • वार: सप्ताह का दिन। पंचांग में वार सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक माना जाता है, आधी रात से नहीं।
  • नक्षत्र: आकाश को 27 बराबर भागों में बांटा गया है। चंद्रमा जिस भाग में होता है, वही उस समय का नक्षत्र है। हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं।
  • योग: सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 योग बनते हैं, जैसे प्रीति, सिद्धि, शुभ। व्यतीपात और वैधृति जैसे कुछ योग शुभ कामों के लिए टाले जाते हैं।
  • करण: तिथि का आधा भाग करण कहलाता है, इसलिए एक तिथि में दो करण होते हैं। कुल 11 करण हैं, जिनमें विष्टि करण को भद्रा कहते हैं।

राहु काल, यमगंड और गुलिक काल

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बांटा जाता है। वार के अनुसार इनमें से एक भाग राहु काल, एक यमगंड और एक गुलिक काल होता है। हर भाग लगभग डेढ़ घंटे का होता है, लेकिन मौसम के साथ दिन छोटा-बड़ा होने पर यह समय बदलता रहता है। राहु काल में नया काम, खरीदारी या यात्रा शुरू न करने की परंपरा है।

चौघड़िया कैसे देखें

चौघड़िया में दिन और रात दोनों को आठ-आठ भागों में बांटा जाता है। अमृत, शुभ और लाभ चौघड़िया अच्छे माने जाते हैं। चर चौघड़िया सामान्य है और यात्रा के लिए ठीक माना जाता है। उद्वेग, रोग और काल चौघड़िया में शुभ काम टाले जाते हैं। जल्दी में कोई काम करना हो तो लोग अक्सर चौघड़िया देखकर ही समय चुनते हैं।

अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

दिन के 15 मुहूर्तों में आठवां मुहूर्त अभिजीत कहलाता है, जो दोपहर के आसपास लगभग 45-50 मिनट का होता है। बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं माना जाता। ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले का समय है, जो पूजा, ध्यान और पढ़ाई के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

यह पंचांग कैसे तैयार होता है

इस पेज का पंचांग खगोलीय गणना से तैयार किया जाता है। ग्रहों की स्थिति लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांश से निकाली गई है और सभी समय नई दिल्ली के सूर्योदय के आधार पर भारतीय समय (IST) में दिए गए हैं। आपके शहर में सूर्योदय, राहु काल और चौघड़िया का समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। विवाह जैसे बड़े मुहूर्त के लिए अपनी कुंडली के अनुसार पंडित जी से सलाह जरूर लें।

आने वाले व्रत और त्योहार

19 मार्च 2026 का पंचांग: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस दिन कौन सी तिथि है?

+
इस दिन (19 मार्च 2026) कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि सुबह 6:54 तक है, उसके बाद प्रतिपदा तिथि लगेगी।

इस दिन राहु काल कब है?

+
नई दिल्ली के सूर्योदय के अनुसार इस दिन (गुरुवार) राहु काल दोपहर 1:59 से दोपहर 3:30 तक है। आपके शहर में यह समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।

इस दिन का शुभ मुहूर्त क्या है?

+
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से दोपहर 12:53 तक है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:51 से सुबह 5:38 तक है। दिन में शुभ चौघड़िया: शुभ (सुबह 6:26 – सुबह 7:57), लाभ (दोपहर 12:29 – दोपहर 1:59), अमृत (दोपहर 1:59 – दोपहर 3:30), शुभ (शाम 5:01 – शाम 6:31)।

इस दिन कौन सा नक्षत्र है?

+
इस दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र सुबह 4:04 (20 मार्च) तक है, फिर रेवती नक्षत्र शुरू होगा।

इस दिन चंद्रमा किस राशि में है?

+
इस दिन चंद्रमा मीन राशि में है। चंद्रमा की राशि से ही दैनिक राशिफल तय होता है।

पंचांग के पांच अंग कौन से हैं?

+
पंचांग के पांच अंग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण हैं। इन्हीं पांचों से किसी भी दिन का शुभ-अशुभ समय और मुहूर्त निकाला जाता है।
Pt. Jitendra Vyas
लेखक
Pt. Jitendra Vyas
Expert Vedic Astrologer & Vastu Consultant

Pt. Jitendra Vyas 1955 से चली आ रही वैदिक ज्योतिष परंपरा के वाहक और वास्तु शास्त्र के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने हज़ारों लोगों को करियर, विवाह और स्वास्थ्य जैसे जीवन के मामलों में मार्गदर्शन दिया है।

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